बरेली। महिला होमगार्ड पर केरोसिन डालकर जलाने के मामले में एक मकान की वसीयत का किस्सा सामने आया है। वसीयत के बाद से बवेला मचा था। रिश्तेदारों के दिल में ऐसी गांठ पड़ी थी जो नासूर बनती जा रही थी और नतीजा इस अग्निकांड के रूप में सामने आया।
कांति देवी के भांजे दीपक व अन्य रिश्तेदारों ने बताया कि उनके कांति देवी के पिता टीकाराम मूल रूप से सिकलापुर के निवासी थे। कांति देवी पांच बहनें और एक भाई देवकीनंदन थे। टीकाराम अपने बेटे देवकीनंदन से खुश नहीं रहते थे, इसलिए उन्होंने अपने 65 वर्षीय मकान की वसीयत बेटी कांति देवी के नाम कर दी थी। कांति देवी को मकान देने की वजह ये भी थी कि करीब 35 साल पहले से उनका पति नत्थूलाल से मनमुटाव था। पति दो बेटों के साथ शाहदाना के मकान में तो कांति देवी दो अन्य बेटों के संग संजय नगर के मकान में रहती थीं। बताया कि सवा दो साल पहले देवकीनंदन की मौत हो गई। तब उनकी गोद ली हुई बेटी कुसुम के पति विजय ने इस मकान पर कब्जा कर लिया। कई बार दोनों पक्षों में विवाद और पंचायत हो चुकी थी। कांति देवी पुलिस और कोर्ट की मदद से मकान लेने की चेतावनी दे चुकी थीं। महीने भर से विजय शांत था। कहने लगा था कि वह अपना मठ चौकी का पुश्तैनी मकान सही करा रहा है, जल्दी कब्जा छोड़ देगा। इस वजह से दोनों पक्षों में बातचीत फिर शुरू हो गई थी। इसलिए कॉलेज गेट पर बातचीत के दौरान उन्हें ये अहसास नहीं था कि विजय ये घटना कर देगा।
चेहरे से कमर तक जला शरीर
- कांति देवी का जिला अस्पताल में डॉ. एके सिंह और निजी अस्पताल में डॉ. अंशु अग्रवाल ने उपचार किया। डॉक्टरों के मुताबिक उनका शरीर करीब साठ फीसदी जल गया है। चेहरा, गर्दन, हाथ, सीना और कमर तक फफोले पड़े थे। हालांकि सिर के बाल साफ बचे होने से घटना को लेकर संशय बरकरार था।
संपत्ति विवाद में हुई थी महिला दरोगा की हत्या
- पंद्रह दिन पहले पुलिस लाइन के हॉस्टल में महिला दरोगा रीना की हत्या कर दी गई थी। तीन दिन बाद खुलासा हुआ तो पता लगा कि सगे भाई ने अमरोहा से बेटे और दो सुपारी किलर के साथ आकर रीना को मारा। दोनों सुपारी किलर अभी फरार हैं। यह घटना भी संपत्ति विवाद से जुड़ी थी। करीब 53 बीघा जमीन की वसीयत को लेकर विवाद था।