बरेली। डिलीवरी के लिए भर्ती कराई गई महिला की ऑपरेशन के दौरान मौत होने के बाद तीमारदारों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। शव ले जाते वक्त तीमारदारों ने सड़क पर पड़े पत्थर फेंककर अस्पताल में तोड़फोड़ कर दी। स्टाफ ने विरोध किया तो उनसे भी मारपीट हुई। मौके पर पहुंची पुलिस ने तीमारदारों ने लाठी फटकार कर खदेड़ा। बच्चे को एक अन्य निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। तीमारदारों की शिकायत पर डॉक्टर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
सुभाषनगर की बग्गा कालोनी निवासी फतेह बहादुर टेलर हैं। उन्होंने अपने पत्नी 22 वर्षीय फूलवती को शुक्रवार शाम डिलीवरी के लिए बदायूं रोड स्थित स्वास्ति अस्पताल में भर्ती कराया था। फतेह बहादुर ने बताया कि डॉ. प्रीति वैश्य ने शनिवार को ऑपरेशन की बात कहकर पत्नी को भर्ती कर लिया। उनके मुताबिक शनिवार शाम फूलवती का ऑपरेशन किया गया। डिलीवरी के कुछ देर बाद महिला की मौत हो गई थी। सूचना मिलते ही परिजन अस्पताल में हंगामा करने लगे। स्टाफ ने तुरंत इसकी सूचना पर पुलिस को दी। तीमारदारों में शामिल एक महिला लापरवाही का आरोप लगाते हुए सड़क से पत्थर उठाकर अस्पताल की विंडो में दे मारा। शीशा टूटने के बाद अस्पताल में तोड़फोड़ शुरू हो गई। स्टाफ भी अपनी जान बचाकर भागने लगा। मौके पर पहुंची पुलिस ने तीमारदारों को समझाकर शांत किया। न माने तो लाठियां फटकारकर हुड़दंगियों को खदेड़ा। पुलिस की निगरानी में नवजात को स्टेशन रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया और महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। फतेह बहादुर ने डॉ. प्रीति वैश्य, डॉ. अजय वैश्य व अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सुभाष नगर थाने में रिपोर्ट कराई है।
डॉक्टर ने मारपीट और तोड़फोड़ के आरोप लगाए
- डॉ. प्रीति वैश्य ने भी सुभाषनगर थाने में मृतक महिला के पति व तीमारदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि सबकुछ ठीक था। अचानक महिला को हार्टअटैक जैसी स्थिति से मौत हो गई। इसके बाद तीमारदारों ने उनके अस्पताल में तोड़फोड़ की। विरोध करने पर स्टाफ से भी मारपीट की। उन्होंने अपने ऊपर लगे लापरवाही के भी आरोपों को गलत बताया।
इसी अस्पताल में बच्चे की मौत के बाद तीमारदारों ने किया हंगामा
बरेली। स्वास्ति अस्पताल में जब डिलीवरी के दौरान महिला की मौत पर हंगामा चल रहा था, तभी यहां भर्ती एक अन्य परिवार भी हंगामा करने लगा। परिवार के मुताबिक दो दिन पहले हुई डिलीवरी के बाद बच्चे की इलाज के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से मौत हो गई। परिवार की शिकायत पर सुभाषनगर थाने में इनकी भी रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
सुभाषनगर के गांव रौंधी मिलक निवासी विष्णू कुमार अपनी गर्भवती पत्नी ऊषा देवी को बृहस्पतिवार को स्वास्ति अस्पताल में भर्ती कराया था। उनके मुताबिक अल्ट्रासाउंड के बाद डॉ. प्रीति वैश्य ने पत्नी के पेट में पल रहे बच्चे को मृत घोषित कर दिया था। तीमारदारों के मुताबिक बृहस्पतिवार को ही हुए ऑपरेशन में बच्चा जिंदा पैदा हुआ। दो दिन इलाज के बाद डॉक्टरों की लापरवाही के कारण शनिवार शाम बच्चे की मौत हो गई। हालांकि डॉ. प्रीति वैश्य ने बताया कि डिलीवरी प्रीमेच्योर हुई थी। परिवार को सात माह गर्भ के बच्चे की हालत के बारे में बता दिया गया था। उन्हें बच्चे को कहीं और दिखाने को भी कहा गया था। परिवार बच्चे को वहीं रखे रहा। इलाज न मिल पाने के कारण उसकी मौत हो गई।