कार लूटने वाले सगीर गैंग के पकड़े गए तीन बदमाशों में से एक संभल का सभासद निकला। यह सभासद लूटी गई कार का नंबर मिनटों में बदल देता था, जबकि दूसरा बदमाश फर्जी कागज बनाने का काम करता था। इनका आरटीओ आफिस का एक बाबू साथ देता था। पकड़े गए बदमाशों से पुलिस ने एक स्विफ्ट डिजायर और एक स्कार्पियो कार बरामद की है।
इज्जतनगर क्षेत्र से पिछले दिनों एक के बाद एक दो कार फीनिक्स मॉल के सामने से लूटी गईं। एक सीबीगंज से लूटी गई। इनकी अभी बरामदगी नहीं हो सकी है। एसएसपी ने क्रेटा कार बरामदगी को इज्जतनगर पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच को भी लगाया था। छानबीन करते हुए पुलिस टीम ने बृहस्पतिवार को संभल के सगीर गैंग के हसीब पुत्र रफीक कुरैशी निवासी मोहल्ला मिया सराय, असगर अली पुत्र अफसर अली निवासी मोहल्ला चौधरी सराय (संभल) और सिराज उर्फ शाहरुख पुत्र रियासत अली निवासी रहमत नगर गली नंबर पांच कटघर (मुरादाबाद) को गिरफ्तार कर शुक्रवार को जेल भेज दिया।
शुक्रवार दोपहर ढाई बजे पुलिस लाइंस स्थित सभागार कक्ष में प्रेसवार्ता करते हुए एसपी क्राइम रमेश कुमार भारतीय ने बताया कि हसीब सभासद है और चोरी व लूट की गाड़ियों का नंबर बदलने का काम करता था। जबकि सिराज उर्फ सागर गाड़ियों के फर्जी कागज बनाता था। एसपी क्राइम ने बताया कि बदमाशों के पास से एक स्विफ्ट डिजायर और एक स्कार्पियो कार के अलावा क्रेटा कार की एक फर्जी आरसी रजिस्ट्रेशन नंबर यूपी 23-यू-7565 बरामद की गई है। स्कार्पियो 27 फरवरी को अलीगढ़ से चोरी की गई थी। एसपी क्राइम ने बताया कि भले ही क्रेटा कार बरामद नहीं हुई है, लेकिन गैंग ट्रेस हो गया है और उसके बदमाशाें की तलाश की जा रही है। प्रेसवार्ता के दौरान सीओ तृतीय नीति द्विवेदी और क्राइम ब्रांच प्रभारी कमरुल हसन आदि मौजूद रहे।
आरटीओ आफिस का बाबू पांच हजार रुपये में दे देता था कागज
एसपी क्राइम ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे चोरी और लूट के वाहनों की फर्जी आरसी, बीमा बनाते थे। उनके संबंध आरटीओ आफिस के बाबू शर्मा जी से थे। सगीर जिस कंपनी की गाड़ी के फर्जी कागज बनाने के लिए उनसे कहता था, वह लोग उससे 40 हजार रुपये प्रति गाड़ी के हिसाब से लेकर आरटीओ आफिस के बाबू शर्मा जी को पांच हजार रुपये देते थे। वह उसी कंपनी की गाड़ी की फाइल निकलवा कर आरसी वाला असली फोटो व कागज प्राप्त करता था। इसके बाद उसी रजिस्ट्रेशन नंबर पर चोरी की गाड़ी अंकित कर फर्जी आरसी तैयार की जाती थी। इंजन और चेचिस नंबर की आरसी से पहचान से बचने के लिए यह नंबर मिटा देते थे।