बहेड़ी। नैनीताल हाईवे पर फोरलेन बनाने वाली कंपनी को डिवाइडर पर पौधे लगाने थे ताकि हरियाली रहे और दूसरी साइड से आने वाले वाहनों की रोशनी न पडे़। वर्षों बाद भी फोरलेन बनाने वाली कंपनी ने न तो पौधे लगाए और न ही पूरे अवैध कट बंद किए। इसके चलते हादसे दर हादसे होते हो रहे हैं। बीती रात जो हादसा हुआ वह भी दूसरी साइड से आ रहे वाहनों की रोशनी पड़ने के कारण हुआ। हाईवे बनाने वाली कंपनी हादसों के बाद सख्ती होने पर जल्द डिवाइडर पर पौधे लगाने की बात कहकर बला टाल देती है। वहीं हादसों की दूसरी बड़ी वजह हाईवे पर अवैध अतिक्रमण है। नगर की सीमा आरंभ होते ही हाईवे पर जगह जगह दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। कई जगह रेता बजरी डालकर हाइवे कब्जाया गया है तो कई जगह अवैध कट तोड़ दिए हैं। इससे हादसे बढ़ रहे हैं।
हाईवे पर हरियाली तो होनी ही चाहिए। इसके लिए कई बार पीएनसी कंपनी को लिखकर भेजा है। पिछले दिनों कमिश्नर सर ने भी अवैध कट पर इस कंपनी के अधिकारियों की फटकार लगाई थी। डीएम और कमिश्नर को इससे अवगत कराएंगे। वैसे इस बार वन विभाग की मदद से प्रशासन खुद डिवाइडर पर पौधे लगाएगा। - ममता मालवीय, एसडीएम बहेड़ी
समय से आती फायरब्रिगेड तो बच सकती थी जान
बहेड़ी। हादसे के बाद तमाम कोशिश के बाद भी फायरब्रिगेड के कर्मचारियों ने फोन नहीं उठाया। कुछ लोगों ने जलती गाड़ी का दरवाजा खोलने की कोशिश की तो कुछ बाल्टियों से पानी डालने में जुटे लेकिन सारी कवायद फेल साबित हुई। अगर फायर कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए फोन उठा लेते और मौके पर पहुंचते तो प्रमोद की जान बच सकती थी। पूरा इलाका फायरब्रिगेड कर्मचारियों को कोसता नजर आया।
शादी की सालगिरह का केक काटा था
बहेड़ी। दो दिन पहले प्रमोद ने अपनी पत्नी कोमल के साथ परिवार की मौजूदगी में शादी की सालगिरह का जश्न मनाया था। उसने पत्नी कोमल के साथ केक काटते हुए कई सेल्फी ली थीं। कोमल गर्भवती है तो दूसरी खुशी घर में नये मेहमान के आने को लेकर भी थी। अक्सर वह मंडी में सब्जी पहुंचाने के बाद पत्नी के लिए फल खरीदकर ले जाता था। पति की मौत की खबर शव आने तक पत्नी से छुपाई गई।
शानदार खेती का था शौकीन
परिजनों ने बताया कि प्रमोद को वैज्ञानिक तकनीक से खेती करने शौक था। वह दूर तक होने वाली किसान गोष्ठियों में जाता था। घरवाले कई बार कह चुके थे ये रात को मंडी मत जाया करो। कहीं कोई अनहोनी न हो जाये। या फिर किसी ड्राइवर को भेजो। इस पर उसका तर्क होता था मंडी जाकर कई तरह की जानकारी मिलती है और ड्राइवर का खर्च भी बचेगा।