बरेली। युवाओं की नसों में जहर घोल रहे हुक्का बार को लेकर डीआईजी सख्त हो गए हैं। व्यापारियों की ओर से की गई शिकायत के बाद डीआईजी ने एसएसपी को इस बारे में स्पष्ट निर्देश दिए कि शहर में किसी हालत में हुक्का बार नहीं चलने चाहिए। पदाधिकारियों से कहा कि वह गुरुवार सुबह एसएसपी को ऐसे स्थानों की लिस्ट सौंप दें जहां हुक्का बार चलने का संदेह है।
पश्चिमी उप्र उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष व यूथ पॉवर संगठन के संयोजक रामकृष्ण शुक्ला के साथ कई व्यापारी बुधवार दोपहर डीआईजी राजेश कुमार पांडेय से मिले। उन्हें बताया कि शहर में कई स्थानों पर अवैध तरीके से हुक्का बार संचालित किए जा रहे हैं। इसके लिए पहले उनके आदेश पर कार्रवाई भी की गई, बावजूद संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लग सका है। डीआईजी से इस अवैध धंधे पर पूरी तरह लगाम लगाने की मांग की गई।
डीआईजी ने मौके से ही एसएसपी को कॉल करके हुक्का बार के धंधे पर पूरी तरह लगाम लगाने के निर्देश दिए। कहा कि इसके लिए थानेदारों की जवाबदेही तय करें कि उनके इलाके में कहीं हुक्का बार तो नहीं चल रहा है। एक थाने की पुलिस को दूसरे थाने के क्षेत्र में भेजकर चेकिंग कराएं। अगर हुक्का बार संचालित होते मिले तो उनके खिलाफ कार्रवाई करें। इसमें किसी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। संबंधित विभागों का सहयोग लें, वर्ना पुलिस अपने स्तर से ही हरसंभव कार्रवाई करे। बताया कि पुलिस अपनी ओर से होटल व रेस्टोरेंट चिह्नित कर कार्रवाई करे। व्यापारियों व अन्य समाजसेवी संगठन की ओर से नाम पते और सूचना दी जाए तो उस पर भी काम करें।
हुक्का बार के विरोध पर व्यापारी नेता को धमकाया
हुक्का बार के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले व्यापारी नेता यूथ पावर के संयोजक रामकृष्ण शुक्ला को मंगलवार रात बाइक सवार दो लड़कों ने जान से मारने की धमकी दी। अज्ञात युवकों के खिलाफ उन्होंने डीआईजी से शिकायत की। डीआईजी ने एसएसपी को जांच के आदेश दिए हैं।
शुक्ला ने डीआईजी को बताया कि रात नौ बजे वे कार से अपने घर जा रहे थे। संजयनगर मेन रोड से अपने घर के मोड़ पर पीछे से एक बाइक पर दो लड़के आए और रुकने का इशारा किया। उन्होंने कार रोककर शीशा नीचे किया तो बाइक से उतरकर आए एक लड़के ने कहा कि हुक्का बार ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है। एक मिनट में जान से हाथ धो बैठोगे। पहले वे माजरा समझ नहीं पाए, बाद में उसको पकड़ने के लिए कार से उतरे तो वह साथी के संग बाइक पर बैठकर भाग गया। वे जल्दबाजी में बाइक का नंबर भी नहीं देख सके। डीआईजी से मांग की कि वह जनहित का काम कर रहे हैं, धमकाने वालों का पता लगाकर उन पर कार्रवाई की जाए।