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मजिस्ट्रेट जांच में उधड़ेगी अहलादपुर एनकाउंटर की परतें

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बरेली। अहलादपुर में कथित दो बदमाशों की मुठभेड़ में मौत होने के बाद डीएम वीरेंद्र कुमार ने बृहस्पतिवार को मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी कर दिए। अब कई मोर्चों पर घिरी पुलिस के लिए मजिस्ट्रेट जांच भी गले की फांस साबित हो सकती है। अब खुली जांच में एनकाउंटर करने वाले पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज कराए जाएंगे। जिसमें उन्हें तथ्यों की कसौटी पर परखा जाएगा। वहीं संभल में रहने वाले कपिल और अशोक के परिवार के लोगों को भी बयान दर्ज कराने के लिए बरेली बुलाया जाएगा।
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जानकार मानते है कि कई बार मजिस्ट्रेट जांच पुलिस की थ्योरी को ही सपोर्ट करती है। लेकिन दो साल पहले मीरगंज के सैजना में तीन बहन और एक प्रेमी की सनसनीखेज मौत होने के मामले में पुलिस ने सभी के खुदकुशी होने की बात कही थी। जांच में यही बात लिखी गई। परिवार के आरोपों के बाद डीएम ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे। इस मामले में एसडीएम मीरगंज ने पुलिस जांच की थ्योरी को पलटकर हत्या की आशंका जाहिर की थी। वहीं अब मानवाधिकार आयोग से भी जांच शुरू होगी।

अशोक ने भाई से कहा था- बरेली में हूं, परेशानी में हूं
बरेली। कथित मुठभेड़ में मारे गए इंदिरापुरम निवासी अशोक ने आखिरी बार अपने भाई राजकुमार को घटना के दिन सोमवार सुबह साढ़े सात बजे करीब कॉल की थी। उसने कहा था कि मैं बरेली में हूं और परेशानी में हूं। राजकुमार के मुताबिक जब उसने पूछा कि किस तरह की परेशानी तो जवाब मिलने से पहले ही कॉल कट गई। इसके बाद उसने करीब पचासों बार अशोक के नंबर पर कॉल की पर फोन रिसीव नहीं हुआ। बताया कि अशोक के पास मल्टीमीडिया मोबाइल था जिसमें अधिकांश कॉल पर हुई बातों को वह रिकार्ड कर लेता था। ऐसे में अगर कायदे से उसके मोबाइल की कॉल और रिकार्ड की जांच हो जाए तो पुलिस का फंसना तय है। ब्यूरो
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