7 hours procreative said then take the fear of death shown
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
जिला महिला अस्पताल नकारात्मक छवि ऐसे ही नहीं बन रही है, वहां हाल ही ऐसा है। उमरसिया के मिर्जापुर गांव से आई 35 वर्षीय उर्मिला सोमवार आधी रात एक बजे से लेकर मंगलवार सुबह आठ बजे तक जिला महिला अस्पताल के स्ट्रेचर पर प्रसव का इंतजार करती रही। पति से स्टॉफ ने खून मंगाया तो वह ब्लड बैंक से अस्पताल तक चक्कर लगाता रहा। खून का इंतजाम करने में दिक्कत आ रही थी। 7 घंटे तक कोई फैसला नहीं ले सका कि गर्भवती महिला का करना क्या है। डॉक्टर ने महिला की बिगड़ती हालत देखकर उसे दूसरे अस्पताल ले जाने को कह दिया। मजदूर पति मजबूरन रु हेलखंड मेडिकल कॉलेज में आया और वहां आकर अपने रिश्तेदार से कर्ज लेकर अपनी पत्नी का प्रसव कराया।
मुफ्त जांच से लेकर प्रसव की बात पर भले ही सरकार अपने गाल बजा रही हो, लेकिन अस्पतालों में तैनात स्टॉफ की वजह से इस पर पलीता लग रहा है। दिहाड़ी मजदूरी करने वाला रामकृष्ण की पत्नी उर्मिला तीसरी बार गर्भवती हुई है। एक बेटी चार साल की है जबकि दूसरा बच्चा अब नहीं है। आशा के सहयोग से उसने नौ महीने तक अपना इलाज करवाया, जब डिलीवरी की बारी आई तो 102 से रात 12 बजे महिला अस्पताल पहुंचे। पति रामकृष्ण और परिवार का कहना है कि खून का इंतजाम करने को कहा तो ब्लड बैंक गया। खून के लिए अपने रिश्तेदारों को बुला रहा था। इस बीच ब्लड बैंक और लेबर रूम के कई चक्कर लगाए। लेबर रूम में स्टाफ उनको बुरा भला कहता रहा, स्ट्रेचर खींचकर बाहर कर दिया। बीवी तड़पती रही। कहा कि खून लाओ नहीं तो बीवी नहीं बचेगी। ब्लड बैंक में खून बिना डोनर के देने को राजी थे लेकिन वे अस्पताल से एक फोन डॉक्टर से करवाने की बात कह रहे थे लेकिन किसी ने भी ब्लड बैंक फोन नहीं किया। स्टॉफ बस यही कहता रहा, इसे यहां से हटाओ नहीं तो यह मर जाएगी, कहीं और ले जाओ। महिला का हीमोग्लोबिन भी कुछ खास कम नहीं था यह करीब 8 ग्राम था। इस पर डिलीवरी के लिए संकट नहीं होता है। अपनी पत्नी को रामकृष्ण सुबह साढ़े 8 बजे टेेंपो से रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज ले आया, जहां 10 बजकर 54 मिनट पर आपरेशन से उसकी बेटी हुई। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से लाया खून भी इसे शाम 5 बजे तक नहीं चढ़ाया गया था, क्याेंकि डॉक्टरों ने जरूरत महसूस नहीं की। जच्चा- बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। गर्भवती की आशा ने बताया कि उर्मिला बिल्कुल ठीक थी, ज्यादा गंभीर नहीं थी लेकिन पता नहीं क्याें इलाज नहीं किया। जबकि रु हेलखंड में खून भी नहीं लिया और आपरेशन से प्रसव हुआ। दोनों स्वस्थ हैं। रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से संपर्क नहीं हो सका, हालांकि उन्होंने मरीज को आईसीयू में भर्ती नहीं किया है।
मैंने मरीज को सुबह 4 बजे देखा था, उर्मिला के पति को खून लाने के लिए कहा गया। वह डिसीजन नहीं ले पा रहा था कि क्या करना है। पल्स और बीपी भी नाजुक था। अचानक आईवी भी निकल गई तो दोबारा लग नहीं सकी। इसके चलते हम सब घबरा गए। बताया गया कि आईसीयू की भी जरूरत पड़ सकती है, बाद में वह राजी हो गया और मरीज को ले गया।
डॉ. सीमा शर्मा, मौके पर मौजूद प्रसूति विशेषज्ञ