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...और सियासी तीर्थ बन गया धनेली गांव

Thu, 04 Aug 2016 01:31 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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धनेली गांव में फिल्म पीपली लाइव जैसे दुबारा शूट हो रही हो। डायरी कलम और माइक आईडी लिए पत्रकार कभी इस तो कभी उससे सवाल कर रहे हैं।  दूसरे दिन भी गांव में  नेताओं, अफसरों का जमावड़ा देख इलैक्ट्रानिक-प्रिंट मीडिया वाले भी जुट गए। मीडियाकर्मियों के कई तीखे, चुभते सवालों से अभिभावकों और सीधी-सरल लड़कियों को दिन भर परेशान होते रहे। गनीमत ये रही है यहां किसी भी नेता ने भड़काऊ बयान नहीं दिया और माहौल सामान्य होता चला गया। 
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एसडीएम आरएन पांडेय, सीओ गिरीशपाल सिंह और एसओ शाही हरचरन सिंह यादव, दुनका चौकी इंचार्ज वेदपाल सिंह बुधवार सुबह से ही धनेली उर्फ धल्लिया गांव में डेरा डाले रहे। नेताओं की बढ़ती आवाजाही देखते हुए अतिरिक्त फोर्स भी लगा ली गई थी।
पूर्व कांग्रेस सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने गांव पहुंचकर जिलास्तरीय अधिकारियों से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि मामला गंभीर है। प्रशासन को लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम फौरन उठाना चाहिए। एरन बोले सपा सरकार में अपराधों की बाढ़ आ गई है और गुंडातत्व हावी हो रहे हैं। अभिभावकों से लड़कियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें कालेज भेजने की अपील भी की। 
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भाजपा जिलाध्यक्ष रवींद्र सिंह राठौर, डा. डीसी वर्मा, कुंवर महीपाल सिंह, तेजेश्वरी सिंह, वीरेंद्र गंगवार वीरू, राजकुमार शर्मा आदि भी गांव पहुंचे। उन्होंने भी अभिभावकों, लड़कियों से बात कर कालेज न छुड़वाने की अपील की। बेटियों के सम्मान में, भाजपा मैदान में-नारे की याद दिलाते हुए पुलिस-प्रशासन से सभी शोहदों को जेल भेजकर लड़कियों से छेड़छाड़ की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग भी की है। नेताओं की मान-मनौव्वल के बावजूद गांव वालों के तेवर काफी तीखे दिखे। कइयों ने तो मुंह पर ही कह भी दिया कि वोट लेने के वक्त तो नेताओं की झड़ी लग जाती है लेकिन गांव वालों को नाजुक मौकों पर जब भी जरूरत पड़ती है, बड़े नेताओं के फोन ही स्विच आफ हो जाते हैं। नेताओं ने अपने-अपने ढंग से गांववालों की मानमनौव्वल करते हुए सफाई देने की भी कोशिश की।
कुछ जाहिल मनचलों की वजह से दूरियां बन गई
चंद शोहदों की वजह से धनेली  और आसपास के लोगों के बीच अचानक मजहब की दीवार खड़ी हो गई थी। शोहदे एक समुदाय के थे और पीड़ित लड़कियां दूसरे समुदाय की इसलिए कुछ लोगों ने इसे इतना तूल दिया कि पीड़ित लड़कियों समेत करीब 50 लड़कियों ने कालेज जाना छोड़ दिया। ये बात भी दीगर है कि अगर ऐसा न होता तो इतनी जल्दी कार्रवाई शायद न होती। बहरहाल गांव में अब अमन है और यहां शेरगढ़ जैसा सीन नहीं बन पाया। 
एसडीएम, सीओ के पक्का भरोसा दिलाने पर गांव के सभी अभिभावक गुरुवार से अपनी सभी बेटियों को कालेज भेजने पर राजी हो गए हैं। मीडिया वाले सवाल कर रहे थे - क्या यहां एक वर्ग के लोगों का आतंक है तो गांव वाले कह रहे थे ऐसा कुछ नहीं यहां ऐसी बात होगी तो गांव वाले गलत लोगों को सबक सिखाने में सक्षम हैं।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि जो लड़के पकड़े गए हैं वे कम पढ़े लिखे और नासमझ हैं। बाकी जिनके नाम सामने आ रहे हैं वे भी अनपढ़ या कम पढ़े लिखे हैं और उनके पास कोई काम नहीं है। लोगों को समझाया जा रहा है कि वे उन्हें संस्कारित करें। पकड़े गए लड़कों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने लड़कियों को फूल देने की कोशिश की थी और वे छेड़छा़ड़ करते थे।  
अभिभावक लड़कियों को कालेज भेजने को राजी
दुनका। धनेली प्रकरण में एक तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेकर यहां माहौल बिड़ने से बचा लिया। इस बार राजनीतिक दलों ने भी एहतियात बरता और गांव वालों का गुस्सा दो दिन में ही शांत हो गया। 
एसडीएम ने बताया कि शिकायत मिलते ही पुलिस-प्रशासन सख्ती बरतते हुए दो शोहदों को पकड़कर जेल भेज चुका है।  बाकी सभी शोहदों को भी जल्द चिह्नित कर जेल भेजा जाएगा। राजनैतिक दबाव में किसी को भी बख्शने का सवाल ही नहीं है।  दुनका-धनेली-दुनकी रोड पर पुलिस बुधवार को दूसरे दिन भी तैनात रही। एसडीएम के आग्रह पर ग्राम प्रधान नवनेश कुमारी, उनके पति दिशपाल सिंह समेत सभी अभिभावक बहन-बेटियों को गुरुवार से कालेज भेजने पर राजी हो गए हैं। बुधवार को दुनका इंटर कालेज में पंजीकृत धनेली उर्फ धल्लिया की कुल 47 में से सिर्फ दो लड़कियों ने ही हाजिरी दी। बाकी लड़कियों के गुरुवार से रोजाना कालेज आने की हामी भरने पर पुलिस-प्रशासन के साथ कालेज प्रबंधन ने भी राहत की सांस ली है। ऐहतियातन शाही थाने और दुनका चौकी के अलावा फतेहगंज पश्चिमी थाने का भी पुलिस फोर्स गांव में तैनात रहा। उधर, दुनका इंटर कालेज के उप प्रबंधक बेचे सिंह, प्रिंसिपल विनोद कुमार, सहायक अध्यापक सत्यप्रकाश, रामवीर शर्मा समेत 10-12 टीचर धनेली उर्फ धल्लिया पहुंचे और अभिभावकों, लड़कियों को पूरी सुरक्षा का भरोसा दिलाया।
नेता बोले
लड़कियों के सम्मान की हर हाल में रक्षा होनी चाहिए। ढिलाई की वजह से बदमिजाजी कर रहे लोगों को इस तरह दंडित किया जाना चाहिए कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पटरी पर आ सके। इसके साथ ही उन लोगों पर भी नजर रखनी चाहिए जो वेवजह सामाजिक सद्भाव खत्म कर साम्प्रदायिक माहौल बनाना चाहते हैं।
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प्रवीण सिंह ऐरन 
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