नवाबगंज (बरेली)। शिक्षक के बेटे का रात आठ बजे अपहरण करने के बाद 38 मिनट में ही आरोपी छात्र ने गला दबाकर हत्या कर दी थी। वह बरातघर से बच्चे को हाथी दिखाने के बहाने बुलाकर बाहर लाया था और बाइक पर बैठाकर बिथरी में हत्या कर बाग के पास खाई में शव डाल दिया। शव न दिखे इसलिए पताई से उसे ढक दिया। सीसीटीवी फुटेज से वह फंस गया। जांच के मुताबिक वह बिना किसी रिस्क के फिरौती वसूलना चाहता था, इससे पहले पकड़ गया। अफसरों ने उससे यह भी कहा कि बिना बच्चे को देखे या आवाज सुने कोई इतनी बड़ी फिरौती कैसे दे सकता है? तब वह बोला कि बच्चा साथ लेकर घूमना तो और खतरनाक हो जाता।
पुलिस हिरासत में तीन दिन से सुनील अपने बयान बदल रहा था। पुलिस को उस पर शक तो हो ही गया था कि उसी ने बच्चे को अगवा किया है पर वजह और बच्चे के सुरक्षित होने पर अंदेशा था। फिरौती की कॉल के बाद तफ्तीश तेज हुई। शक था कि केस की दिशा मोड़ने या सुनील से शक हटाने के लिए उसी के किसी साथी ने कॉल की है। स्वॉट टीम प्रभारी उसे दोबारा बरातघर ले गए और सख्ती की तो उसने कस्बे के ही एक रोहित नाम के लड़के के साथ अपहरण प्लान करना बता दिया। पुलिस ने रोहित को लाकर खबर ली तो उसने कहा कि वह सुनील को जानता ही नहीं। जिस लड़की की बरात थी, वो सुनील की चचेरी बहन है। दुल्हन और उसका भाई दोनों ही बच्चे के पिता सत्यप्रकाश के विद्यार्थी रहे हैं। इस नाते सुनील का भी शिक्षक के घर आना-जाना और संपत्ति की जानकारी थी। सुनील की बातों से भटकी पुलिस ने दुल्हन के भाई से भी सख्ती की पर कुछ नहीं निकला। देर रात सुनील ने बीसलपुर क्षेत्र के ही दो लोगों को सहयोगी बताया तो पुलिस उसे लेकर वहां रवाना हो गई।
एक करोड़ फिरौती मांगने वाला फ्री में जाएगा जेल
नवाबगंज। बुधवार दोपहर एक बजे शिक्षक चंद्रप्रकाश के मोबाइल पर अंजान नंबर से व्हाट्सएप मेसेज आया। लिखा था कि सुुनो, लड़का चाहिए। शिक्षक ने पूछा आप कौन हैं जी, लड़का तो चाहिए, कोई खबर हो तो प्लीज बताएं। मैं इनाम भी दूंगा। इसके बाद कोई मेसेज नहीं आया। कुछ समय बाद व्हाट्सकॉल आई, इसमें अपहरणकर्ता ने शिक्षक से बच्चा उसके पास होने की बात कहकर छोड़ने की कीमत एक करोड़ मांगी। कहा कि उसके पास उनकी पूरी कुंडली है। वह क्या कर रहे हैं। जब शिक्षक ने परेशानी की दुहाई दी तो वह 50 लाख देने के बाद बच्चा छोड़ने को राजी हो गया। शिक्षक ने बच्चे से बात करने को कहा तो बोला शाम को मौका मिलते ही बात करा देगा। पुलिस को सूचना देने पर बुरा अंजाम भुगतने की धमकी दी। शिक्षक ने वक्त मांगा तो पांच मई तक समय दिया। यह भी कहा कि तुम्हारा बच्चा रोता बहुत है और सोता भी बहुत है। जब पुलिस ने नंबर की लोकेशन निकाली तो नोएडा में मिली। हालांकि अधिकारियों ने कॉल करने वाले को ट्रेस करने के बाद यह भी साफ कर दिया कि सुनील या उसके साथियों से उसका वास्ता नहीं है। वह या तो शिक्षक का परिचित है या फिर अखबारों की खबरों के आधार पर फिरौती का डर दिखाकर ब्लैकमेल करना चाहता था।
लखनऊ से अपडेट ले रहे अफसर
बरेली। शिक्षक के बेटे के अपहरण मामले में डीजीपी कार्यालय से भी मामले की पल-पल की रिपोर्ट मांगी जा रही थी। एडीजी और डीआईजी लगातार नवाबगंज पुलिस के संपर्क में थे। बच्चे का शव मिलने की सूचना भी एडीजी के जरिये डीजीपी तक पहुंचा दी गई। वहां से दोषियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश मिला है।