लखीमपुर खीरी। पांच साल की उम्र से भगवान श्रीकृष्ण (ठाकुर जी) की भक्ति में लीन मोहल्ला बहादुरनगर निवासी 26 वर्षीय रोहित ने अक्षय तृतीया पर मंगलवार को उनकी मूर्ति से मोहल्ले के ही मंदिर में शादी रचा ली। इस बात की खबर तब फैली जब आशीर्वाद समारोह के लिए गुरुवार को आमंत्रित किया जाने लगा। गुरुवार की शाम मेड़ईलाल मंदिर के नाम से विख्यात मनकामेश्वर मंदिर में आशीर्वाद समारोह के लिए लोग उमड़ने लगे। ढोलक की थाप पर महिलाओं ने गीत गाकर रस्में निभाईं।
बिजली विभाग के कर्मचारी रामपाल कश्यप के दो बेटे हैं, जिसमें रोहित सबसे बड़ा है। रोहित की मां अनीता का कहना है कि बचपन से ही रोहित धर्म की ओर प्रेरित रहता था। स्कूल जाने के बजाय मंदिर जाकर धार्मिक कार्यों में सहयोग करना उसकी आदत बन गई। उन्होंने बताया कि उम्र बढ़ने पर रोहित श्रीकृष्ण भगवान की भक्ति में लीन रहने लगा। घर परिवार, रिश्तेदारों से दूर रहकर हर समय ठाकुर जी का ही ध्यान करना उसकी दिनचर्या बन गया। इसी के तहत रोहित ने घर के कमरे को ही भगवा श्रीकृष्ण का मंदिर बना लिया। मां अनीता का कहना है कि छह साल पहले रोहित वृदांवन गया था, जहां से आने के बाद उसने ठाकुर जी से विवाह करने की धुन लगा दी और बुधवार को मेड़ईलाल मंदिर में जाकर श्रीकृष्ण भगवान की मूर्ति से विवाह कर लिया। मंदिर में आयोजित इस अनोखी शादी देखने के लिए सभी सगे संबंधी और मोहल्ले के लोग मौजूद रहे।
सात फेरे लेकर भरी मांग
मेड़ई लाल मंदिर के पुजारी रविशंकर मिश्रा का कहना है कि पहले तो रोहित को समझाया, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम में वशीभूत उसने एक न सुनी। इसलिए विधिवत सात फेरे कराकर विवाह संपन्न कराया। उन्होंने बताया कि मंदिर में ही गुरूवार को आशीर्वाद समारोह कार्यक्रम हुआ।
खिलौनों के बजाय लेता था श्रीकृष्ण की फोटो
रामपाल कश्यप का कहना है कि छोटी उम्र से ही इसके हाव भाव अन्य बच्चों से अलग थे। मेला जाने पर रोहित खिलौना न खरीदकर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति और बांसुरी आदि खरीदने की जिद करता था। वहीं घर से स्कूल न जाकर मंदिर जाकर वहां पूजा पाठ करता था। इसलिए कक्षा छह के बाद वह पढ़ ही नहीं सका।
मंदिर परिसर में धूमधाम से हुआ आशीर्वाद समारोह
लखीमपुर खीरी। ठाकुर जी से ब्याह रचाने के बाद रोहिणी उर्फ रोहित ने आशीर्वाद समारोह भी गुरुवार को मोहल्ले के उसी मंदिर में किया जहां उसने ब्याह रचाया था। समारोह में घर और मोहल्ले की महिलाएं भी शामिल हुई। सभी ने विधि विधान से ढ़ोल बजाकर सभी रस्में निभाई। अनोखी शादी के बाद हुए आयोजित आशीर्वाद समारोह को देखने के लिए लोगों की भीड़ इकठ्ठा हो गई।
वर वरिये भगवान को, जासे चूड़ा अमर हो जाए
भगवान श्रीकृष्ण से ब्याह रचाने वाली रोहिणी (पहले रोहित ) से जब ठाकुर जी से शादी रचाने के बारे में बात की गई तो उसने कहा कि वर वरिये भगवान को, जासे चूड़ा (सुहाग) अमर हो जाए। रोहिणी बने रोहित का बड़े गर्व से कहना है कि इस संसार में कोई महिला अपने पति के अमर होने का दावा नहीं कर सकती है, लेकिन हमारा सुहाग सदैव अमर है और रहेगा।
चार साल से रखा था करवाचौथ का व्रत
घर के लोगों का कहना है कि ठाकुर जी के प्रेम में रोहित इतना लीन हो गया कि हर माह वृंदावन जाने लगा। इसी बीच उन्हें अपना पति मानकर पिछले करीब चार साल से करवाचौथ का व्रत भी रखने लगा। कई बार समझाया, लेकिन नहीं माना।
अकेला नहीं सैकड़ों हैं ठाकुर जी की पत्नियां
रोहिणी उर्फ रोहित का कहना है कि वह अकेला नहीं है। ठाकुर जी को सैकड़ों लोग अपना पति मान चुके हैं। उसने बताया कि होली के बाद देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग वृंदावन आकर ठाकुर जी की भक्ति में लीन रहते हैं। उसका कहना है कि वह अकेला नहीं है कि जिसने भगवान श्रीकृष्ण से ब्याह रचाया है ऐसे बहुत से लोग हैं, जिसमें से कुछ श्रृंगार आदि करके रहते हैं तो कुछ बिना इसके।