पीलीभीत हाईवे स्थित गार्डन सिटी में रिटायर्ड बीडीओ और उनकी पत्नी की बेरहमी से हत्या के बाद लूटपाट करने वालों तक पुलिस पहुंचना नहीं चाहती। शायद यही वजह है कि दोहरे हत्याकांड में गुपचुप तरीके से पूर्व विवेचक संजय सिंह ने एफआर लगाकर रिपोर्ट सीओ तृतीय कार्यालय भेज दी। सीओ ने गड़बड़ी पकड़कर अंतिम रिपोर्ट को वर्तमान विवेचक कमलेश कांत वर्मा के पास भेज दिया। सीओ ने केस की जांच दोबारा शुरू करवाते हुए कातिलों तक पहुंचने के निर्देश जारी किए हैं।
दोहरे हत्याकांड को खोलने की जुगत में पौने दो साल में पांच विवेचक बदल गए। तत्कालीन बारादरी थानाध्यक्ष मो. कासिम ने खुलासे के काफी प्रयास किए थे। वारदात के बाद सेटेलाइट चौराहे के पास से रिटायर्ड बीडीओ के घर से लूटी गई स्कूटी भी बरामद करवाई, लेकिन गुपचुप तरीके से थाने में ही खड़ी रखी। हालांकि, मीडिया में मामला उछलने के बाद पुलिस ने स्कूटी को लिखापढ़ी में लिया था। कभी रुद्रपुर तो कभी बदायूं के ककराला में पुलिस टीमें भेजी जाती रहीं, लेकिन रिटायर्ड बीडीओ के कातिलों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी।
तत्कालीन विवेचक मो. कासिम के बाद इंस्पेक्टर कमरुल हसन, इंस्पेक्टर राजेश सिंह और उनके ट्रांसफर के बाद इंस्पेक्टर संजय सिंह ने मामले की विवेचना की। पीड़ित परिवार के मुताबिक, इंस्पेक्टर संजय सिंह कभी उनके पास पूछताछ करने तक नहीं पहुंचे, लेकिन लंबित विवेचनाओं के निपटारे के दबाव में केस में अंतिम रिपोर्ट लगाकर मई में सीओ तृतीय कार्यालय भेज दी। इसके बाद उनका भी ट्रांसफर बदायूं हो गया। सीओ तृतीय नीति द्विवेदी ने दोहरे हत्याकांड में एफआर रिपोर्ट देखकर थानाध्यक्ष बारादरी कमलेश कांत वर्मा को तलब किया, इसके बाद मामला खुला कि किस तरह संजय सिंह एफआर रिपोर्ट लगाकर मामले को रफा-दफा करना चाहते थे। सीओ के निर्देश पर अब कमलेश कांत वर्मा ने दोबारा जांच शुरू की है।
परिवार आज भी दहशत में, घर कैमरों से लेस
रिटायर्ड बीडीओ और उनकी पत्नी की हत्या के बाद परिवार बेहद डरा हुआ है। हत्या के वक्त उनके बेटे पंकज अग्रवाल बीडीओ कार्यालय पीलीभीत में तैनात थे, लेकिन वारदात के बाद उन्होंने बरेली ट्रांसफर करा लिया था। अमर उजाला टीम जब उनके घर पहुंची तो पूरा घर सीसीटीवी कैमरों से लेस मिला। उनकी पत्नी हनी अंदर जाली के दरवाजे के पीछे से बात करती रहीं, यह शायद उनका डर था।
आईजी के आश्वासन के बाद भी कुछ नहीं हुआ
पंकज ने बताया कि पुलिस ने उनके पिता और मां की हत्या की पुख्ता जांच नहीं की। वह आईजी से मिले। थाने के कई चक्कर काटे, लेकिन पुलिस उनके केस में कोई ठोस बात सामने नहीं ला सकी। पौने दो साल बाद भी उनका परिवार दहशत में है।
लोगों के दिलों को झकझोर गया था हत्याकांड
20 अक्टूबर, 16 की रात गार्डन सिटी के मकान नंबर 48 में रिटायर्ड खंड विकास अधिकारी केसी गुप्ता (84) और उनकी पत्नी शांति देवी (75) पर सोते हुए लोहे के रॉड से हमला किया गया था। शांति देवी की मौके पर मौत और रिटायर्ड बीडीओ की मेडिसिटी में करीब 13 दिन बाद मौत हो गई थी। वारदात की रात उनका बेटा पीके अग्रवाल अपनी पत्नी हनी और बेटे ऐश्वर्य के साथ ऊपर की मंजिल पर सो रहे थे। उनका एक बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर आशु अपनी पत्नी सुरभि के साथ अमेरिका में रहता है। सुबह करीब छह बजे पीके अग्रवाल नीचे उतरे तो बिस्तर पर पिता और मां को खून से लथपथ पाया। लूट के बाद बदमाश माल पीके अग्रवाल की स्कूटी पर लादकर ले गए थे।
विवेचक ने रिपोर्ट बनाकर भेजी थी, लेकिन कार्यालय से केस की सही दिशा में जांच के निर्देश दिए गए हैं। विवेचक को खुलासे के लिए कहा गया है। लापरवाही की गुंजाइश नहीं है।
- नीति द्विवेदी, सीओ तृतीय