बरेली। आम तौर पर मुंशी प्रेमचंद की कहानियां समाज की कुरीतियों और समस्याओं को उजागर करने वाली होती है। इन कालजयी कहानियों का कथानक इतना रोचक, घटना प्रधान एवं नाटकीय संभावनाओं से भरपूर होता है कि यह दर्शकों को बड़ी सहजता से बांध लेती है। ऐसी ही कहानियों में मंदिर भी है। जो नाटक के रूप में यहां अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में देखने को मिली।
सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी की ओर से मंचित किए गए इस नाटक के कहानी के सार पर जाएं तो गरीब विधवा सुखिया अपने बीमार बच्चे की जीवन की प्रार्थना करने के लिए मंदिर जाना चाहती है। ऊंच नीच के भेदभाव के कारण पुजारी और भक्तगण उसे मंदिर में जाने नहीं देते। लाख मिन्नतों की जद्दोजहद में उसका बच्चा मर जाता है। आज भी सारे देश की यही कहानी है। यह नाटक केके अग्रवाल के निर्देशन में मंचित किया गया। मुख्य पात्र सुखिया की भूमिका निभाते हुए सीमा मोदी ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का दिल छू लिया। सुखिया के पति की भूमिका में उत्कर्ष, जियावन की भूमिका में अरुण उपाध्याय और पुराजारी की भूमिका में शुभम शुक्ला ने सराहनी अभिनय किया। इसमें सह निदेशन भी सीमा मोदी का रहा। दूसरा नाटक चेतना सांस्कृतिक एवं जनकल्याण समिति भोपाल की ओर से ‘डेथ ऑफ द सेल्समैन’ नाटक जारी रहा।
यह महोत्सव संजय कम्युनिटी हाल में कल्चरल एसोशिएशन एवं नगर निगम की ओर से चल रहा है। इसमें नाटक सत्र के मुख्य अतिथि एडीजी प्रेम प्रकाश रहे। अध्यक्षता संस्थाध्यक्ष जेसी पालीवाल ने की। इस मौके पर डीजीपी (टेक्नीकल) महेंद्र सिंह मोदी, धर्म पत्नी सीमा मोदी, एसपी सिटी अभिनंदन सिंह, एडीएम (इ) राम सेवक द्विवेदी का शिटिल गुप्ता, अजय राज शर्मा और जेसी पालीवाल ने शाल उढ़ा कर सम्मान किया।