एक साल पहले गंगाचरण नर्सिंग कॉलेज के छात्र अनुराग पाल के अपहरणकांड का शाहजहांपुर पुलिस ने खुलासा कर दिया। अनुराग के तहेरे भाई विष्णुपाल ने ही अपने दो साथियों के साथ अनुराग का अपहरण किया और 13 दिन बाद ही उसकी हत्या कर दी थी। शव को सूटकेस में डालकर जम्मूतवी एक्सप्रेस की सीट के नीचे छोड़ दिया था। शाहजहांपुर पुलिस ने एक अन्य मामले राजबाबू के अपहरण और हत्याकांड की तफ्तीश के दौरान विष्णुपाल सहित दो अन्य बदमाश को पकड़ा। पूछताछ में अनुराग के अपहरण के बाद उसकी हत्या की बात कबूल की। कोतवाल केके वर्मा ने शुक्रवार को आरोपियों से पूछताछ की। पुलिस अनुराग का शव बरामद नहीं कर सकी है।
कोतवाल कमल कांत वर्मा ने बताया कि आरोपी विष्णु दयाल पाल उर्फ लंगड़ा निवासी गांव रसूलपुर चठिया सिंधौली ने बताया कि 2006 में मुरादाबाद में पढ़ने गया था। पढ़ाई के दौरान संपर्क में आये नरेश ने रेलवे की नौकरी का झांसा दिया था। विष्णु ने झांसे में आकर पिता की 16 बीघा जमीन को गिरवी रखकर 14 लाख का कर्ज लिया था। उसने 10 लाख नरेश के खाते में जमा करवाये, जबकि 4 लाख नगद दिया था। नरेश ने रुपया लेने के बाद नौकरी नहीं लगवाई। धीरे-धीरे कर्ज का ब्याज बढ़कर 32 लाख तक पहुंच गया।
बड़ी फिरौती के लिये अनुराग को उठाया
विष्णुपाल ने अपने तहेरे भाई अनुराग पाल पुत्र डॉ. हाकिम को अपहरण करने की योजना बनाई। पहले शाहजहांपुर के तारीनटीकली थाना सदर बाजार में एक कमरा किराये पर लिया गया। विष्णु ने एक मोबाइल और सिम कार्ड खरीदा। जिससे मनवीर ने अनुराग से गंगाचरण नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन लेने के बहाने बात की थी। आरोपियों ने हर बार नई जगह अनुराग को फोन किया। 2 मई 2016 को दोबारा अनुराग अकेला शाहजहांपुर पहुंचा। मनवीर बहाने से उसको लेकर तारीनटीकली में किराये के कमरे पर लेकर पहुंचा। यहां पहुंचने पर अनुराग को पता चला कि उसका अपहरण हो चुका था। अनुराग को बंधक बनाने के बाद उसके पिता डॉ. हाकिम से एक करोड़ की फिरौती मांगी गई थी। फिरौती की जगह शाहबाद जनपद हरदोई तय की थी। डॉ. हाकिम ने फिरौती का रुपया देने के लिये शाहबाद पहुंचे। बदमाश भी पहुंचे, लेकिन पुलिस की मौजूदगी के बाद अपहरणकर्ता वापस आ गये। विष्णु ने बताया कि मामला पुलिस में जाने के बाद अनुराग को छोड़ा नहीं जा सकता था, इसलिए 13 दिन तक बंधक बनाने के बाद उसकी गला दबाकर हत्या की गई थी।
इस तरह पकड़ा गया विष्णु
अपहृत राजबाबू के दादा नरेशपाल उर्फ फौजी फिरौती की रकम दिलवाए में मध्यस्तता करने लगा था। एक बार उसके मोबाइल पर राजबाबू का फोन आया। बस यहीं से फौजी को शक के दायरे में आ गया और इसी दिन 27 मार्च को राजबाबू की हत्या कर दी गई। पुलिस टीम ने उससे कड़ाई से पूछताछ की तो उसने अपहरण की घटना से लेकर हत्या तक का राज कबूल दिया। इसके बाद पुलिस ने फौजी के दोनों साले विष्णु उर्फ लंगड़ा व विजय कुमार पाल को भी गिरफ्तार कर लिया। विजय की निशानदेही पर राजबाबू की लाश शारदा नहर उमरिया पुल के पास सूटकेस में बरामद कर ली।
क्राइम पेट्रोल देखकर बना अपहरणकर्ता
विष्णु कंप्यूटर में डिप्लोमा किया है। क्राइम पेट्रोल देखकर उसने अपहरण की योजना बनाई थी। इसलिए वह मोबाइल का बहुत ही सावधानी से इस्तेमाल करता हुआ पुलिस को चकमा दे रहा था। यह लोग ट्रेनों में सफर करने के दौरान फिरौती के लिए फोन करते थे, ताकि पुलिस को सही लोकेशन का पता न चल पाए। राजबाबू की फिरौती की रकम के लिए भी घर वालों को हरदोई, संडीला व जिले में निगोही रोड पर सतवां गांव के पास बुलाया। परिवार वाले रकम लेकर गए भी लेकिन पकड़े जाने के डर से सामने नहीं आए। उन्हें शक था कि पहचान होने पर पकड़े जाएंगे।
जीआरपी की मदद से खोजा जा रहा अनुराग का शव
पुलिस विष्णु के बयानों के आधार पर जीआरपी की मदद से पता करने में जुटी है कि क्या जम्मूतवी एक्सप्रेस के रूट में कही शव बरामद हुआ था। पुलिस अब अनुराग का शव बरामद करने में लगी है।
राजबाबू के अपहरण के बाद पकड़े गये बदमाशों ने अनुराग के अपहरण की बात भी कबूल की है। कोतवाली कमलकांत ने शाहजहांपुर जाकर आरोपियों से पूछताछ की है।
-समीर सौरभ, एसपी सिटी