शिकारियों ने वन्यजीव हिरन की गोली मारकर जान ले ली। गोली लगने से वह रातभर सड़क पर तड़फता रहा। आवारा कुत्तों ने भी नोच दिया। एसडीएम के आदेश के बाद भी वन विभाग ने उसकी सुध नहीं ली। अब वन दरोगा के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है।
नदेली रोड पर बहांपुर गांव से पुनई के बीच बृहस्पतिवार रात नौ बजे ग्रामीणों ने गोली चलने की आवाज सुनी। वहां पहुंचने पर सड़क किनारे खाई में एक हिरन घायल अवस्था में पड़ा था। उसे कुत्ते नोच रहे थे।। ग्रामीणों ने कुत्तों को भगाया तो देखा कि हिरन के पैर में गोली लगी है। वकील सुशील बाबू सक्सेना ने फोन कर रेंजर और एसडीएम को इसकी सूचना दी। रात 12 बजे तक कोई नहीं पहुंचा। वन दरोगा ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बाबू बख्श को भेजा तो वह कुछ देर रुककर अपने घर सिमरा चले गए। ग्रामीणों ने रात भर हिरन की देखरेख की पर इलाज के अभाव में सुबह चार बजे हिरन ने दम तोड़ दिया। सुबह वन दरोगा लईक खां गांव पहुंचे तो ग्रामीण उनसे उलझ गए। वह हिरन को जीप में डालकर बहेड़ी वन रेंज दफ्तर ले आए। अफसरों के नाराज होने पर शव को पोस्टमार्टम के लिए आईवीआरआई भेजा गया।
एसडीएम ने भेजी रिपोर्ट
वन दरोगा की लापरवाही की शिकायत ग्रामीणों ने एसडीएम से की तो उन्हें गुस्सा आ गया। फोन पर रेंजर पर बरस पडे़। उन्होंने कहा कि वन दरोगा के खिलाफ वह डीएम को रिपोर्ट भेज रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डीएफओ को भी बताएंगे।
बैरियर ड्यूटी का मोह नहीं छोड़ा
रात में जब रेंजर और एसडीएम ने वन दरोगा को फोन पर गांव जाकर घायल हिरन का इलाज करने के आदेश दिये तो उन्होंने अफसरों को गुमराह करते हुए कह दिया कि अभी जा रहा हूं। बाबू बख्श को पहले भेज रहा हूं। जबकि दरोगा की ड्यूटी रात में बैरियर पर लगी थी। बता दें कि रात में खनन वाले ट्रकों से होने वाली अवैध कमाई की वजह से वन स्टाफ रात की बैरियर ड्यूटी में खास दिलचस्पी लेता है, शायद इसी वजह से वन दरोगा वहां से नहीं हिले।
कोट
मैं विभागीय काम से इलाहाबाद गया था। रात में ही वन दरोगा लईक खां को फोन पर गांव जाने के आदेश दिए गए थे। अगर लापरवाही बरती गई है तो उन पर कार्रवाई होगी।
गिरीश जोशी, रेंजर बहेड़ी