खमरिया (लखीमपुर खीरी)।
सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज खमरिया की कक्षा 12 के छात्र गांव लाखुन निवासी 17 वर्षीय कपिल जायसवाल का शव कस्बा स्थित कुमारी चंद्रकांता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के कमरे में लटकता मिला। वह इसी कमरे में रहकर पढ़ाई करता था। परिवार वालों और कॉलेज प्रशासन का कहना है कि छात्र सिरदर्द की पीड़ा से परेशान रहता था। दर्द से परेशान होकर ही छात्र ने आत्महत्या कर ली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह हैंगिंग बताई गई है।
श्रीमती चंद्रप्रभा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज खमरिया के प्रबंधक स्वामी प्रेमकांत का सिर्फ छात्राओं के लिए पास ही चंद्रकांता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय है। उन्होंने इंटर कॉलेज के दूर दराज के छात्र और आचार्यों को रहने के लिए चंद्रकांता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, परेवा में कुछ कमरे दे रखे हैं।
प्रबंधक ने बताया कि कॉलेज की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले दूरदराज गांवों के करीब 30 छात्र हैं। बोर्ड की तैयारियों को लेकर यह सभी छात्र परेवा में पढ़ने के लिए आचार्यों के साथ रुकते हैं। इनके सोने के लिए उन्होंने तख्त डलवा रखे हैं। खाने की व्यवस्था कमरे में वह स्वयं करते हैं। इसी व्यवस्था का हिस्सा कक्षा 12 का छात्र कपिल जायसवाल भी था।
बताया कि कपिल जायसवाल सिरदर्द की पीड़ा से परेशान रहता था। उसका इलाज लखनऊ के आइकॉन हॉस्पिटल के डॉ. डीके वात्सल्य से चल रहा था। दर्द से परेशान होकर कई बार वह अपने साथियों से आत्महत्या कर लेने की बात भी कह चुका था, जिस पर उसे काफी समझाया भी गया।
बृहस्पतिवार को कपिल अपने पिता के श्राद्ध में शामिल होने घर गया था। शाम को लौटा और रात में अपने कमरे को अंदर से बंद करके प्लॉस्टिक की रस्सी का फंदा बनाकर खुदकुशी कर ली। छात्रों के साथ रुके आचार्य अतुल ने बताया रात करीब 11 बजे तक पढ़ाने के बाद सभी छात्रों के साथ वह नीचे सोने के लिए उतर आए थे। सुबह कपिल को न देखकर उसे जगाने के लिए ढूंढने लगे। एक कमरे को अंदर से बंद देख खिड़कियों से झांककर देखा तो कपिल का शव छत के कुंडे से रस्सी के सहारे लटक रहा था।
आचार्य ने इसकी सूचना विद्यालय के प्रबंधक स्वामी प्रेमकांत एवं प्रधानाचार्य शैलेंद्र श्रीवास्तव को दी। प्रबंधक की सूचना पर एसओ ईसानगर प्रमोद कुमार मिश्रा चौकी प्रभारी खमरिया फूलचंद मौके पर पहुंचे। उधर, मृतक छात्र के बड़े भाई सुशील कुमार ने बताया कि भाई ने शायद सिर दर्द से उठने वाली असहनीय पीड़ा से परेशान होकर आत्महत्या कर ली।