न्यूरिया (पीलीभीत)। मझोला में पकड़े गए बंदरों के साथ क्रूरता के मामले में शुरुआत से बचते आ रहे वन विभाग के अधिकारियों को आखिरकार कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा। वन रक्षक की ओर से मामले की तहरीर न्यूरिया थाने में दी गई। पुलिस ने इस पर बंदर पकड़ने को बुलाए गए दो व्यक्तियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। इसमें एक को नामजद किया है। हालांकि इस पूरे मामले में जिम्मेदार वनकर्मियों ने आरोपियों को बचाने का काम किया है।
मझोला में बंदरों को पकड़ने की अनुमति बीते माह दी गई थी। इसके बाद 25 नवंबर को बिना एक्सपर्ट बुलाए ही 20 बंदरों को पकड़कर क्रूरतापूर्वक दो बोरों में बंद कर 50 किमी दूर घुंघचाई क्षेत्र की खन्नौत नदी के समीप ले जाकर छोड़ दिया गया था। बंदरों को क्रूरतापूर्वक बोरों में बंद करने का मामले में सुल्तानपुर की सांसद एवं वन्यजीव प्रेमी मेनका गांधी के नाराजगी जताने और डीएम वैभव श्रीवास्तव से वार्ता के बाद कार्रवाई तय मानी जा रही थी। डीएम ने रेंजर सतेंद्र सिंह का स्पष्टीकरण तलब कर वन विभाग के अधिकारियों को प्रकरण में जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पीसीसीएफ प्राजेक्ट टाइगर पवन कुमार शर्मा ने भी शुक्रवार को मामले में वन एवं वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ संजीव कुमार समेत अन्य से जानकारी की थी। शनिवार रात को मामले में न्यूरिया में एफआईआर हुई है। इंस्पेक्टर बिरजाराम ने बताया कि सामाजिक वानिकी के वनरक्षक शीलेंद्र कुमार की ओर से पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर की गई है। इसमें बंदर पकड़ने वाले भिकारीपुर गांव निवासी मोहम्मद कय्यूम उर्फ भूरा खां व एक अज्ञात को आरोपी बनाया है।