कत्ल के एक मुल्जिम को वर्ष 1981 में सेशन कोर्ट ने कातिल मानकर उम्रकैद की सजा सुना दी। हाईकोर्ट ने भी उसकी अपील खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा बहाल रखी और सीजेएम को आदेश दिया कि कातिल को कस्टडी में लेकर जेल भेजा जाए। अदालत ने पुलिस को हुक्म दिया कि कातिल को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाए लेकिन 36 साल गुजरने के बाद भी जिले की पुलिस उसे आज तक नहीं ढूंढ पाई है। इधर, मुजरिम के ही एक पोते ने कोर्ट में हलफनामा देकर पुलिस की कारगुजारी की पोल खोल दी है। उसने कोर्ट को बताया सजायाफ्ता मुल्जिम पिछले महीने अपने एक पोते की मंगनी में मेहमानों के साथ मौजूद रहा। इस दावत में पुलिस वाले भी शरीक हुए थे।
थाना मीरगंज में 25 नवंबर, 1979 को मोहम्मद इलियास ने रिपोर्ट लिखाई थी। इसमें कहा गया था कि गांव दियोरिया के रहने वाले जाहिद, वाहिद और होरी ने इलियास के भाई अफसर का कत्ल कर दिया। इलियास ने दौरान मुकदमा अपनी गवाही में कहा कि घटना से कुछ दिन पहले पुलिस ने एनकाउंटर में जाहिद और वाहिद के सगे भाई शाहिद मारा था। दरअसल, अफसर भी शाहिद के साथ डकैती के कई मामलों से संलिप्त रहा था सो इन लोगों को शक था कि अफसर ने ही पुलिस से मिलकर शाहिद का एनकाउंटर कराया है। इसी खुन्नस में इन लोगों ने अफसर की हत्या कर दी। इस मामले में अदालत ने 15 अक्तूबर, 1981 को जाहिद, वाहिद और होरीलाल को अफसर की हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हाईकोर्ट ने भी इनकी सजा को बहाल रखा और सीजेएम को मुल्जिमान को कस्टडी में लेकर जेल भेजने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद 36 साल बाद भी पुलिस अफसर के कातिल जाहिद खां को गिरफ्तार नहीं कर पाई। मुकदमे के वादी इलियास के परिवार के सदस्य राहिद हुसैन ने सीजेएम कोर्ट में अपने वकील काजी जुबैर अहमद के जरिये अर्जी देकर कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद जाहिद ने आज तक न तो खुद कोर्ट में समर्पण किया है और न ही पुलिस उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर सकी है, जबकि वह आजाद घूम रहा है और लोगों को आतंकित कर रहा है। कोर्ट ने इस बारे में थाना पुलिस से पूछा तो उसने कह दिया कि जाहिद 10-11 साल पहले अजमेर चला गया था। उसके बाद से उसका कुछ अतापता नहीं है। इस पर जाहिद के ही रिश्ते के पोते राहिद हुसैन ने कोर्ट में हलफनामा देकर पुलिस की कारगुजारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जाहिद 13 मई को अपने बड़े बेटे ताहिर के पुत्र माहिर की मंगनी की रस्म में मौजूद था। इस दावत में मीरगंज थाने के कुछ पुलिस वाले भी शामिल हुए थे। जाहिद अक्सर अपने घर आता-जाता है। पुलिस को इसकी पूरी जानकारी है। कोर्ट ने इस पर मीरगंज थाना पुलिस से फिर रिपोर्ट मांगी तो पुलिस ने जवाब भेजा कि पूरे गांव में पूछताछ की गई लेकिन किसी को जाहिद के बारे में कुछ नहीं मालूम है। सिर्फ राहिद हुसैन ही ऐसा व्यक्ति है जिसे जाहिद आता-जाता दिखाई देता है। किसी और को दिखाई नहीं देता। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए पांच जून की तारीख तय की है।