बिशारतगंज में तालाबों को पाटकर हुए अवैध निर्माण को हटाने के बारे में हाईकोर्ट के आदेश का निर्धारित समय पर पालन नहीं हुआ तो जिलाधिकारी के खिलाफ अवमानना का वाद दायर कर दिया गया है।
यह वाद बिशारतगंज निवासी जाबिर हुसैन व इकरार हुसैन ने दायर किया है। जिसमें कहा है कि अहमदनगर रकबे में पांच तालाब है। जिनमें से अधिकांश का वजूद ही खत्म हो गया है। जो तालाब बचे है उन्हें नगर पंचायत कूड़ा डलवाकर पाटने में लगी है। पिछले साल नवंबर में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि तहसील के रिकार्ड में गाटा संख्या 193, 264, 303, 443, एवं 455 तालाब दर्ज है। गाटा संख्या 193 का क्षेत्रफल करीब पांच बीघा है, नगर पंचायत ने नाला बनवा दिया। शेष भूमि पर आसपास खेत वालों ने कब्जा कर लिया। तालाब का वजूद ही खत्म हो गया। गाटा संख्या 264 का क्षेत्रफल करीब 16 बिस्वा को पाटकर उपले पाथे जा रहे है। मोहल्ले के लोगों ने कब्जा कर रखा है। गाटा संख्या 303 तालाब के नाम से जाना जाता था, जिसका क्षेत्रफल सात बीघा है। वार्ड नौ में स्थित इस तालाब के आधे से ज्यादा भाग को पाटकर कब्जा कर लिया गया। शेष बचे भाग को नगर पंचायत के सफाई कर्मी कूड़ा डालकर पाटने में लगे हुए है। गाटा संख्या 443 का क्षेत्रफल 13 बीघा है। मुख्य रोड के किनारे के इस तालाब का नाम ताल कटोरा है। जिसमें नाला बनाने के बाद पानी सूखा दिया गया है। फिलहाल दीवार का निर्माण तालाब में कराया जा रहा है। गाटा संख्या 455 का क्षेत्रफल ढाई बीघा है जिसे पाटकर नगर पंचायत दो दशक पूर्व मार्केट का निर्माण करा चुका है। तालाब पाटे जाने के कारण जल संरक्षण की गंभीर समस्या का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग की गई।