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हाईवे पेट्रोलिंग! यानी पशु तस्करों से पक्की वसूली

Sun, 30 Sep 2018 11:40 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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 गोवंशीय पशुओं की तस्करी ने पुलिस की हाईवे पेट्रोलिंग के मायने ही काफी हद तक बदल दिए हैं। योगी सरकार के सत्ता पर काबिज होने के बाद कुछ समय के लिए बंद हुआ यह धंधा अब फिर अपने चरम पर है। हाईवे पर गोवंशीय पशुओं की तस्करी काफी हद तक एक सिस्टम के तहत ही चल रही है, पिछले दिनों जब यह सिस्टम ब्रेक हुआ तो सिपाही संजीव कुमार की हत्या जैसा हादसा सामने आ गया।
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पशु तस्करों के हाथों सिपाही की हत्या के बाद खाकी-खादी और पशु तस्करों के बड़े नेटवर्क की परतें खुलकर सामने आ गई हैं। हत्या से पहले सिपाही जिन संदिग्ध नंबरों पर संपर्क में था, उसके तार मीरगंज और रामपुर के पशु तस्करों से जुड़ रहे हैं। हालांकि अब सीबीगंज थाने की एक पुलिस टीम ने रामपुर में डेरा भी जमा दिया है, लेकिन यह साफ हो चुका है कि हाईवे पर पुलिस की पेट्रोलिंग का फोकस जनसुरक्षा से ज्यादा पशु तस्करों से वसूली पर था। महकमे के अफसर भी इससे बेखबर बने हुए थे। बता दें कि कई सालों से रामपुर गोवंशीय पशुओं की तस्करी का केंद्र बना हुआ है। इसी वजह से बरेली पशु तस्करी के मेन रूट पर पड़ता है। सूबे के कई शहरों से गोवंशीय पशु बरेली होते हुए ही रामपुर तक पहुंचते हैं। पशु तस्करी के नेटवर्क में रामपुर के राजू, इंतजार, नन्हा, मुस्तकीज, फरीद और मुल्ला जी बड़े नाम हैं। एक पुलिस कर्मी के मुताबिक गोवंशीय पशुओं की तस्करी को भाजपा सरकार में भी राजनैतिक संरक्षण हासिल है।

डेढ़ लाख में होता है दस टायरा ट्रक का ठेका
रामपुर के ट्रांसपोर्टर उन्नाव और रायबरेली से पशुओं की खेप लाने का ठेका लेते हैं। इस धंधे से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पशुओं से भरे दस टायरा ट्रक को रामपुर तक पहुंचाने का रेट न्यूनतम डेढ़ लाख रुपये होता है। इसमें ट्रांसपोर्टर और पुलिस दोनों का ‘खर्च’ शामिल रहता है। ड्राइवर को भी एक राउंड के छह से दस हजार रुपये तक दिए जाते हैं। एक ट्रक पर पशु तस्करों को सात से आठ लाख तक का मुनाफा होता है। सूत्रों के अनुसार पशु तस्करी के लिए जयपुर से फाइनेंस हुए ट्रकों का इस्तेमाल होता है। किस्त टूटने के बाद इन गाड़ियों पर रिपोर्ट भी दर्ज होती है। इस कारण पुलिस की पकड़ में आने पर भी उनके असली मालिक तक पहुंचना मुश्किल होता है। 2016 में तत्कालीन डीआईजी आरकेएस राठौर ने 32 गाड़ियों के चेचिस नंबर के जरिये उनके असली मालिक तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। संभल और रामपुर में चोरी की गाड़ियों को भी बड़े पैमाने पर इसके लिए इस्तेमाल किया जाता है। पिछले दिनों नकटिया के एक बड़े ट्रांसपोर्टर के पांच ट्रक इन्हीं धंधों की वजह से सीज किए गए थे।
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ये है पशु तस्करी के रूट
मीट कारोबारियों के मुताबिक उन्नाव के सप्ताहिक पशु बाजार की ‘अड्डी’ और रायबरेली से पशुओं को खरीदा जाता है। पशुओं के कटने के बाद अवैध मांस की कीमत चार गुना हो जाती है। यह खेप शाहजहांपुर वाया बरेली रामपुर तक भेजी जाती है। राजस्थान में पशु (बट्टी) काफी सस्ते होते है। इन पशुओं की खेप मथुरा-आगरा-मैनपुरी होकर आती है। अलीगढ़-गुन्नौर होकर भी पशुओं की खेप आती है।

..और साहब की लोकेशन भी पहुंचती है पशु तस्करों तक
पशु तस्करों का पुलिस में भी जबर्दस्त नेटवर्क है। हाईवे के सभी थाने और चौकियाें पर तो तस्करों की सेटिंग होती ही है, अफसरों के साथ चलने वाले पुलिस कर्मी तक पशु तस्करों तक सूचनाएं पहुंचाते हैं। कुछ समय पहले ऐसे कई पुलिस वालों को चिह्नित भी किया गया था, लेकिन फिर भी यह नेटवर्क तोड़ा नहीं जा सका। पशु तस्करों से सूचनाओं के बदले अच्छा-खासा पैसा मिलने के कारण ही महकमे के कई सिपाही अधिकारियों के साथ गनर या ड्राइवर की ड्यूटी के लिए जमकर जुगाड़ लगाते हैं। भमोरा के तेल प्रकरण में हटाया गया सिपाही इन दिनों एसपी सिटी का ड्राइवर हैं। एसपी सिटी कार्यालय में एक अन्य ड्राइवर भी पांच साल से जमा हुआ है। एसएसपी धर्मवीर के समय में बहेड़ी थाने से हटाया गया सिपाही सर्विलांस की गाड़ी पर चलता है। बारादरी में एक जुआरी की मौत के बाद हटाया गया सिपाही भी एंटी डकैती टीम का सदस्य बना हुआ है।



पशु तस्करों के खिलाफ रणनीति बना ली गई है। साफ छवि के पुलिसकर्मियों की तैनाती करने के साथ रात में ढाई से सुबह पांच बजे तक स्पेशल ड्राइव चलाई जाएगी। शाहजहांपुर की तरफ से आने वाली पशुओं की खेप बरेली के रास्ते नहीं जाने दी जाएगी। हाईवे को जोन में बांटकर टीमों को तैनात किया जा रहा है। - मुनिराज जी. एसएसपी बरेली

बरेली रेंज के चार जिलों की पुलिस को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। शहर में लग्जरी कारों में पशुओं को चोरी करने वालों की भी धरपकड़ होगी। हाईवे पर भी सक्रियता बढ़ा दी गई है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि पशु तस्करी नहीं होने दी जाए। - ध्रुवकांत ठाकुर, आईजी बरेली रेंज
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