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मुस्लिमों ने पसंद की साइकिल की सवारी, फूल को न पड़ जाए भारी

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लखीमपुर खीरी। खीरी लोकसभा चुनाव में सभी की नजर मुस्लिम वोटरों पर थीं, लेकिन पूरे चुनाव में वे खामोश रहे। फिर मतदान के दिन उत्साह के साथ घरों से मतदान केंद्र पहुंचे तो भाजपाई भी सकते में आ गए। मुकाबला भाजपा और गठबंधन के बीच होता नजर आया। कांग्रेस प्रत्याशी के साथ अन्य बिरादरी के वोट ज्यादा न होने के कारण मतदाताओं ने उन्हें कमजोर मान लिया था।
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हालांकि सोमवार को भी मुस्लिम मतदाताओं ने वोट डालने के बाद भी खुलासा नहीं किया कि वे किस तरफ रहे। कुछ मतदाताओं को जब कुरेदा तो संकेत जरूर मिल गए। शहर के इस्लामिया इंटर कॉलेज के बाहर खड़े मतदाताओं ने दो टूक कहा कि अखिलेश यादव से ही उन्हें उम्मीद है। कांग्रेस के बाबत पूछने पर बोले, पंजे में भाजपा को हराने की दम नहीं था। खीरी टाउन स्थित प्राथमिक विद्यालय में मतदान करने आई शाबिया और टेलरिंग की दुकान करने वाले महबूब कहते हैं कि गठबंधन सबसे अच्छा है। हमें तो साइकिल ही बेहतर लगी। वहीं शहर के नौरंगाबाद स्थित बूथ पर युवा शकील, रफीक और कपड़े की दुकान करने वाले अरशद कहते हैं कि पंजा इस बार बिल्कुल चुनाव नहीं लड़ सका।
मुस्लिम बहुल शहर खीरी टाउन, मैलानी, पलिया, सिंगाही, तिकुनियां, बिलरायां में बड़ी संख्या में मतदाता घरों से बाहर निकले। खीरी लोकसभा सीट का चाहें लखीमपुर विधानसभा क्षेत्र हो या फिर गोला, पलिया, श्रीनगर या निघासन। करीब तीन लाख मुस्लिम मतदाताओं वाली इस लोकसभा सीट में ये मतदाता अहम थे। फिर जब वे बड़ी संख्या में वोट डालने निकले तो हर बूथ पर मुकाबला काफी रोचक हो गया। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों में जैसा उत्साह दिखा, वह भाजपा एवं गठबंधन को कड़े मुकाबले की ओर ले गया। कांग्रेस कहीं-कहीं ही नजर आई। यह मतदाताओं की बताई बात थी, मगर किसको कितने वोट मिले, यह तो मतगणना के बाद ही साफ होगा।
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