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बहेड़ी में ऑनर किलिंग, बहन को पीटकर मार डाला

Fri, 29 Apr 2016 02:01 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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मृतका की मां
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अठारह साल की एक लड़की को घर के सामने रहने वाले दूसरी बिरादरी के लड़के से दोस्ती की सजा जान देकर चुकानी पड़ी। बुधवार की रात को बहन को उसके दोस्त के साथ देखकर दो सगे भाइयों पर खून सवार हो गया। उन्होंने दो तहेरे भाइयों को बुलाया और बहन व उसके दोस्त पर लाठी डंडों से हमला कर दिया। चीखें सुनकर उसके दोस्त के पिता बचाने पहुंचे तो उन को भी पीटा। मां किसी तरह खून से लथपथ बेटी को बचाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई। दो पुलिस वाले भी उनके साथ गए, लेकिन अस्पताल में उसे छोड़कर लौट आए। एक घंटे तक डॉक्टर ने जब उसका कोई इलाज नहीं किया तो लड़की की मां उसे ले आई और रेलवे पटरी के पास बैठ गई, जहां कुछ देर में उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने चारों भाइयों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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थाना बहेड़ी के इग्रा गांव के भूपराम का कई साल पहले देहांत हो चुका है। उनके  चार बेटे और तीन बेटियों में सबसे छोटी की अपने घर के सामने ही रहने वाले दूसरी बिरादरी के नन्हें के बेटे गोकिल से दोस्ती थी।लड़की के भाइयों ने एक बार गोकिल के परिवार वालों से उसके रिश्ते की बात चलाई, लेकिन गोकिल ने शादी करने से मना कर दिया। इससे खफा लड़की के भाइयों ने गोकिल से दूरी बनाने की हिदायत दी और उस पर नजर रखना शुरू कर दिया। बुधवार की रात गर्मी की वजह से लड़की आंगन में सो गई थी। रात करीब डेढ़ बजे उसके भाई रमेश ने गोकिल को बहन के साथ देख कर शोर मचाया। शोर-शराबा होने पर उसका दूसरा भाई भगवान दास पहुंच गया और बाद में तहेरे भाई रामौतार व रामसिंह को भी दोनों ने बुला लिया। उन्होंने गोकिल की लाठी डंडो व लोहे की रॉड से जमकर पिटाई लगाई। शोरगुल सुनकर गांव के लोग भी पहुंच गये। गोकिल का पिता नन्हें अपने पुत्र को बचाने के लिए दौड़े तो लड़की के भाइयों ने डंडो से उसकी भी पिटाई कर दी। दोनों पिता पुत्र को गांव के लोगों ने छुड़वा दिया। दोनों जान बचाकर बाइक से सीधे थाने चले गए और रमेश व उसके भाइयों के खिलाफ मारपीट करने की एनसीआर दर्ज करा दी। इसके बाद भाइयों ने घर को बंद कर लड़की की लाठी डंडो व लोहे की रॉड से पिटाई करनी शुरू कर दी। लड़की की चीख सुनकर पड़ोसियों ने पुलिस को फोन कर मामले की जानकारी दी। फरीदपुर चौकी से दो सिपाही पहुंच गए। मां लड़की को इलाज के लिए सीएचसी पहुंच गई।
सीएचसी पर रात इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉक्टर वीरेश कुमार तैनात थे। सिपाहियों ने उनसे मरीज को भर्ती कर इलाज करने को कहा तो उन्होंने थाने से चिट्ठी मजरूबी लाने को कहा। इसके बाद दोनों सिपाही वहां से चले गये। मृतका का मां शांति देवी का आरोप है कि करीब एक घंटे बाद डाक्टर ने उन्हें नहीं देखा तो ढाई बजे रात अस्पताल से वह बेटी को लेकर निकल गई। फिर कुछ ही कदम आगे केसर चीनी मिल रोड की रेलवे क्रसिंग के पास सड़क किनारे बिस्तर लगाकर बेटी को लिटा दिया। लड़की ने सड़क पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने मृतका के दो सगे भाई रमेश व भगवानदास व दो तहेरे भाई रामौतार व राम सिंह के खिलाफ ऑनर किलिंग का मामला दर्ज कर लिया है। एसपी देहात यमुना प्रसाद ने बताया कि लड़की के भाइयों ने ही हत्या की है। विवेचना की जा रही है। इसके अलावा और भी कई तथ्य सामने आ रहे हैं। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  
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इस हत्या में डॉक्टर और पुलिस भी दोषी है!
डॉक्टर ने रिफर किया न इलाज और लड़की मर गई
भाइयों के गुस्से का शिकार बनी कैकेई की मौत के लिए उसके भाई तो सीधे मुजरिम हैं है, इस मामले में डॉक्टर और पुलिस भी कम दोषी नहीं है। बहेड़ी सीएचसी में जो हुआ वह डॅक्टरी पेशे को ही शर्मसार करने वाला है। बुधवार रात अधमरी लड़की इलाज के लिए सीएचसी पहुंची तो पहले डॉक्टर ने पुलिस वालों ने लिखा पढ़ी कर थाने से कागज लाने को कहा और फिर मरणासन्न मरीज को अपने हाल में छोड़ कर चले गए। खास बात ये कि डॉक्टर ने घायल प्रेमी और उसके पिता को तो देखा लेकिन मरणासन्न लड़की को अपने हाल पर छोड़ दिया। लड़की की मां तो यहां तक कह रही है कि डॉक्टरों ने उसे भगा दिया। ये बात अस्पताल वाले मान रहे हैं कि करीब एक घंटे तक मरीज वहीं थी लेकिन भगाने की बात स्वीकार नहीं कर रहे हैं। 
लड़की की मां ने बताया कि वह बेटी के इलाज करने को रात ढाई बजे तक अस्पताल में खड़ी रही। बेटी दर्द से तड़प रही थी। वह बार बार डाक्टर से विनती कर रही थी, लेकिन न तो डाक्टर ने उनकी सुनी और न कंपाडर ने।  डाक्टर ने सिपाहियों से कहा था आप जाओ और वे चले गए। इसकी मां तो हैं मैं इलाज शुरू करता हूं। सिपाहियों के चले जाने के बाद डाक्टर ने ठीक ढाई बजे यह कह कर भगा दिया कि पुलिस को बुलाकर लाओ इसे बरेली भेजना होगा। इसके बाद उसकी बेटी का इलाज ही नहीं हो पाया। मजबूरन वह लड़की को अस्पताल से बाहर सड़क पर ले आयी। आगे नहीं ले जा सकी तो वहीं लिटा दिया जहां उसने तड़प तड़प कर उसके सामने दम तोड़ दिया। चौकी इंचार्ज सलाउद्दीन ने भी मृतका का पंचनामा भरते समय लड़की की मां की बात का ही समर्थन किया। उधर, डाक्टर वीरेश कुमार का कहना है कि डेढ़ बजे दो सिपाही एक महिला के साथ उसकी घायल बेटी को लेकर आए थे। इससे पहले उन्हें तीन लोगों का मेडिकल करना था। वह मेडिकल कर रहे थे। उन्होंने चिट्ठी मजरूबी लाने को कहा तो कुछ देर बाद दोनों सिपाही वहां से जा चुके थे। उन्होंने युवती की मां शान्ति देवी से कहा कि वो कुछ देर रुक जाए इलाज करते हैं लेकिन वह बेटी को लेकर गायब हो गईं।

सिपाही लड़की व उसकी मां को छोड़ कर चले गये थे। डाक्टर इलाज करने के लिए उनका इंतजार कर रहे थे। डॉक्टर मेडिकल करने में व्यस्त थे। इसी बीच मां-बेटी अस्पताल से गायब हो गईं। इसके बावजूद अपने स्तर जांच कराएंग कि  रात में क्या हुआ किसकी लापरवाही रही - डॉक्टर सुबोध शर्मा, जेडी हैल्थ

पुलिस ने उसे मरने के लिए छोड़ दिया
पुलिस ने अपनी ड्यूटी सही ढंग से निबाई होती तो भी एक घंटे तक बेइलाज लड़की को बचाया जा सकता था। पुलिस बकायदा गांव वालों की सूचना पर गांव में पहुंची थी। इससे पहले लड़की की पिटाई के गंभीर रूप से घायल उसकी प्रेमी और उसका पिता भी थाने गया था जिसकी एनसीआर भी दर्ज हुई। यानी पुलिस को अच्छी तरह से पता था कि यह बेहद गंभीर मामला है। इसके बावजूद इंस्पेक्टर तो क्या कोई दरोगा भी सुबह तक मौके पर नहीं गए। हत्या आरोपी रात से लेकर दोपहर तक पुलिस के सामने थे। वे पोस्टमार्टम हाउस भी आए थे लेकिन उन्हें नहीं पकड़ा गया क्योंकि लड़की की हत्या का तब तक मुकदमा ही नहीं लिखा गया था। बड़े अधिकारी भी इस बात पर तर्क करते रहे कि ये ऑनर किलिंग नहीं है। शाम तक जब बात बढ़ती दिखी तो सिपाही की ओर मुकदमा दर्ज कर किसी तरह पुलिस ने अपनी गलती पर परदा डालने की कोशिश की।    
रात को लड़के के पिता की  ओर से एनसीआर दर्ज करने के बाद दो सिपाहियों को मौके पर भेजा गया और वे भी अस्पताल में लड़की को गंभीर अवस्था में छोड़ कर चले आए। डॉक्टर कह रहे हैं कि उन्हें कागज लाने को कहा गया था जबकि सिपाहियों का कहना है कि डाक्टर ने कह दिया था कि वह इलाज कर लेगें इसलिए सिपाही जा सकते हैं।
मरणासन्न लड़की का इलाज शुरू हुए बगैर ही सिपाही चले गए और फिर लौट कर भी नहीं आए। उनकी  जिम्मेदारी बनती थी कि डॉक्टर से बात करके उस पर मुआयने से पहले इलाज के लिए दबाव बनाते। डॉक्टर उनकी बात नहीं मान रहे थे तो अपने अफसरों को बताना चाहिए था।  सिपाही रात को ही अफसरों के बात कर लेते तो लड़की का इलाज समय से हो सकता था।
रात को थाने में कितने दरोगा और सिपाही थे यह तो विभागीय पड़ताल में ही पता चलेगा लेकिन थाने में किसी भी सीनियर अधिकारी का न होना इस कहानी में तो साफ दिख रहा है। इतनी गंभीर घटना पर तो जिले के अफसरों तक सूचना पहुंच जानी चाहिए थी लेकितन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। 

सूचना मिलने पर दो सिपाही लड़की व उसकी मां को लेकर अस्पताल गये थे। डाक्टर के चले जाने को कहने के बाद वो वहां से लौट आए। डाक्टर ने लड़की का इलाज क्यों नहीं किया। जबकि पहले सीरियस मरीज को देखना चाहिए था- अजय कुमार श्रोतिया, प्रभारी निरीक्षक, बहेड़ी 
  
पोस्टमार्टम रिपोर्ट
लड़की की मौत सर में गहरी चोट लगने और पसलियां टूटने से हुई है, जिसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई। लड़की के सर के पीछे चोट है, शरीर पर नील के निशान हैं, कंधे पर नोकदार हथियार से मारी गई चोट के निशान, बाएं हाथ की कलाई पर चोट, बाएं पैर के टखना सूजा हुआ, दूसरे पैर पर नील के निशान हैं।  उसका चेहरा नीला पड़ा हुआ था। उसकी पीट, दोनों पैर हाथों में नीले निशान साफ दिखाई दे रहे थे।  सिर पर एक जगह से हल्का खून निकल रहा था। 

ऑनर किलिंग की घटनाएं
 1- टांडाछंगा गांव के पास के गांव दरऊ में 2010 में पिता ने पुत्री की पहले गला दबाकर हत्या की थी उसके बाद उसके शव को बोरे में बंद कर तालाब में छिपा दिया था।
2- 26 जनवरी 2014 में राठ गांव में पिता व चाचा ने प्रेम प्रसंग के चलते बेटी की हत्या कर दी थी। 
3- नवंबर 2015 में शेरगढ के गांव कबरा किशनपुर में पिता व भाइयों ने लड़की की हत्या कर लाश को जंगल में छिपा दी थी।


भीड़ मत लगाओ मेरी बिटिया सो रही है
बेटी की मौत से मां सुधबुध खो बैठी है। बृहस्पतिवार की सुबह छह बजे टहलने निकले लोगों ने सीएचसी से कुछ दूरी पर रेलवे क्रासिंग के पास एक बिस्तर पर एक लड़की को लेटे देखा और पास में ही मां बिलख रही थी। धीरे धीरे भीड़ जुट गई। बुजुर्ग महिला साड़ी के एक तरफ के आंचल को फाड़ कर लड़की से ऊपर से मच्छरों को भगा रही थी। भीड़ से कह रही थी जाओ यहां मत रुको मेरी बेटी सो रही है। बेटी के सिर को महिला कभी अपनी गोद में रख लेती थी।  कभी लोरी गाने लगती थी। बेटी की मौत के सदमे से वह सुधबुध खो बैठी थी। 

गोकिल की जान को भी खतरा
 लड़की की हत्या होने के बाद उसके प्रेमी गोकिल की जान को भी खतरा बढ़ गया है। ग्रामीण बताते हैं कि  बृहस्पतिवार की सुबह भाइयों को बहनोई से खबर मिली कि उनकी बहन की मौत हो गई है तो गोकिल के घर जा धमके। कहने लगे तेरे चक्कर में हमारी बहन की मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने पोस्टमार्टम हाउस पर भी गोकिल पर ही अपनी बहन को मार डालने का इल्जाम लगाया। इधर लड़की मौत की खबर मिलते ही गोकिल और उसका पिता गांव से कहीं चले गए हैं। 

 शादी से इनकार पर गुस्से में थे भाई
पड़ोसी से दूर रहने के लिए लड़की को तीन बार उसके भाई ही नसीहत दे चुके थे, लेकिन उसके सिर पर प्यार का भूत सवार था। भाइयों को सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात का था कि प्रेमी ने शादी करने से इनकार कर दिया था। जबकि लड़की ने उसके मिलना इसके बाद भी नहीं छोड़ा था।
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