इंजीनियर दंपति की हत्या और लूट में जेल गई रुकैया की खुद एक कहानी है। रूकैया ने बताया कि 30 साल पहले अलीगंज के गैनी गांव के हशमुद्दीन का भाई उसे शादी के बहाने बिहार से ले आया था। यहां उसने उसे टीबी के मरीज छैमार बाले उर्फ बालम निवासी फतेहगंज पश्चिमी के हाथ दस हजार रुपये में बेच दिया था। बालम की पहली पत्नी रुकसाना उसे छोड़कर राजू के साथ रहने लगी थी। बालम की मौत के बाद उसके परिवार के लोगों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। वह आठ साल के बेटे रुस्तम और बेटी को लेकर चौपुला के पास गिहार बस्ती में आकर रहने लगी। रुकैया के बालम को छोड़कर जाने के बाद उसके बेटे आजाद की परवरिश भी उसी ने की थी। रुकैया का कहना था कि सलमान घटना से तीन दिन पहले उसके पास आया और सुरेश शर्मा नगर में डकैती के लिए एक घर की तलाश करने को कहा था। उसने ही इंजीनियर दंपति का घर तलाश करके सलमान को दिखाया था।
धौराटांडा से मिला पुलिस को क्लू
भोजीपुरा के कस्बा धौराटांडा से पुलिस को घटना के खुलासे को क्लू मिला था। होली के बाद फतेहगंज पश्चिमी से सलमान ने कस्बा धौराटांडा अपने रिश्तेदारों के पास आकर घटना करने की चर्चा की थी। यहां से क्लू मिलने के बाद मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने काम शुरू कर दिया था।
तीन जिलों की पुलिस फेल हो गई
डीआईजी ने बरेली के साथ बदायूं, शाहजहांपुर और पीलीभीत की क्राइम ब्रांचों को भी घटना का खुलासा करने के लिए लगाया था। लेकिन तीनों टीमों में से कोई भी घटना का खुलासा नहीं कर पाई। टीमों की मेहनत बेनतीजा रही।
परिवार के लोगों को क्यों नहीं बुलाया
सवाल उठ रहा है कि घटना के खुलासे के वक्त इंजीनियर दंपति के परिवार के लोगों को क्यों नहीं बुलाया गया। अक्सर परिवार वालों को संतुष्ट करने के लिए बुलाया जाता है, लेकिन इतने बड़े खुलासे में पुलिस इससे कतरा गई।
युनुस भी मुल्जिम बनना चाहिए
सोने के जेवर को गलाकर गिन्नी बनाने वाले बिलासपुर के युनुस को पुलिस ने मुल्जिम क्यों नहीं बनाया जबकि उसे तो पुलिस की कहानी के मुताबिक मुल्जिम बनाया ही जाना चाहिए था, क्योंकि वह भी छैमार गैंग का हिस्सा है।
मुखबिर का हत्यारा है सलमान
सुरेश शर्मा नगर के ट्रिपल मर्डर केस का खुलासा कराने वाले घुमंतू जाति के पुलिस के मुखबिर मुशर्रफ निवासी कादरचौक बदायूं की हत्या में भी सलमान नामजद है। पुलिस अभी तक उसे पकड़ नहीं पाई है।
खुलासा तब जब माल बरामद हो
इंजीनियर गोपेश्वर सिंह के भाई वीर सिंह राज का कहना है कि पुलिस के खुलासा तब सही माना जाएगा, जब माल बरामद हो जाए। मामूली सी रकम की बरामदगी करने से तो इस खुलासे पर सवाल खड़े हो गए हैं।