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अब नहीं पकड़े जाएंगे प्रधान वैज्ञानिक के कातिल

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आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक की हत्या का मामला

खुलासे में नाकाम रही पुलिस ने लगी दी फाइनल रिपोर्ट
तीन साल में एक भी पुख्ता सबूत नहीं जुटा सकी पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के जेनेटिक विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा के कातिल अब शायद कभी नहीं पकड़े जाएंगे। शहर को हिला देने वाले इस हत्याकांड का तीन साल बाद भी खुलासा करने में नाकाम रही इज्जतनगर थाना पुलिस ने अब फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है।
आईवीआरआई परिसर में 28 जुलाई, 2015 की रात डॉ. दीपक के घर तीन शख्स मुलाकात करने पहुंचे। इन लोगों ने ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठे डॉ. दीपक के गले पर कैंची से वार करके उनकी हत्या कर दी और फिर उनकी मां और नौकरानी को बाथरूम में बंद कर वैज्ञानिक के कंप्यूटर की हार्डडिस्क को शॉर्ट करके डाटा मिटाने की कोशिश की। मोबाइल सहित उनके सारे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तोड़ दिए। पुलिस ने हार्ड डिस्क और वैज्ञानिक का मोबाइल डाटा रिकवर करने के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजी, लेकिन डाटा हासिल नहीं हो सका था।
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विभागीय विजिलेंस जांच की फाइल भी खंगाली गई
पुलिस की छानबीन विभागीय विजिलेंस जांच पर भी आकर टिकी थी। तत्कालीन एसपी सिटी रोहित सिंह सजवाण ने प्रधान वैज्ञानिक के खिलाफ हुई विभागीय विजिलेंस जांच की फाइल में भी हत्या के सुराग तलाशने की कोशिश की, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। तत्कालीन विवेचक इंस्पेक्टर कमल सिंह ने 2013 में हुई विजिलेंस जांच में आईवीआरआई में प्रो. एमसी शर्मा के निदेशक रहते तमाम गड़बड़ियां सामने आने की बात कही थीं। तब डॉ. दीपक के विभागाध्यक्ष रहते हुए जेनेटिक विभाग में खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी की भी विजिलेंस जांच हुई थी। इसमें वह दोषी पाए गए थे और उनके समेत 14 लोगों पर जुर्माना लगा था। इस लाइन पर भी पुलिस ने काम किया लेकिन हत्या की कोई क्लू हाथ नहीं लगा।

शासन तक हुई थी हत्या की गूंज
प्रधान वैज्ञानिक की हत्या की गूंज शासन तक हुई थी। तत्कालीन डीजीपी जावीद अहमद ने विवेचक को तलब करके केस को जल्द वर्कआउट करने के के आदेश दिए थे। पुलिस ने वैज्ञानिक के घर, ऑफिस, रिश्तेदारों और दोस्तों के घरों से कुल 125 फिं गर प्रिंट लिए थे, लेकिन नवंबर 2016 में घटनास्थल से लिए गए फिंगर प्रिंट की जो रिपोर्ट आई उसमें एक भी प्रिंट मैच नहीं किया।

तीन सालों में केस के आठ विवेचक बदले
प्रधान वैज्ञानिक हत्याकांड के खुलासे के लिए तीन सालों में आठ विवेचक बदल चुके हैं। सभी ने अपने तरीके से जांच करके खुलासे का प्रयास किया। क्राइम ब्रांच, साइबर सेल, सर्विलांस सहित कई एजेंसियों को भी लगाया गया, लेकिन कोई क्लू नहीं मिला।


प्रधान वैज्ञानिक की हत्या के बाद पुख्ता सबूत नहीं मिलने की वजह से फाइनल रिपोर्ट लगाई गई है। अगर भविष्य में कोई सुराग मिलता है तो दोबारा केस को ओपन किया जा सकता है। - ध्रुवकांत ठाकुर, आईजी, बरेली रेंज
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मैंने पोस्टिंग के बाद इस केस पर सक्रियता से काम कराया, लेकिन कोई नई बात सामने नहीं आने पर पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। हम केस पर काम कर रहे हैं, अगर कोई क्लू सामने आता है तो केस पर फिर काम किया जाएगा। - कलानिधि नैथानी, एसएसपी
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