पिछले साल गाजियाबाद में हुए ऑडी हिट एंड रन मामले में गाजियाबाद पुलिस ने एक बार फिर खेल कर दिया। क्राइम ब्रांच ने अपनी चार्जशीट में कार मालिक डॉ. मनीष रावत को लापरवाही पूर्वक कार चलाकर लोगों की गैर इरादतन हत्या करने का दोषी तो बनाया है लेकिन इश्हाक के खिलाफ साजिश रचने का दोषी नहीं बनाया है। अब इश्हाक इस चार्जशीट के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है।
यह था मामला
27 जनवरी 2017 को गाजियाबाद के इंदिरापुरम में तेज रफ्तार ऑडी ने टेंपो में टक्कर मार दी थी। यह कार दिल्ली में सफदरजंग हास्पिटल के डॉ. मनीष रावत की थी और इस हादसे में टेंपो में सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसे के तीन दिन बाद रिठौरा के गांव लभेड़ा निवासी इश्हाक अहमद नाम बताकर एक व्यक्ति मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुआ। उसने स्वयं को ऑडी का चालक बताया। इसके बाद कथित इश्हाक को जमानत मिल गई और फिर वह गायब हो गया। वारंट जारी होने के बाद इश्हाक की तलाश में गाजियाबाद पुलिस उसके गांव लभेड़ा पहुंची। इसके बाद सारा माजरा खुल गया। इश्हाक ने बताया कि वह तो ट्रक चालक है। कुछ समय पहले उसके पास ही घर में किराये पर रहने वाले इम्त्यिाज को उसने अपने दस्तावेज फोटोस्टेट को दिए थे। इसके बाद इश्हाक ने पैरवी शुरू की तो सामने आया कि सैय्यद इम्त्यिाज कादरी नाम का व्यक्ति ही खुद को इश्हाक बताकर कोर्ट में पेश हुआ था।
दोबारा ऐसे हुआ खेल
इश्हाक की पैरवी के बाद गाजियाबाद क्राइम ब्रांच को मामले में दोबारा जांच के आदेश दिए गए। पूरा मामला खुलने के बाद गाजियाबाद पुलिस ने इश्हाक से सरकारी गवाह बनने को कहा तो वह तैयार हो गया। इस बीच 23 जनवरी को कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पता लगा कि क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट में दोबारा खेल कर दिया है। इश्हाक के अधिवक्ता मुस्तकीम अहमद ने बताया कि हादसे के दौरान गाड़ी चलाने के मामले में डॉ. मनीष रावत को आरोपी बनाया गया है लेकिन इश्हाक को पुलिस ने गवाह नहीं बनाया। इसके अलावा इश्हाक के दस्तावेजों का प्रयोग व उसके नाम का इस्तेमाल करने का जो षडयंत्र रचा गया है, उसमें डॉ. मनीष को आरोपी नहीं बनाया गया है। इसके चलते चार्जशीट के खिलाफ इश्हाक हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।