बीसलपुर (पीलीभीत)। अंधविश्वास और तंत्र मंत्र के चक्कर में एक मासूम की जान चली गई। खजाने के लालच में गांव के कुछ लोगों पर तंत्र विद्या के चक्कर में पड़कर चार साल के मासूम की बलि देने का आरोप है। इसमें सबसे शर्मनाक भूमिका पुलिस और कोतवाली इंस्पेक्टर की रही। कोतवाली इंस्पेक्टर लगातार बच्चे की मौत को तालाब से डूबना दर्शाकर पूरा एक सप्ताह तक मामला दबाते रहे। जब यह घटना दबाए नहीं दबी तो नौवें दिन पुलिस ने पिता की तहरीर पर बमुश्किल हत्या की रिपोर्ट दर्ज की।
अब तक की जांच में पिता की ओर से बलि देने की कही गई बात सही निकल रही है। फिलहाल सात संदिग्धों को हिरासत में लेकर पुलिस की टीमें पूछताछ कर रही हैं। कितने लोग इस पूरे घटनाक्रम में शामिल हैं? किस तरह से बच्चे की मौत को अंजाम दिया गया? इन सभी बिंदुओं को बारीकी से स्पष्ट करने में अफसर टीम के साथ लगे हैं। एसपी ने कोतवाली इंस्पेक्टर से लापरवाही पर अभी सिर्फ जवाब तलब किया है।
कोतवाली क्षेत्र के गांव पुरैनिया रामगुलाम निवासी प्रेमशंकर का चार वर्षीय पुत्र अरुण 18 नवंबर की रात संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। 19 नवंबर की अगले दिन सुबह उसका शव गांव के बाहर एक तालाब किनारे पड़ा मिला। बच्चे के परिवार वाले शुरुआत से ही हत्या की आशंका जता रहे थे। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। कोतवाल मनीराम ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद भी मीडिया और अधिकारियों को अरुण की मौत डूबने से बताकर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की बल्कि वह पूरे मामले को दबा गए। परिजन लगातार अरुण की हत्या का अंदेशा जताते रहे। एसपी अभिषेक दीक्षित, एएसपी रोहित मिश्र, सीओ प्रवीण मलिक ने जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट को बारीकी से पढ़ा। उसमें मामला साफ तौर पर हत्या की ओर इशारा करता हुआ निकला। अरुण के शरीर पर चोट के आठ निशान पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आए थे। कान के पास भी चोट निकली थी, जबकि कोतवाल चोट आने की बात नहीं बता रहे थे। पिता ने अपने स्तर से सुरागरसी की और फिर सोमवार को एक तहरीर पुलिस को दी। इसमें बेटे की खजाने के लालच में बलि देने का आरोप लगाया। उन्होंने तहरीर में गांव के सुधीर कुमार को नामजद किया। बताया कि सुधीर ने अपने खेत में खजाना होने के शक में तंत्र-विद्या करने वालों संग मिलकर अरुण की तालाब में डुबाकर हत्या कर दी। तहरीर पर पुलिस ने मंगलवार को इसकी रिपोर्ट दर्ज की। छानबीन शुरू की गई तो एक-एक कर सात संदिग्ध पकड़े गए। उनसे अब तक हुई पूछताछ के बाद लगाए गए आरोप सही निकल रहे हैं। वहीं पुलिस को शक है कि मासूम हत्या में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। इससे पूर्व भी तो कोई ऐसी वारदात नहीं की गई, जो सामने न आई हो, इसका भी गहनता से पता लगाया जा रहा है। सीओ प्रवीण मलिक की अगुवाई में टीमें हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रही हैं।
कोतवाल का जवाब तलब, सीओ से मांगी रिपोर्ट
कोतवाल बीसलपुर मनीराम सिंह की पूरे मामले में बड़ी लापरवाही सामने आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ है कि मासूम अरुण की हत्या हुई। इसके बावजूद वह तालाब में डूबकर मरने का साधारण हादसा अधिकारियों को बताते रहे। शरीर पर आई चोटों के बारे में उच्चाधिकारियों को जानकारी नहीं दी। परिजन की ओर से कार्रवाई की मांग बढ़ने पर जब अफसरों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखी तो पूरा मामला उजागर हुआ। इंस्पेक्टर की ये लापरवाही मासूम की हत्या करने वालों को एक तरह से अभयदान दे चुकी थी। ऐसे में लापरवाही पर कोतवाल की मुश्किल बढ़ सकती हैं। एसपी ने कोतवाल का जवाब तलब किया है। पूरे मामले की रिपोर्ट सीओ बीसलपुर से तलब की है।
बेहद नृशंस तरीके से दी गई मासूम की बलि
पुलिस की चल रही छानबीन में एक बात साफ हो गई है कि मासूम अरुण की हत्या बेहद नृशंस तरीके से की गयी। उसके दोनों पैर के पंजों में सूजा भोंका गया था। उसकी आंख और कान के पास भी सूजे से वार हुए थे। सुई भी चुभोई गई।
एक सपने से शुरू हुई पूरी कहानी, आज कर सकती है खुलासा
बताते है कि अरुण की हत्या की कहानी एक सपने से शुरू हुई। चर्चा के मुताबिक नामजद आरोपी को कुछ दिन पहले एक सपना आया कि उसके खेत में खजाना गड़ा हुआ है। इसके बाद वह उसको सच मानकर तंत्र विद्या के चक्कर मे पड़ गया। तंत्र विद्या करने वालों ने कहा दिया कि एक बच्चे की बलि देनी होगी, इसके बाद ही मासूम उनका निशाना बना गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की तह तक पहुंच गई है। आज बुधवार को खुलासा हो सकता है।
एक परिवार के पांच लोगों की दूध में जहर देकर कर दी थी हत्या
पीलीभीत। तंत्र विद्या के नाम पर पहले भी बेगुनाहों की जान ली जा चुकी है। दोस्त के घर रखी नकदी को लूटने के लिए बरेली के एक युवक ने अपने भतीजों के साथ मिलकर पूजापाठ के बहाने सामूहिक हत्याकांड को अंजाम दिया था। इसमें एक ही परिवार के पांच लोगों की जान चली गई थी।
घटना जहानाबाद थाना क्षेत्र के बेनीपुर गांव में इसी वर्ष आठ जनवरी को हुई थी। गांव निवासी रेलवे गेटमैन नेमचंद, उसके पिता वेगराज, मां रामवती, पत्नी मुल्लोदेवी और बहन गायत्री की दूध में जहर देकर हत्या कर दी गई थी। नौ जनवरी की सुबह सभी के शव मिलने पर हड़कंप मच गया था। सामूहिक हत्याकांड की गूंज शासन तक रही। सुरागरसी के बाद पुलिस ने इसका खुलासा किया तो पांचों की हत्या के पीछे नेमचंद का दोस्त बरेली निवासी गुलशेर मास्टरमाइंड निकला था। उसके दो भतीजे भी घटना में शामिल रहे थे। बरेली जोन के तत्कालीन एडीजी प्रेमप्रकाश ने प्रेसवार्ता कर पुलिस ने बताया था कि नेमचंद के घर रखी लाखों की नकदी लूटने के लिए उसने तंत्र-मंत्र का झांसा देकर पहले आठ जनवरी की रात पूजा पाठ की थी। नेमचंद ने अपने दुश्मनों को सबक सिखाने के लिए यह पूजा पाठ कराई। गुलशेर ने झांसा दिया था कि इस पूजापाठ के बाद उनके विरोधियों का बुुुरा हो जाएगा। पूजापाठ के बाद जहर मिला दूध सबको पिला दिया गया था।
तीनों आरोपियों को जेल भेजने के बाद पुलिस विवेचना पूरी कर चार्जशीट लगा चुकी है। इसके अलावा करीब सात साल पहले सुनगढ़ी क्षेत्र के एक गांव में मासूम की बलि देने की घटना सामने आई थी। तंत्र-विद्या के नाम पर राह चलती महिलाओं के जेवरात उड़ाने के भी कई मामले सामने आ चुके हैं। इसके तंत्र विद्या के जरिए जमीन में दबा खजाना दिलाने का झांसा देकर कई परिवारों से ठगी भी हो चुकी है।
अब तक की जांच में मासूम की बलि देने की बात निकलकर आ रही है। संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। कितने लोग वारदात में शामिल रहे और पहले भी ऐसी घटना तो नहीं की, इसकी भी पड़ताल कर रहे हैं। लापरवाही पर कोतवाल से जवाब तलब किया है। - अभिषेक दीक्षित, एसपी