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बरेली के छात्रों के संपर्क में हैं चार पाकिस्तानी

Sun, 10 Jan 2016 01:33 AM IST
बरेली
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बरेली। पाकिस्तानी जासूस इजाज की गिरफ्तारी के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आईएसआई अपने नेटवर्क को और मजबूत करने की साजिश कर रहा है। व्हाट्सएप पर ग्रुप बनाकर बरेली के छात्रों को जोड़कर उनके जरिए सूचनाएं संकलित करने का खेल अब पाकिस्तानी की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने खेला है। हाल ही में एक सुरक्षा एजेंसी को ऐसे चार संदिग्ध पाकिस्तानियों के नंबर मिले हैं, जो बरेली के छात्रों से लगातार मोबाइल पर संपर्क में हैं। छात्रों के पास कुछ संदिग्धों की कॉल सऊदी अरब से भी आ रही है। आईजी ने इस मामले की छानबीन के लिए एटीएस को लगाया है।
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खुफिया एजेंसियां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली, मुरादाबाद, पीलीभीत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, अमरोहा और संभल आदि जिलों में आईएसआई की गतिविधियां संचालित होने का खुलासा कर चुकी हैं। बरेली के दीवानखाना में रहकर मामूली सा फोटोग्राफर बनकर पाकिस्तान के लिए काम करने वाले इजाज ने मेरठ में पकड़े जाने के बाद सबको चौंका दिया। संभल के युवक के आईएसआई से तार जुड़े होने पर गिरफ्तार होने के बाद यह बात और पुख्ता हो गई है कि पश्चिमी यूपी में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के और भी गुर्गे हम लोगों के बीच छिपे हुए हैं।  व्हाट्सएप पर ग्रुप बनाकर छात्रों को जोड़ने वाले पाकिस्तानी का मकसद क्या है। इस पूरे मामले की जांच साइबर सेल और सर्विलांस सेल तो अपने स्तर से कर ही रही है। आईजी ने एटीएस को भी पाकिस्तानी ग्रुप एडमिन के बारे में पता लगाने के लिए लगा दिया है। उधर, एटीएस के सूत्रों के मुताबिक चार पाकिस्तानी नागरिकों के संदिग्ध नंबर मिले हैं। यह लोग बरेली के दो छात्रों के संपर्क में हैं। सऊदी अरब से कुछ संदिग्धों नंबरों से बरेली के कुछ लड़कों पर कॉल आ रही है। एटीएस ने सभी संदिग्ध नंबरों को सर्विलांस पर लेकर काम करना शुरू कर दिया है।
फेसबुक से भी आईडी चुरा लेते हैं
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के एजेंटों से सावधान रहने की जरूरत है। वह भारतीय लड़कों की आईडी हैक करके उनकी पहचान चुरा लेते हैं। फेसबुक, मैसेंजर और हाइक जैसी तमाम सोशल साइटों से भी किसी को भी आसानी से नंबर मिल जाता है। पाकिस्तानी व्हाट्स एप पर ग्रुप बनाकर सोशल साइट पर मिले नंबरों को उससे जोड़ लेते हैं। इनमें से जो भी लड़का उनके काम का होता है, उसी का इस्तेमाल करने लगते हैं। कुछ लड़कियों का भी लड़कों को फंसाकर सूचनाएं संकलन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। लड़कियां प्यार भरी बातें करके शहर के बारे में पता करती हैं। उसके बाद एक-एक करके शहर की सभी चीजों के फोटो मंगाना शुरू कर देती हैं।
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-संदिग्ध नंबरों से किसी के भी नंबर पर कॉल आ सकती है। व्हाट्सएप पर भी कोई किसी को ग्रुप में जोड़ सकता है। फेसबुक का भी यही हाल है कि कोई भी किसी अंजान को दोस्त बना लेता है। ऐसा नहीं करना चाहिए। सोशल साइट्स पर दोस्ती करते वक्त सावधान रहना चाहिए। यह भी ध्यान रहे कि जिससे दोस्ती कर रहे हैं वह है कौन। व्हाट्सएप पर ग्रुप बनाकर बरेली के छात्रों को जोड़ने वाले का पता लगाया जा रहा है- विजय सिंह मीना, आईजी
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