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भुता दोहरा हत्याकांडः मां और साले की हत्या में वकील को आजीवन कारावास

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बरेली।
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भुता के गांव दौलतपुर में बारह साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड के आरोपी वकील पुरुषोत्तम को अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट अजय सिंह ने बुधवार को दोषी मानते हुए सश्रम आजीवन कारावास और 25 हजार 500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। फैसला आने के बाद केस की पैरवी कर रही पुरुषोत्तम की पत्नी ने संतोष जाहिर किया।
एडीजीसी फौजदारी केएम खान के मुताबिक, थाना भुता के गांव दौलतपुर के रहने वाले पुरुषोत्तम की पत्नी गीता देवी ने 13 फरवरी 2005 को थाना भुता में अपने पति व ससुर भगवान दास के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि दहेज को लेकर चल रहे मनमुटाव पर बातचीत करने के लिए उनका भाई मुकेश व फुफेरा भाई किंग देव सिंह उसकी ससुराल आए थे। मुकेश ने गीता को मायके भेजने के लिए कहा तो पुरुषोत्तम गुस्सा हो गया। घर के अंदर से लाइसेंसी रायफल लेकर आया और मुकेश पर गोली चला दी। गोली उसके कंधे को चीरती हुई पुरुषोत्तम की मां जगदेवी को लगी। मुकेश और किंग देव ने रायफल छीननी चाही तो गीता के ससुर भगवान दास ने मुकेश और किंगदेव की लाठी से पिटाई शुरू कर दी। गीता, मुकेश और किंग देव वहां से भागे तो पुरुषोत्तम ने मुकेश को गोली मारकर हत्या कर दी।
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कानून के रक्षक ही ऐसा करेंगे तो समाज में गलत संदेश जाएगा
अभियोजन व गीता के निजी अधिवक्ता विवेक मिश्रा व रुचिन कपूर ने सात गवाह पेश कर घटना को सिद्ध कर दिया। न्यायाधीश ने निर्णय में लिखा कि अभियुक्त अधिवक्ता है और कानून से वाकिफ है। जब कानून के रक्षक ही ऐसा कृत्य करेंगे तो समाज में अच्छा संदेश नहीं जाएगा। न्यायाधीश ने पुरुषोत्तम को आजीवन सश्रम कारावास, 25 हजार रुपये अर्थदंड व मारपीट में छह माह की कैद व 500 रुपये की सजा सुनाई। इसके बाद पुरुषोत्तम को जिला जेल भेज दिया गया है। भगवानदास की मौत हो चुकी है। भगवानदास पूर्व प्रधानाचार्य थे।
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गीता और किंग देव बरी
पुरुषोत्तम ने भी घटना को लेकर पत्नी गीता व किंगदेव गंगवार के खिलाफ परिवाद दायर किया था, जिसका ट्रायल भी साथ-साथ हुआ। पुरुषोत्तम का आरोप था कि घटना के दिन रिछोला किफायतउल्ला निवासी मुकेश व उसका फुफेरा भाई जतीपुर जहानाबाद पीलीभीत निवासी किंगदेव सिंह उसके घर आए। जब पुरुषोत्तम की मां जगदेवी आईं तो मुकेश चीखा कि बुढ़िया आ गई तो किंगदेव ने तमंचा निकालकर जगदेवी को गोली मार दी, जिससे उसकी वहीं मौत हो गई। पुरुषोत्तम अपने परिवाद के आरोप सिद्ध नहीं कर पाए, जिसके परिणामस्वरूप किंगदेव गंगवार व गीता गंगवार को बरी कर दिया गया।
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