फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान ठप, अब छह पर हमला

Fri, 20 Mar 2015 01:11 AM IST
बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रशासन ने आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान ठप कर लोगों की मुसीबत बढ़ा दी है। आवारा कुत्ते फिर सक्रिय हो गए हैं। कुत्तों ने बृहस्पतिवार को पांच मासूमों समेत छह को नोच डाला। 14 साल के बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
विज्ञापन

 अपराह्न चार बजे आदलपुर गांव के द्वारिका प्रसाद का 14 वर्षीय बेटा केंद्रपाल खेत पर घास काटने गया था। वहां दस से भी ज्यादा आवारा कुत्ते उस पर झपट पड़े। उसके पेट, सिर, पीठ, जांघ और सीने पर नोच डाला। चीख सुनकर गन्ना छील रहे सोमपाल आदि ग्रामीणों ने दौड़कर केंद्रपाल को बचाया। उसे सीएचसी ले जाया गया वहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। बीस मिनट बाद पड़ोस के गांव इटौवाधुरा में मोहन लाल के 10 वर्षीय बेटे हेमंत पर कुत्तों ने हमला कर दिया। वहां गुजर रहे बाइक सवार ने बच्चे को बचाया। इसके बाद दो किलोमीटर की दूरी पर बसे बकौली गांव में भी ओमप्रकाश के 12 वर्षीय बेटे धर्मेंद्र और परमानंद के 11 साल के बेटे भूपेंद्र पर हमले की सूचना आई। दोनों को घर वाले सीएचसी लाए।  
बहांपुर गांव में भी कुत्तों ने एक छप्पर में घुसकर सीता राम को नोच दिया। टांडाछंगा में खेमपुर गांव के सद्दीक अहमद की दस वर्षीय बेटी मुस्कान पर घर के सामने खेलते समय हमला कर दिया। सीएचसी में उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया।
विज्ञापन


तो कागजों में तो चल रहा है अभियान
डीएम के आदेश के बाद भी स्थानीय प्रशासन ने आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान एक-दो दिन चलाकर बंद कर दिया। पहले होली का बहना बनाया गया। होली की छुट्टी से कर्मचारी लौटे तो अभियान शुरू नहीं किया गया। हालांकि एसडीएम जिला पंचायत और वन विभाग की टीमों के मूवमेंट का दावा कर रहे हैं।

इंसेट-
दो महीने में आठ सौ केस
सीएचसी प्रभारी डॉ. केसी जोशी ने बताया कि दो महीने में करीब आठ सौ बच्चों को रैबीज के टीके लगाए हैं। हालांकि बीस दिन तक कोई केस नहीं आया था। उन्होंने बताया कि आदलपुर गांव के केंद्रपाल की हालत नाजुक है इसलिए उसे जिला अस्पताल भेजा गया है।

इंसेट-
मृत पशुओं को क्यों फेंक रहे हो
आदलपुर गांव के लोगों का कहना है कि उनके गांव में पुलिया के पास मृत पशुओं और वेस्ट मैटेरियल डाला जा रहा है। इस कारण यहां दिनभर आवारा कुत्ते जमा रहते हैं। पहले यह मैटेरियल बहेड़ी बाईपास पर चूना भट्ठी के पास डाला जाता था  

इंसेट-
अब तक जा चुकी हैं छह जानें
12 जनवरी को शरीफनगर गांव के संजीव कुमार की नौ साल की बेटी अंशिका को खेत पर जाते समय नोच डाला था। उसने इलाज के दौरान 18 जनवरी को दम तोड़ दिया था।
15 जनवरी को रसूलपुर गांव के श्यामवीर की 11 साल की बेटी रिंकी ईंट भट्ठे पर पिता को खाना देने जा रही थी। दोपहर करीब बारह बजे उस पर कुत्तोे ने हमला कर दिया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
24 जनवरी को टांडामीर नगर निवासी शफीक अहमद के 10 साल के बेटे शारिक पर भी जंगल में हमला कर दिया था। उसने भी मौके पर दम तोड़ दिया।
31 जनवरी 2015 नगर पंचायत फरीदपुर निवासी 14 साल का मुजम्मिल पुत्र हनीफ अहमद ईंट भट्ठे पर पिता के साथ काम करने के लिए गया था। दोपहर करीब बारह बजे बरसमी के खेतो पर बैठे आवारा कुत्तों ने उसे नोच दिया।
22 फरवरी 2015 को नवायल निवासी भैरो प्रसाद  के 11 वर्षीय बेटे अशोक पर भाटिया फार्म के पास करीब चार बजे आवारा कुत्तो के एक झुंड ने उस पर हमला बोल दिया। अशोक के सीने, गले व सिर पर दांत गाड़ दिए थे।
आखा गांव के ओम प्रकाश के बेटे को करीब एक साल पहले आवारा कुत्तों ने काटकर घायल कर दिया था। 10 फरवरी  को उसकी इलाज के दौरान बरेली में मौत हो गई। हालांकि इस मासूम को प्रशासन ने आवारा कुत्तों से हुई मौत से अलग रखा है। प्रशासन का कहना है कि यह पुराना मामला है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें