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ट्रांसपोर्टर हत्याकांड- बहुत नफरत थी हत्यारों को, पहले गला दबाया फिर काटा

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बरेली। ट्रांसपोर्टर साबिर खां की हत्या के मामले में अगर सर्विलांस से सच सामने नहीं आता तो कई बेगुनाहों का फंसना तय था। कॉल रिकॉर्ड से प्रेमप्रसंग की बात सामने आने पर ही पुलिस ने स्थानीय इनपुट जुटाकर एक आरोपी को गिरफ्तार करके घटना खोल दी। परिवार के दूसरे लोगों की गिरफ्तारी को पुलिस दबिश दे रही है तो फिजूल में पकड़े गए लोगों को छोड़ दिया गया है। अभी साबिर के मोबाइल फोन भी नहीं मिल सके हैं।
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साबिर खां का पूरा परिवार रम्पुरा माफी के पुराने मकान में रहता है। जबकि साबिर ने बच्चों की पढ़ाई के लिहाज से नैनीताल हाईवे किनारे मेडिकल कॉलेज के पास अभयपुर में किराए पर मकान ले रखा था। यहां वे पत्नी और बच्चों के साथ रहते थे। साबिर के पास छह ट्रक थे। इन्हीं को पास कराने और ड्राइवरों से हिसाब की बात कहकर अक्सर रात में वे हाईवे पर आ जाते थे। उस रात भी ऐसा ही हुआ। पहले दो ट्रक हल्द्वानी से आने की बात कहकर वे घर से निकले और थोड़ी देर में लौट आए। दोबारा कोई कॉल आई तो पत्नी आयशा से कहा कि एक और ट्रक को पास कराना है, इसके बाद से वे निकले तो नहीं लौटे। सुबह तक कॉल करके परेशान हुई आयशा ने परिवार के लोगों को सूचना दी। इसके बाद उन्हें रिश्तेदारियों और परिचितों के यहां खोजा गया। ड्राइवरों से बात की तो उन्होंने मुलाकात की तस्दीक की। हाईवे किनारे चाय की दुकान पर साबिर की बाइक लॉक लगाकर खड़ी मिली तो शक बढ़ा। इसके बाद पुलिस की मदद ली गई। शुरू में पुलिस भी कारोबारी या प्रधानी की रंजिश में लापता होना मान रही थी पर साबिर के नंबर की कॉल डिटेल से पता लगा कि कहानी दूसरी ही है। मेडिकल कॉलेज से सटे गांव की युवती के नंबर से साबिर के मोबाइल फोन पर देर रात कॉल की गई थी। साबिर ने भी कॉल की थी। जांच में पता लगा कि दोनों नंबरों पर लगातार लंबे समय तक बात होती थी। पुलिस ने युवती के भाई को पकड़ लिया। परिवार के अन्य सदस्य नहीं मिले। शायद उन्हें पुलिस की कार्रवाई का अंदेशा था। युवक ने स्वीकारा कि बहन से मिलने घर में घुसे साबिर को देख उसका खून खौल उठा। उसने अपने भाई के साथ मिलकर साबिर का गला दबाकर हत्या कर दी और खेत में ले जाकर गला काट दिया। आरोपी के घर से पुलिस को एक तमंचा और फावड़ा मिला। गला काटने वाला औजार शाम तक नहीं मिला था।

पति को छोड़ चुकी है युवती
साबिर की प्रेमिका की शादी पड़ोस के ही गांव में हुई थी पर वह अपने पति को छोड़ चुकी है। आरोपी परिवार पीलीभीत के बीसलपुर क्षेत्र का रहने वाला है और कुछ साल पहले ही यहां आकर बसा है। बताते हैं कि साबिर की उम्र दोगुनी होने के बाद भी उसके रुतबे और पैसे की चमक से युवती उसके संपर्क में आ गई थी। आरोपी पहले भी साबिर से झगड़ा कर चुका था।
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भीड़ ने थाना घेरा तो बुलाई पीएसी
हत्यारोपी को जब शव बरामद होने के बाद थाने लाया गया तो उसने बताया कि केवल भाई ही हत्या व शव दबाने में उसका मददगार था। तब प्रधान के समर्थक करीब ढाई सौ लोगों की भीड़ ने थाने का घेराव कर लिया। भीड़ का कहना था कि साबिर की कद काठी काफी मजबूत थी। उसे आसानी से दो लोग नहीं मार सकते। इस घटना में करीब पांच से छह लोग शामिल होंगे। कहा कि युवक, उसके पिता व भाई को उनके हवाले किया जाए, वे उन्हें खुद सजा देंगे। हालात बेकाबू देख पुलिस ने पिछली साइड से आरोपी को कहीं और भेज दिया। थोड़ी ही देर में कई थानों की पुलिस और पीएसी आ गई। तब भीड़ को हटाया जा सका और आरोपियों को चिह्नित कर सख्त कार्रवाई की बात कही गई। शाम को सुपुर्देखाक के वक्त गांव छावनी बना था। देर रात भी एहतियात के तौर पर गांव से लेकर आरोपी के घर तक पुलिस तैनात की गई।

निर्ममता से की हत्या
गन्ने के खेत में मेड़ के पास करीब दो फुट गहरे गड्ढे में साबिर का शव बरामद किया गया। यहां से कुछ दूरी पर उनका सिर मिला। सिर का अधिकांश हिस्सा ऊपर ही था। सिर के बाल और चेहरा जला हुआ लग रहा था जैसे तेजाब डाला गया हो। पेट पर मारपीट की चोटें थीं। दायां पैर टूटा हुआ था और घुटनों से उल्टी दिशा में मुड़ा मिला। हालांकि पोस्टमार्टम में इसे सनबर्न माना गया। दो दिन पहले हत्या होनी मानी गई। चूंकि गला काटा जा चुका था, इसलिए मौत की वजह गला काटना ही पुष्ट हुई।
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