Compensation only after matching DNA
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
हाईवे पर इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के पास हुए भीषण हादसे में मरने वाले 24 यात्रियों में से किसी भी शव की तीसरे दिन भी शिनाख्त नहीं हो पाई है। रोते बिलखते परिजन तो पहुंच रहे हैं लेकिन शवों की हालत इतनी खराब है कि उनकी शिनाख्त नहीं कर पा रहे हैं। डीएनए टेस्ट ही शवों की शिनाख्त का अंतिम जरिया बचा है जिसके जरिए शिनाख्त की कोशिश की जा रही है, इसलिए डॉक्टरों ने 14 नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं। डीएनए का मिलान होने के बाद ही मृतकों को मुआवजा दिए जाने की कार्रवाई शुरू होगी।
रविवार को देर रात इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के पास ट्रक और गोंडा डिपो की बस की भिड़त में 25 यात्रियों की मौत से लखनऊ तक खलबली है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने तीन मंत्रियों को सरकारी विमान से बरेली भेजा था। हादसा इतना भीषण हुआ है कि शव आग की लपटों में बुरी तरह से भुन गए हैं। चेहरे से तो पहचान होना मुश्किल है। शरीर के बाकी हिस्सों से भी शवों को पहचाना नहीं जा रहा है। कपड़ों में किसी तरह लपेटकर पुलिस शवों को पोस्टमार्टम लाई है। हादसे के बाद से ही पुलिस और प्रशासन के अफसरों की टीमें शवों की पहचान में लगी हुई हैं। शवों की पहचान कराने का प्रशासन के पास डीएनए टेस्ट की एक तरीका है। डीएनए टेस्ट के लिए डॉक्टरों की टीम ने 14 नमूने लिए हैं। दस दावेदारों के भी सेंपल लिए गए हैं। प्रभारी डीएम एवं एडीएम (वित्त एवं राजस्व) मनोज ने बताया कि पहचान डीएनए के मिलान के बाद ही मृतकों की पहचान हो पाएगी। इसके लिए शवों से नमूने लेकर जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजे जा रहे हैं। जांच के लिए दावेदारों का भी डीएनए को नमूना लिया जाएगा। दोनों के मिलान के बाद भी शवों की शिनाख्त होगी। इसके बाद मुआवजे दिए जाने की कार्रवाई होगी।