वीरेंद्र ने उसे समझाया था कि उसे मिलिट्री हॉस्पिटल से सिर्फ एक घंटे में छुट्टी मिल जाएगी और उसकी इस मदद से खराब कान की वजह से भर्ती नहीं हो पा रहे मोनू का भला हो जाएगा।
शैलेंद्र ने पुलिस को बताया कि वीरेंद्र से उसकी काफी समय पहले जयपुर के बाइस गोदाम इलाके में उसके दोस्त बबलू के साथ मुलाकात हुई थी। इसके बाद उसकी वीरेंद्र से दोस्ती हो गई। उसके प्रेम संबंधों के बारे में भी वीरेंद्र को पता था। शैलेंद्र के मुताबिक फरवरी में उसके ताऊ की बेटी की शादी है। पांच फरवरी को वह शादी में शामिल होने के लिए धौलपुर जा रहा था। अचानक वीरेंद्र ने उसे फोन करके बरेली घूमने के बहाने बुला लिया। यहां वह उसे लाल फाटक पर मिला और उसकी मुलाकात मोनू से कराई। प्रेमिका को मोबाइल फोन देने के लिए पैसों का इंतजाम करने की चिंता उसे पहले से थी। वीरेंद्र ने उसे पैसों का लालच दिया तो वह झांसे में आ गया। मेडिकल के लिए जाते वक्त वीरेंद्र ने उसकी जेब में पांच हजार रुपये डाल दिए। पुलिस के मुताबिक सेना भर्ती की दलाली में पहले भी वीरेंद्र गंगवार का नाम सामने आ चुका है। उसके बारे में छानबीन कराई जा रही है।
भाई आया तो असली पता मिला
सेना के हाथ लगने के बाद भी शैलेंद्र परिहार अपना असली पता बताने के बजाय पुलिस को गुमराह करता रहा। सबसे पहले उसे खुद को शाहगंज आगरा का रहने वाला बताया। पुलिस ने जरा सख्ती की तो कहने लगा कि वह धौलपुर (राजस्थान) का कुमार पाल गौतम है। इसके बाद वह खुद को राकेश कुमार यादव बताने लगा। शैलेंद्र दो फरवरी को बरेली आया था। इसी बीच सूचना मिलने पर उसका बड़ा भाई थाने पहुंचा तो उसने उसका असली पता पुलिस को बताया।