Three hundred and a half kilometers came, crying after seeing the skeleton
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
शफीक ने दिल्ली से बस पर चढ़ने से पहले अपने अब्बा को फोन किया था कि ईद पर घर आ रहा हूं। जब शफीक नहीं पहुंचा न ही उसका फोन आया तो परेशान परिवार ने खोजबीन शुरू की। अखबारों में हादसे की खबर पढ़कर शफीक के अब्बा हाजी मोहम्मद हनीफ अपने परिवार के साथ बरेली पहुंच गए। मंगलवार सुबह जिला अस्पताल में अपने कलेजे के टुकड़े की शिनाख्त के लिए पहुंचे अब्बा कंकालों को देखकर बेसुध होने से बचे। वह फफकते हुए बस इतना बोल सके कि मेरे बेटे ये तूझे क्या हो गया। तूझे आखिरी बाद देखना भी मेरे नसीब में नहीं। जिला अस्पताल के स्टाफ उन्हें फफकते देखकर संभालने लगा। दिल्ली में कपड़े का काम करने वाले शफीक भी इसी बस में सवार था, उसके परिजन देर रात बरेली जिला अस्पताल और कोतवाली में पहुंचे। परिजनों को नहीं पता था कि शकील की मौत हो चुकी है। पहले वह कोतवाली पहुंचे। घायलों की सूची में उन्हें बेटे का नाम नहीं मिला। जिसके बाद रात परिवार ने एक लॉज में बिताकर सुबह जिला अस्पताल पहुंचे। लेकिन कंकालों के बीच अपने कलेजे के टुकड़े को नहीं ढूंढ सके।
ट्रक चालक को पुलिस ने भेजा जेल
बड़ा बाईपास पर बस और ट्रक की टक्कर के बाद पुलिस ने ट्रक चालक शाकिर अली पुत्र जाकीर अली को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ बिथरीचैनपुर थाने में हादस और संपत्ति क्षति का मुकदमा लिखा गया था। मंगलवार को चालक को जेल भेजा गया। अब इस मामले की विवेचना बिथरीचैनपुर थाने के दरोगा बलिस्टर त्यागी को दी गई है।