बरेली। भुता के गूंगा गांव में दो परिवारों की खूनी रंजिश में किसान लालता प्रसाद की हत्या हो गई, जिसके लिए परिवार वाले पुलिस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। दो महीने पहले भी रविंद्र ने लालता को गोली मारी थी। तब उसकी जान बच गई लेकिन नामजद होने के बावजूद पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया। अब उसने लालता की हत्या कर दी।
लालता प्रसाद से रविंद्र सिंह की 20 साल पुरानी रंजिश है। तब रविंद्र का भाई राकेश कुमार गायब हो गया था। लालता प्रसाद और गांव का ही उसका साथी भूपराम अपहरण के मामले में नामजद होकर 1999 में जेल गए थे, काफी समय बाद जमानत मिली। इसके चलते होली से एक दिन पहले 20 मार्च को दोनों में शराब पीकर कहासुनी हुई। तब रविंद्र ने लालता प्रसाद को गोली मार दी थी। लालता की जान बच गई। तब उसने रविंद्र और भाई राकेश के दो बेटे दीपक व राजपाल को हत्या की कोशिश में नामजद कराया था। भतीजे दीपक और राजपाल अभी भी जेल में हैं लेकिन गांव में मौजूद होने के बावजूद पुलिस रविंद्र को फरार बता रही थी। उसके खिलाफ थाने में कई अन्य मामले भी दर्ज हैं लेकिन पुलिस ने फिर भी उसे गिरफ्तार नहीं किया। पुलिस ने कुछ दिन पहले उसकी हिस्ट्रीशीट खोलने को भी लिखापढ़ी की लेकिन गंभीरता से पैरवी नहीं की, जिससे हिस्ट्रीशीट नहीं खुल सकी।
बदमाशों ने सुमेरी से कहा- तू भाग जा
लालता प्रसाद के परिवार में पिछले दिनों संपत्ति को लेकर भी आपस में मनमुटाव की स्थिति आ चुकी है। इस लिहाज से पुलिस लालता के भाइयों से भी पूछताछ कर रही है। घटना के वक्त हत्यारों ने सुमेरी लाल पर कोई गोली नहीं चलाई। बल्कि सुमेरी से कहा कि तू भाग जा। पुलिस घटना को दूसरे नजरिये से भी देख रही है। मृतक की पत्नी रामवती ने बताया कि पति ने एक माह पहले अपनी बड़ी पुत्री विनीता की शादी के लिए सड़क किनारे की साढे़ आठ बीघा जमीन 16 लाख में बेची थी। उसी सिलसिले में बरेली गए थे। लालता प्रसाद के नाम तीन बीघा जमीन ही बची हैै। लालता प्रसाद दो भाइयों में मंझले थे। उनके दो बेटियां अंजली और विनीता हैं।