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दबंगई से दरोगाई करती रही शबनम और घुटता रहा परिवार

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बरेली। दरोगा अरविंद का परिवार उनकी हत्या के मामले में सजा दिलाने के लिए 19 साल तक इंतजार करता रहा। उनकी मां शारदा देवी इस लड़ाई को लड़ते-लड़ते बूढ़ी हो चुकी हैं। गोद में खेलने वाला बेटा जवान हो गया तो इंसाफ का दिन आया। अरविंद का परिवार इस मामले में सजा के लिए एक-एक पल, एक-एक दिन गिनता रहा और दरोगा शबनम बमुश्किल दो साल के लिए जेल गई। इसके बाद जमानत हुई और फिर तब से वह दबंगई से नौकरी कर रही थी। बृहस्पतिवार को इस मामले में दरोगा शबनम को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया तो उनके परिवार को सुकून मिला।
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दरोगा अरविंद की हत्या 12 मार्च 2000 की रात हुई थी। हत्या के बाद एसएसपी के यहां सरेंडर कर दरोगा शबनम ने आरोप लगाया कि अवैध संबंध बनाने के बाद दरोगा अरविंद उसे ब्लैकमेल कर रहे थे। शादी के बाद भी अरविंद ने उससे मिलना-जुलना नहीं छोड़ा। अरविंद उसका सौदा करके देह व्यापार के धंधे में धकेलना चाहता था। खुद को देह व्यापार में फंसते देख उसने ईंट से अरविंद के सिर में बार किए, जिससे उनकी मौत हो गई। वहीं, दरोगा अरविंद के घरवालों का कहना था कि शबनम उनके पीछे पड़ी थी। इस मामले में बृहस्पतिवार को करीब 19 साल बाद अदालत ने दरोगा शबनम को दोषी करार दिया है। दरोगा अरविंद की पत्नी आदेश कौर को पुलिस में नौकरी मिल गई। वह अब हापुड़ में महिला थाने में इंस्पेक्टर हैं।

मां ने लड़ी हाईकोर्ट में लड़ाई
शबनम को सजा दिलाने के लिए मुकदमा उनके भाई सुरेंद्र पाल सिंह ने लिखाया तो सुनवाई में तेजी के लिए हाईकोर्ट में मां शारदा देवी ने लड़ाई लड़ी। उन लोगों को बेटा दरोगा होने के बावजूद उसकी मौत के मामले में सजा दिलाने के लिए पुलिस के ही खिलाफ प्रदर्शन तक करना पड़ा। बकौल शारदा देवी, पहली बार जेल जाने के बाद शबनम को सशर्त जमानत मिली थी और हाईकोर्ट ने चार महीने में निर्णय देने को कहा था। इसके बाद 2016 में स्टे खारिज होने के बाद मार्च 2017 को हाईकोर्ट ने निस्तारण को कहा। इसके बाद मई 2018 में हाईकोर्ट ने फिर सख्ती दिखाई तो अब जाकर सुनवाई पूरी होने के बाद दोष तय किया गया है।
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दो आरोपियों का आज तक सुराग नहीं
सुरेंद्र पाल सिंह ने मुकदमे में दरोगा शबनम के अलावा दो अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया था और उन्हें पहचान लेने की बात कही थी। मगर पुलिस की विवेचना में इन दो अज्ञात नामों का आज तक खुलासा नहीं हुआ और फिर कोर्ट में सिर्फ शबनम के खिलाफ ही चार्जशीट भेजी गई।

हालात बता रहे थे कि प्लान करके हुई हत्या
अरविंद के परिजन का आरोप है कि यह हत्या प्लान करके की गई थी। उन्हें शराब पिलाकर मारा गया। जांच के दौरान पुलिस को दरोगा शबनम के कमरे से शराब का आधा भरा गिलास, खून धोने के बाद बाल्टी में भरा पानी, खून से सने दरोगा के कपड़े आदि बरामद हुए थे। अरविंद के सिर्फ सिर में चोटें थीं, उनके हाथों पर चोट को कोई निशान नहीं मिला। अनुमान लगाया गया कि अगर अरविंद ने बचाव की कोशिश की तो उनके हाथ में चोटें जरूर लगती हैं। मगर चोटें न होने से माना गया कि उनके किसी ने हाथ पकड़ रखे थे। अन्यथा छोटे कद की शबनम उनके सिर पर चोट आसानी से नहीं कर पाती।

ढीली पड़ी थी पुलिस, डीजीपी से हुई थी शिकायत
दरोगा अरविंद की हत्या के मामले में परिजनों को पुलिस से लेकर कोर्ट तक काफी संघर्ष करना पड़ा। परिजनों के मुताबिक शबनम के जेल जाने के बाद पुलिस अज्ञात आरोपियों का पता लगाने में कोई रुचि नहीं दिखा रही थी। वे लोग तत्कालीन डीजीपी से भी मिले और सीबीसीआईडी जांच की मांग कर अनशन की धमकी भी दी थी। मगर पुलिस की कार्रवाई में कोई खास बदलाव नहीं दिखा।

सेक्स स्कैंडल को लेकर भी हुई थीं जांच
दरोगा अरविंद की हत्या के बाद तत्कालीन महिला उद्धार अधिकारी कमला पाठक ने जेल में जाकर दरोगा शबनम से पूछताछ की थी। इस मामले को लेकर आशंका जताई गई थी कि हत्या के पीछे सेक्स स्कैंडल भी हो सकता है। कमला पाठक का कहना था कि यह सिर्फ प्यार और नफरत की कहानी नहीं है। इसके पीछे कुछ कहानी और भी है। उन्होंने देह व्यापार से जुड़े गैंग के भी इस मामले में संलिप्त होने की आशंका जताई थी। मगर जांच के बाद ऐसा कोई पुख्ता साक्ष्य सामने नहीं आया, जो इसकी पुष्टि करता।
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