बरेली। एक खंभे से चिपकी आड़ी तिरछी तीन लाशें.. पास ही बिलखता इनमें से एक शख्स का बेटा। यह नजारा जिसने देखा, द्रवित हो गया। एक झटके में तीन लोगों की मौत का नजारा देखने वालों का कहना था कि टेलीकॉम कंपनी का ठेकेदार काम जल्दी पूरा कराने को उतावला था। मजदूरों को अहसास था कि ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन उनके लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने ठेकेदार से कई बार पूछा कि हाईटेंशन लाइन पर शटडाउन लिया गया या नहीं, लेकिन ठेकेदार गोलमोल बातें कर उन्हें जल्द काम खत्म करने को कहता रहा। आखिर वही हुआ जिसका मजदूरों को अंदेशा था। है। हाईटेंशन लाइन में खंभा टच होते ही उनकी जान चली गई।
टेलीकॉम कंपनी की ओर से खंभे को शिफ्ट करने के लिए अनुमति ही नहीं ली गई थी। ऐसे में शटडाउन लेने का भी सवाल नहीं था। कॉलोनी के लोगों के मुताबिक यहां करीब एक सप्ताह से काम चल रहा था। यह खंभा पहले लगाया गया था, लेकिन मंगलवार को उसे उखाड़कर करीब एक फुट की दूरी पर बाउंड्रीवॉल से लगाकर दोबारा गाड़ा जाना था। ठेकेदार ने मजदूरों को आश्वस्त किया था कि शट डाउन लिया जा चुका है। खतरे की कोई बात नहीं है। दोपहर करीब ढाई बजे रस्सी से बंधे खंभा को खड़ा करने के दौरान हाईटेंशन के तीन तारों में एक उस तार में उलझ गया जो थोड़ा ढीला था। देखते-देखते हादसा हो गया। इस तार को पुलिस के पहुंचने के बाद खंभे से हटाया जा सका।
फोन करते रहे, लेकिन लाइन बंद नहीं हुई
हादसा होने के आधे घंटे तक लोग बिजली विभाग के सब स्टेशन पर फोन करके यही बताते रह गए कि हादसा हुआ है, लाइन बंद कर दो। बारादरी इंस्पेक्टर कृष्णवीर ने मौके पर पहुंचने के बाद लोगों को पीछे करने के साथ सब स्टेशन पर फोन करके लाइन बंद कराई। लापरवाही का आलम यह रहा कि भीषण हादसे के बावजूद बिजली विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं आया। कुछ लोग पुलिस के आने तक घेरा बनाकर वहां से गुजरने वालों को आगाह करते रहे। लोगों में टेलीकॉम कंपनी के ठेकेदार और बिजली विभाग के लिए गुस्सा नजर आया।
रबड़ के दस्ताने जमीन पर, हेलमेट बैग में
हादसे के बाद जब मजदूरों के बैग जांचे गए तो सेफ्टी अरेंजमेंट उसमें रखे मिले। जमीन पर रबड़ के दस्ताने गिर पड़े थे। हो सकता है कि रस्सी खींचने के दौरान मजदूर ने उन्हें उतारा हो। लेकिन अगर एक भी मजदूर दस्तानों को पहने होता तो शायद जान बच जाती।
खबरदार! बाऊ जी को हाथ मत लगाना, ट्राली में नहीं जाएंगी लाशें
खंभे से चिपकी लाशों को हटाने के लिए पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्राली मंगा ली। ट्राली खुलते ही सुभाष का बेटा लक्ष्मण चिल्लाया..। खबरदार! बाऊ जी को हाथ में मत लगाना। इस ट्राली में उनकी लाश नहीं जाएगी। हम उन्हें घर ले जाएंगे। सीओ थर्ड अशोक कुमार ने उसकी भावनाओं को समझते हुए उसे शांत कराया। एक कांस्टेबल को बुलाकर उसे पानी पिलाने को कहा। बेटे को शांत करने के बाद सिपाहियों ने सभी लाशों को ट्रैक्टर-ट्राली में रखकर पहले जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। अब पोस्टमार्टम के बाद शवों को परिवार के सुपुर्द किया जाएगा। एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत होने की वजह से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है।
इंस्पेक्टर के चीखने पर आगे आए सिपाही
लाशों को उठाने के लिए सिर्फ कुछ सिपाही ही आगे बढ़े थे। जिसपर इंस्पेक्टर कृष्णवीर चीख पड़े। उनके डपटने पर बाकी सिपाही लाश को हाथ लगाने आगे आए थे। झुलसी हुई लाशों को हाथ लगाने से नये सिपाही अभी बचते हैं।
घायलों को अस्पताल भिजवाया
कॉलोनी के लोगों ने घायल मजदूरों सुरेश और हरिओम को अस्पताल पहुंचाने के लिए पहले हाथ बढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक दोनों गंभीर रूप से झुलस गए हैं। उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। उनके परिवारों को पुलिस ने खबर भिजवाई है।
क्रिस्टल कॉलोनी के घरों के अंदर बिजली के खंभे
शिव मंदिर की बाउंड्रीवॉल के पास खंभा लगाते हुए हादसा होने के बाद जब क्रिस्टल कॉलोनी का जायजा लिया गया तो सामने आया कि अधिकांश घरों के अंदर ही बिजली के खंभे हैं। घटनास्थल के ठीक सामने के सीमा देवी के मकान के कोने में लगा खंभा को घेरकर निर्माण कराया जा चुका है। वहीं बाकी घरों के कंपाउंड में बिजली के खंभे लगे हुए हैं। जिसपर से बिजली की तारें गुजर रही है। यह बिजली की लाइन नहीं बल्कि खतरे का संकेत हैं। मकानों के अतिक्रमण ने उनके अपनों को ही खतरे में डाल दिया है। यहां कभी भी हादसा हो सकता है।