बरेली। कैंट के गांव में नाबालिग प्रेमी युगल की जहर से मौत के बाद सन्नाटा पसरा है। गांव में तरह तरह की चर्चाएं हैं। बताते हैं कि नाबालिग प्रेमी युगल शादी करना चाहते थे पर उनकी उम्र और अलग बिरादरी इसमें आड़े आ गई। परिवार की सख्ती से आहत होकर उन्होंने मरने का फैसला कर लिया।
करीब साल भर से नाबालिग प्रेमी युगल का प्रेमप्रसंग चल रहा था। छह महीने पहले दोनों परिवारों को इसकी जानकारी हुई थी। दोनों परिवार आसपास रहते हैं और अच्छे संबंध हैं। इसलिए परिवारों ने सूझबूझ से काम लिया और आपस में कोई झगड़ा या पुलिस से शिकायत नहीं की। बावजूद किशोरवय प्रेमियों की इस हरकत पर सबको एतराज था। उनके मिलने पर पाबंदी लगा दी गई। यहां तक कि लड़की की पढ़ाई छुड़वाकर घर बैठा लिया और केवल परीक्षा के दिनों में ही उसे निगरानी में स्कूल जाने दिया गया। मिलना जुलना बंद होने से दोनों काफी गुस्से में थे। बताते हैं कि कुछ दिन पहले ही लड़के ने जहर लाकर रख लिया था और इसे प्रेमिका को भी दे दिया था। तय हुआ था कि जब साथ जी नहीं सकते तो साथ मर जाएंगे। पहले इनकी हिम्मत नहीं पड़ी पर किशोरी के जहर खाकर मरने की सूचना पर प्रेमी ने भी मरने का फैसला कर लिया। पोस्टमार्टम हाउस पर दोनों परिवार साथ ही बैठे थे। वे अफसोस कर रहे थे कि अगर बच्चों के इस कदम की जरा भी भनक होती तो उनकी हर बात मान लेते। तब उन्हें अपने लाड़लों से जुदा होने का दंश तो न झेलना पड़ता।
‘ये उम्र सबसे नाजुक, ध्यान रखे परिवार’
मनोवैज्ञानिक डॉ. हेमा खन्ना बताती हैं कि 13 से 17 साल तक की उम्र आत्महत्या जैसे निर्णय लेने का सबसे खतरनाक दौर होती है। इसमें किशोर या किशोरी में तेजी से हार्मोनल चेंज होते हैं। शारीरिक और मानसिक बदलाव के नाजुक वक्त में किशोर पूरी तरह आत्मनिर्भर होना चाहते हैं। उन्हें गुस्सा भी बहुत तेज आता है और वह अपनी हर बात मनवाना चाहते हैं। ऐसे में घरवाले अगर सख्ती करें और कोई बाहरी शख्स प्यार जताए तो वह उसे ही अपना सबकुछ मान लेते हैं और कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही रहा होगा। या तो दोनों में अनबन हुई होगी या फिर परिवार ने ज्यादा सख्ती कर दी होगी। यह बच्चों को भावनात्मक सहारा देने का वक्त होता है।