बरेली। पुलवामा हमले के बाद भारतीय सेना पर टिप्पणी किए जाने के मामले में पुलिस ने आईवीआरआई की आरोपी कश्मीरी छात्राओं का बयान दर्ज किया है। दोनों कश्मीरी छात्राओं ने पुलिस को बताया कि सेना पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। उनकी टिप्पणी कश्मीर के आर्म्ड ग्रुप पर थी। अपने व्हाट्सएप पर उन्होंने आर्म्ड ग्रुप पर लिखे एक लेख को ही बतौर स्टेटस लगा लिया था, जिसे आपत्ति के बाद हटा भी लिया। कश्मीरी छात्राओं ने कहा कि वह देश और देश की सेना दोनों का बहुत सम्मान करती हैं।
पुलवामा हमले के बाद आईवीआरआई की तीन शोध छात्राओं की ओर से कश्मीर में सेना की कार्यप्रणाली पर किए गए कमेंट पर खासा बवाल मचा था। आईवीआरआई प्रशासन ने उनकी फेलोशिप रद्द कर दी थी। लेकिन इसके बाद हिंदूवादी संगठनों ने इसे हल्की कार्रवाई बताते हुए अधिकारियों से शिकायत की थी, इसके बाद भाजपा नेताओं की मदद लेकर थाना इज्जतनगर में तीनों छात्राओं के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। दो आरोपी छात्राएं फिलहाल आईवीआरआई में ही पढ़ रही हैं जबकि तीसरी कश्मीर में जॉब कर रही है। आईवीआरआई में रह रही दो छात्राओं के मामले की विवेचना कर रहे इंस्पेक्टर इज्जतनगर मनोज कुमार ने बयान दर्ज कर लिए हैं। छात्राओं ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने व्हाट्सएप पर खुद कोई कमेंट नहीं लिखा था। एक लेख को अपना व्हाट्सएप स्टेटस बनाया था जो कश्मीर के आर्म्ड ग्रुप पर लिखा गया था। साथियों और संस्थान ने एतराज किया तो उसे भी हटा दिया। पुलिस के मुताबिक स्टेटस पर सेना को लेकर कमेंट है मगर छात्राएं सफाई दे रही हैं कि कमेंट में भारतीय सेना की बजाय आर्म्ड ग्रुप लिखा गया है। छात्राओं का कहना है कि कश्मीर में कई आर्म्ड ग्रुप चल रहे हैं जिनकी वजह से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने उसी समस्या को जाहिर किया था। वे देश और सेना का सम्मान करती हैं।