राजीवनगर के अधूरे नाले का नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना के आदेश के बावजूद निर्माण पूरा नहीं हो पाया। नगर निगम के अपने ही मंत्री के आदेश को कूड़े के ढेर में डाल देने का नतीजा यह हुआ कि यहां भरे पानी में डूबकर आठ वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। घर से कुछ सामान लेने निकले इस बच्चे को रात भर उसके घरवाले ढूंढते रहे। शनिवार सुबह उसका शव पानी में उतराता हुआ मिला।
सुभाषनगर की राजीवनगर कॉलोनी के नाले का निर्माण अधूरा होने की वजह से पूरी कॉलोनी में पानी भरा हुआ है। नाले के किनारे बसी श्याम कालोनी में रहने वाले राजाराम कश्यप के घर के सामने भी काफी पानी भरा है। शुक्रवार शाम करीब साढ़े सात बजे राजाराम का इकलौता बेटा आठ वर्षीय विपिन पड़ोस की दुकान से कुछ घरेलू सामान लेने घर से निकला था। काफी देर बाद भी वह नहीं लौटा तो परिवार वालों ने उसे ढूंढना शुरू किया। देर रात तक तलाश करने के बाद भी विपिन का कुछ पता नहीं लगा। शनिवार सुबह घर के पास ही एक खाली पड़े प्लाट में भरे पानी में विपिन का शव उतराता हुआ मिला। विपिन की मौत से पूरे परिवार में कोहराम मच गया। मां पुष्पा देवी बेटे की लाश देखकर बेहोश हो गईं। हालांकि घर वालों ने पुलिस को घटना की सूचना दिए बिना उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
राखी से एक दिन पहले चला गया इकलौता भाई, बेसुध हो गईं तीनों बहनें
आठ वर्षीय विपिन कक्षा एक में पढ़ता था और राजाराम का इकलौता बेटा था। तीन बहनों में वह सबसे छोटा था। रक्षाबंधन से एक दिन पहले उसकी मौत से तीनों बहनों का बुरा हाल हो गया। रोते-रोते बार वे कह रही थीं कि वे अब किसे राखी बांधेंगी। राजाराम का परिवार में यह दुख देखकर मोहल्ले वालों की भी आंखें नम हो गईं।
विभागीय मंत्री के आदेश की यह औकात नगर निगम को कोसते रहे मोहल्ले वाले
मासूम विपिन की पानी में डूबकर मौत होने के बाद गुस्साए मोहल्ले के लोग पूरे दिन नगर निगम के अधिकारियों को कोसते रहे। लोगों का कहना था कि जब अपने ही मंत्री के आदेश पर भी नगर निगम नहीं चेता तो आम आदमी का तो उससे कोई उम्मीद करना ही बेकार है। दरअसल फरवरी में बरेली आए नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने राजीवनगर नाले का निरीक्षण किया था। लोगों ने अधूरे प़ड़े इस नाले की वजह से होने वाले जलभराव की समस्या और इसके कारण होने वाले हादसों की जानकारी उन्हें दी तो उन्होंने नगर निगम अफसरों को नाले का निर्माण पूरा कराने का निर्देश दिया था। मंत्री के आदेश पर नगर निगम के अफसर कई दिन तक यहां दौड़ते नजर आए। नाले की नापजोख हुई, प्रस्ताव और एस्टीमेट सबकुछ बना। लेकिन इसके बाद भी निर्माण पूरा कराने के लिए काम नहीं शुरू हो पाया। अगर नाला बना होता तो वहां शायद जलभराव न होता, जिस जगह यह हादसा हुआ।