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नेता और पुलिस पाल रहे हैं बभिया में बदमाश

Sun, 05 Apr 2015 02:02 AM IST
बरेली
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एक ओर जहां बभिया के कुछ लोग अपने बच्चों को पढ़ा लिखाकर गांव पर लगे कलंक को मिटाने की कोशिश में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर नेताओं के पैदा किए बदमाश अपनी करतूतों से इस गांव को  बदनाम कर रहे हैं। अवैध खनन हो या जमीनों पर कब्जे के मामले या फिर लूटपाट जैसे अपराध,  बागडोर इस गांव के बदमाशों के दो गुटों के हाथ में है। एक हिस्ट्रीशीटर पाताराम कश्यप का है तो दूसरा जगपाल यादव का। पाताराम को तो पुलिस ने हिम्मत जुटाकर गिरफ्तार जेल भेज दिया लेकिन जगपाल यादव अभी भी खुला घूम रहा है। पुलिस के अफसरों तक को नहीं पता कि वह कब पैरोल पर छूटा था और अब कहां गायब है।
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कैंट इलाके के गांव बभिया की आबादी करीब 30 हजार है। इसमें आधी आबादी कश्यप बिरादरी की है, इसके अलावा करीब पांच सौ यादवों के साथ ब्राह्मण, गूजर, पाली और अनुसूचित जाति के लोग भी गांव में रहते हैं। ज्यादातर सीधे साधे लोग हैं लेकिन यहां 19 हिस्ट्रीशीटर भी है। पाताराम कश्यप और जगपाल यादव  गुटों का मुख्य धंधा अवैध खनन है। इस कारण दोनों में प्रतिद्वंद्विता भी रहती है। जब भी पुलिस शिकंजा कसती है, ये नेताओं की शरण में पहुंच जाते हैं।
शुक्रवार को भी गांव दुबरा में लक्ष्मण के घर में घुसकर फायरिंग करने पर जब पुलिस पाताराम कश्यप के पीछे पड़ी तो उसने एक नेता की शरण लेने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने इससे पहले ही उसे दबोच लिया। शनिवार को उसे जेल भेज दिया गया।  पुलिस जल्द ही जगपाल यादव को भी पकड़ने का दावा कर रही है। लेकिन इलाके के लोग कहते हैं कि जगपाल यादव कोे पकड़ना पुलिस के लिए आसान नहीं होगा क्योंकि उसे एक पूर्व सांसद का संरक्षण हासिल है।
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पैरोल पर बाहर निकला जगपाल कहां है?
न कोतवाल को पता न कप्तान को
बरेली। जगपाल यादव पर एक डबल मर्डर समेत हत्या के तीन और मुकदमे  हैं।इसके अलावा बलवे के दो, जानलेवा हमले के तीन, लूट के दो आदि करीब दस मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2008 में उसे जिला बदर भी किया जा चुका है। 26 मार्च 2005 को उसने अपने साथियों के साथ अंधाधुंध फायरिंग कर जसवीर और उनके परिवार की द्रोपा देवी की हत्या कर दी थी। इस दोहरे हत्याकांड में जगपाल को दो फरवरी 2009 को उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा हुई थी जिसमें वह पैरोल पर रिहा हुआ।  
हिस्ट्रीशीटर जगपाल यादव के जेल से पैरोल पर आने की बात तो इंस्पेक्टर कैंट बता रहे हैं, लेकिन उन्हें ये पता नहीं कि वह पैरोल पर कब और कब तक के लिए आया है। इंस्पेक्टर का कहना है कि वह इस बारे में सोमवार को अदालत खुलने पर वहां से पता करेंगे कि जगपाल कब तक के पैरोल पर है।  बभिया चौकी इंचार्ज वीरेंद्र सिंह राणा कहते हैं जगपाल ने गुंडई की तो उसे भी जेल भेज दिया जाएगा उन्हें भी नहीं पता वह है कहां।
एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा बताते हैं कि किसी भी सजायाफ्ता मुल्जिम को किसी ठोस उद्देश्य पर डीएम के आदेश पर पैरोल मिलता है। उसे पुलिस अभिरक्षा में जेल से छोड़ा जाता है। इसमें पुलिस की रिपोर्ट भी जरूरी होती है। पैरोल पर आने वाले की गतिविधि पर नजर रखती है। पैरोल का उद्देश्य पूरा हो जाने पर निश्चित अवधि में मुल्जिम पुन: जेल चला जाता है। बीच में भी चाल चलन ठीक न होने पर पुलिस जेल भेज सकती है। एसपी सिटी बताते हैं कि जगपाल के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। रविवार को वह इस बारे में थाने से पता करेंगे।

पुलिस वाले डरते हैं
बरेली। बभिया गांव के बदमाशों का वर्दी वालों पर खौफ  है। शाम ढलते ही पुलिस कर्मियों की गांव में घुसने की हिम्मत नहीं होती है। बृहस्पतिवार को पाताराम को पुलिस ने दौड़ाया तो उसने अंटी के दो तमंचे निक ाल लिए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पुलिया के पास उसने दौड़ाने वाले दरोगा पर दोनों तमंचे सीधे कर दिए थे पर गोली नहीं चलाई।
2013 में दबिश के दौरान पिता कृष्णपाल को उठाकर जीप में बैठाने से गुस्साए छोटू ने पुलिस के चालक अनिरुद्ध यादव की हत्या कर दी थी। इसके  दबिश देने गए सिपाही पर गोली चलाई गई थी।  दुबरा गांव में पाताराम की पिटाई कर दी गई थी, लेकिन इसके बाद पाताराम और उसके साथी बभिया चौकी के सामने से ही बाइकों पर सवार होकर तमंचे लेकर वहां पहुंच गए। वहां उन्होंने जमकर फायरिंग की लेकिन चौकी पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोका तक नहीं।

सिपाही के हत्यारे बेच रहे हैं कच्ची शराब
कैंट थाने के जीप चालक अनिरुद्ध यादव की हत्या  का मुख्य आरोपी छोटू है। छोटू, उसके पिता कृष्णपाल  बबलू और गुड्डू अभी जेल में हैं लेकिन हाईकोर्ट से इन सभी की जमानत  हो चुकी है। इस मामले में जमानत पर छूट चुके छोटू के भाई मुनेंद्र सिंह, राजीव, सतीश के अलावा रामभजन, रपटू, गप्पू और संजीव कच्ची शराब के कारोबार में लग गए हैं। गांव में खुलेआम वह शराब बेचते हैं, लेकिन पुलिस उनके खिलाफ कोई कार्रवाई ही नहीं कर पाते हैं।

-बभिया गांव में सिपाही ही हत्या होने के बाद ही पुलिस चौकी खोली गई थी। यहां के अपराधियों पर समय-समय पर कार्रवाई होती रहती है, पूरा ब्यौरा तैयार कराकर उनके खिलाफ कार्रवाई कराएंगे। गांव में कच्ची शराब और खनन की जानकारी मिलने पर आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमों से छापामारी कराई जाएगी- विजय सिंह मीना, आईजी   
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