रईसों के बेटों को परिवार वालों की हत्या की धमकी देकर ब्लैकमेल करने वाले गिरोह के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इस गिरोह ने फर्नीचर कारोबारी के 12वीं में पढ़ने वाले बेटे को उसके भाई के अपहरण की धमकी देकर अपने चंगुल में फंसा लिया और आठ महीने में 28 लाख रुपये ठग लिए। गिरोह का प्रमुख नाम बरेली कॉलेज का पूर्व छात्र नेता रवि गोला है, जिस पर गैंगस्टर एक्ट भी लगा हुआ है। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। वह सीबीसीआईडी में तैनात महिला सिपाही का बेटा है।
सिविल लाइंस में आवास विकास निवासी फर्नीचर कारोबारी गौरव गर्ग के घर से दिसंबर 2017 से जून 2018 तक 28 लाख रुपये गायब हो गए। इसे लेकर वह काफी दिन परेशान रहे। बाद में उन्होंने जीआरएम में कक्षा 12 में पढ़ने वाले बेटे हर्षित को विश्वास में लेकर बात की तो सारा मामला खुल गया। हर्षित ने बताया कि चौकी चौराहा पर कोचिंग के दौरान सुभाषनगर के यश सक्सेना और मनीष जायसवाल ने उससे दोस्ती गांठ ली। इसके बाद दोनों ने उसे तिलक कॉलोनी के सनी गोस्वामी, बीडीए कॉलोनी करगैना के अभिषेक सोलंकी, नेकपुर के शिवम, मढ़ीनाथ के पारितोष सक्सेना, मढ़ीनाथ के शुभम उपाध्याय, पूर्व छात्र नेता चौपुला के रवि गोला, पुराना शहर के दानियल खान और रेलवे स्टेशन के नौशाद से मिलवाया। पहले तो इन सभी ने मेलजोल बढ़ाया और फिर हर्षित के मन में छोटे भाई के अपहरण और पिता की हत्या का खौफ बैठाकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। इनके डर से हर्षित ने घर से धीरे-धीरे 28 लाख रुपये ले जाकर उन्हें दे दिए।
विरोध करने पर डराने के लिए फायर भी किया
एक बार हर्षित ने हिम्मत करके विरोध करने की कोशिश भी की तो उसे मिशन अस्पताल के ग्राउंड पर बुलाया गया। वहां उसे धमकाया गया और बंधक बना लिया गया। जब हर्षित किसी तरह छूटकर भागा तो उसके ऊपर फायर कर दिया।
गैंग का सदस्य सीबीसीआईडी सिपाही का बेटा गिरफ्तार
गौरव गर्ग की शिकायत पर पुलिस ने शिवम पटेल को गिरफ्तार किया है। उसके पिता रामसेवक पीडब्ल्यूडी में ठेकेदार हैं और मां सीबीसीआईडी में सिपाही हैं। बताया जाता है कि हर्षित घर से जो रुपये लाता था, वे शिवम के जरिये ही दूसरे आरोपियों तक पहुंचते थे। बाकी सभी आरोपी फरार हैं। इनमें से एक बरेली कॉलेज का पूर्व छात्रनेता रवि गोला भी है, उस पर जानलेवा हमला समेत कई मुकदमे दर्ज हैं।
ऐसे बनाते थे बच्चों को ठगी का शिकार
यह गिरोह बड़े-बड़े घरों के बच्चों को निशाना बनाता था। अब तक सामने आया है कि कोचिंग या कॉलेज में गिरोह से जुड़े लड़के बच्चों में दिखावटी लड़ाई कराते थे फिर मदद के नाम पर अपने कुछ साथी उनके साथ लगा देते थे। इसके बाद पुलिस में शिकायत होने और मामले को निपटाने के नाम पर ब्लैकमेल करते थे। एक बार रुपये हाथ आने के बाद उसकी शिकायत घरवालों को बताने के नाम पर ब्लैकमेल करने लगते थे। कई बार बच्चों के परिवार वालों को मारने की धमकी देकर भी वसूली की जाती थी।