बरेली। आला हजरत खानदान से जुड़े उस्मान रजा खान के डीजीपी को ट्वीट के बाद भमोरा पुलिस के खिलाफ सीओ आंवला को जांच सौंपी गई है। उस्मान रजा ने शिकायत की थी कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उर्स के कुल में अजमेर शरीफ जाते वक्त भमोरा पुलिस ने उन्हें और उनके परिवार के लोगों को रोककर चेकिंग के नाम पर बदसलूकी की।
आला हजरत के नवासे उस्मान रजा खान ने बताया कि वह परिवार के 15 लोगों के साथ 12 मार्च की रात करीब एक बजे अजमेर के लिए इनोवा और स्कार्पियो समेत दो गाड़ियों से निकले थे। भमोरा थाने एक दरोगा और चार सिपाहियों ने बदायूं सीमा पर उनकी गाड़ियां रोक लीं। चुनाव आचार संहिता का हवाला देते हुए महिलाओं-बच्चों को नीचे उतार दिया और गाड़ियों की तलाशी लेने लगे। उन लोगों पर करीब डेढ़ लाख रुपये निकले तो पुलिस वालों ने 50 हजार से ज्यादा कैश ले जाने पर पाबंदी की बात कहते हुए कार्रवाई की धमकी देनी शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि यह नियम तो एक व्यक्ति पर लागू होता है, वे तो 15 लोग हैं, लेकिन पुलिस वाले उनकी बात नजरंदाज कर उनका लगेज खोलकर देखने लगे। आरोप है कि काफी हीलाहुज्जत के बाद पुलिस वालों ने दोनों ड्राइवरों से पांच-पांच सौ रुपये की वसूली के बाद उन्हें जाने दिया। उस्मान रजा का कहना था कि अजमेर तक कहीं और उनकी चेकिंग नहीं की गई, लेकिन भमोरा पुलिस के सलूक से उनका पूरा परिवार व्यथित है। उन्होंने सीएम ऑफिस और डीजीपी को ट्वीट किया था। उधर, इंस्पेक्टर भमोरा विजय प्रताप सिंह ने बताया कि उन्हें ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है, न उनसे कोई शिकायत की गई है। अगर उनसे शिकायत की गई तो वह खुद जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करेंगे।
ट्विटर पर शिकायत के बाद जांच सीओ आंवला को सौंपी गई है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे कार्रवाई की जाएगी। - मुनिराज जी. एसएसपी