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दूसरे प्रदेशों से आती थीं लड़कियां, शहर के रईसजादे थे कस्टमर

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बरेली। सेक्स रैकेट संचालक विजय यादव के तार दूसरे प्रदेशों से जुड़े हैं। कई प्रांतों की लड़कियां उसके पास आती थीं। ग्राहकों में अधिकांश बरेली के युवा व्यवसायी और रईसजादे थे। पकड़ी गई परवीन को वह अपनी पत्नी बताता था और उससे धंधा भी कराता था। दिखावे को वह कुत्तों की खरीद फरोख्त का धंधा करता था।
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पुलिस के मुताबिक किला क्षेत्र के कटघर में पिछले महीने सेक्स रैकेट चलाती पकड़ी गई शशि भी विजय की पूर्व पत्नी रह चुकी है। उससे अलग होने के बाद विजय ने अलग से नए सिरे से धंधे शुरू कर दिया। परवीन भी इसी धंधे में थी। विजय उसे पत्नी बताकर साथ रखता था और लड़कियों के न होने पर ग्राहकों को सौंप देता। बांग्लादेशी किशोरी को सेक्स रैकेट से मुक्त कराने में मुंबई पुलिस के साथ सुभाषनगर पुलिस ने भी कार्रवाई की थी। उस वक्त सीबीगंज की सुनीता भी पकड़ी गई थी। सुनीता ने ही पुलिस को बड़े रैकेट संचालक के रूप में विजय का नाम और साक्ष्य दिए। लकिन विजय अंडरग्राउंड हो गया। एक सिलीगुड़ी की महिला भी इनके रैकेट में है तो अब्दुल्ला नाम का व्यक्ति कानपुर व मेरठ आदि शहरों से लड़कियां लाने का काम करता है। पकड़े गए लोग मुंह छुपाने के साथ ही नाम-पता गलत बता रहे थे।

व्हाट्सएप से कराते थे डीलिंग
एसपी सिटी ने बताया कि विजय व उसके साथी ग्राहकों की डिमांड पर व्हाट्सएप पर लड़कियों के फोटो सेंड करते थे। पसंद आने पर लड़की की कीमत बताई जाती थी और तिथि व जगह तय करके लड़की को बुला लिया जाता था। रकम का एक हिस्सा विजय खुद रखता था और बाकी लड़कियों को देता था।
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रिटायर्ड पुलिसकर्मी का बेटा है आरोपी
पकड़े गए ग्राहकों में बबलू खुद को विजय का कर्मचारी बता रहा था। उसके पिता पुलिस विभाग में अकाउंटेंट थे और दो साल पहले ही बदायूं से रिटायर हुए हैं। वहीं देवेंद्र बदायूं रोड पर फुटवियर शॉप चलाता है। उसका कहना है कि वह पहली बार आया था और फंस गया।
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