बरेली। फरीदपुर के नगरिया विक्रम गांव में दीवार गिराते वक्त हुए धमाके से हुई आवाज इतनी तेज थी कि एक किमी दूर खेतों में काम कर रहे लोग अनहोनी के घर से बस्ती की ओर दौड़ पड़े। आसपास घरों की दीवारें दहल गईं तो मौके पर दिवारीलाल की खून से लथपथ दराती और कटी अंगुलियां विस्फोट की भयावहता को दर्शा रही थीं।
दिवारीलाल और उनके परिजन तीन दिन से दीवार गिरा रहे थे। बारह फुट की दीवार का केवल तीन फुट ऊंचा हिस्सा ही ढहाने से बचा था। करीब दो फुट चौड़ी दीवार में किसने और कब बम रख दिया? कोई समझ नहीं पा रहा था। बम किस तरह के और कितने बारूद से बना था? ये पुलिस और फील्ड यूनिट तय नहीं कर सकी। टीम ने मौके की मिट्टी और खून का सैंपल जांच को लिया तो खून सनी दराती भी सील की गई जिस पर लगा सफेद रंग का पदार्थ विस्फोटक लग रहा था। उपचार कर रहे डॉ. विनोद राठौर ने भी दिवारीलाल की हालत बेहद गंभीर मानी। बताया कि हथेली गायब है, उसकी ड्रेसिंग करके बाकी हाथ बचाने की कोशिश कर रहे हैं। बारूद के साथ ही कांच के टुकड़े भी शरीर में कई जगह अंदर तक घुस गए हैं। एक फेफड़ा भी डैमेज हुआ है। तीन डॉक्टर लगातार स्थिति पर नजर रखे हैं।
फरीदपुर थाने में फटा था कॉलेज में मिला बम
फरीदपुर। हालिया घटना से लगता है कि फरीदपुर में देसी बम बनाने और उसे यहां वहां छुपाने का धंधा जोरों पर चलता है। दो साल पहले फरीदपुर के सीएस इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के कमरे में सेफ के ऊपर एक थैले में करीब आठ बम मिले थे। पुलिस ने बम लाकर कोतवाली में बाल्टी में पानी डालकर रख दिए थे। बम निरोधक दस्ते के लोग जब पानी से निकालकर बमों को चेक कर रहे थे तो इनमें से एक बम हाथ में ही फट गया। इससे दस्ते के एक कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए। तब हड़कंप मच गया था। दस्ते के कुछ लोगों पर विभाग ने कार्रवाई भी की थी।
नामजद रिपोर्ट लिखाकर पुलिस ने झाड़ा पल्ला
फरीदपुर। दिवारीलाल के नाना रामेश्वर की ओर से शक के आधार पर चचेरे भाई सुखपाल पर रिपोर्ट कराकर पुलिस अपनी इस जिम्मेदारी से बच गई कि बस्ती के बीच इसका शक्तिशाली बम आखिर आया कहां से? शाम को रिपोर्ट के बारे में जानकारी होने पर पूरे परिवार ने अचरज जताया। दूसरे चाचा के बेटे नीरज का कहना था कि पूरा परिवार एक है और इन्हें फिर गांव में बसाना चाहता है। सुखलाल ने तो दिवारी के माता-पिता के इलाज में काफी मदद की। जमीन व मकान के हिस्से से भी उसका कोई मतलब नहीं था। सुखपाल अपने परिवार से अलग है और उसके पिता रामचंद्र जरूर ठेके पर दिवारी का ढाई बीघा खेत करते हैं। मकान की खाली जगह में इनकी इच्छा से ही पंपसेट खड़ा करते थे। दिवारी होश में आएगा तो खुद रिपोर्ट पर खुद हैरान होगा।