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बर्खास्तगी के पांच दिन बाद पुलिस लाइन में तैनात लिपिक ने की आत्महत्या

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जिला अस्पताल में विजय कुमार को लेकर पहुंची पुलिस। - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। पुलिस लाइन कार्यालय में डिस्पैच लिपिक के पद से पांच दिन पहले बर्खास्त हुए विजय कुमार मिश्र (59) ने सरकारी क्वार्टर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उनके पास से मिले सुसाइड नोट में सहकर्मी एकाउंटेंट पर अधिकारियों को गुमराह कर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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हरदोई के थाना माधवपुर निवासी विजय दो साल पहले प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित होकर बदायूं से यहां आए थे। पुलिस के मुताबिक विजय यहां 263 दिन ड्यूटी से गैरहाजिर रहे, 30 अन्य शिकायतें भी थीं। इसमें अर्थदंड भी शामिल है। इन्हीं कारणों से उन्हें 13 अक्तूबर को बर्खास्त कर दिया गया। विजय अकेले ही आवास में रहते थे। मंगलवार को काफी देर तक आवास से नहीं निकले तो आसपास रहने वाले कर्मचारियों ने खिड़की से झांककर देखा। अंदर विजय का शव फंदे से लटका हुआ था। कर्मचारियों ने किसी तरह से उनको फंदे से उतारा। जिला अस्पताल में डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एसपी दिनेश कुमार पी ने बताया कि एकाउंटेंट पर सुसाइड नोट में आरोप लगाया गया है। जांच कराई जा रही है।
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परिजन बोले- रिटायरमेंट से पहले बर्खास्तगी के रूप में मिला सेवा का इनाम
पीलीभीत। उम्रभर पुलिस विभाग में खून-पसीना बहाया। जब रिटायरमेंट का मौका आया तो महकमे ने सेवा का इनाम बर्खास्तगी के रूप में दिया। यह आरोप खुदकुशी करने वाले लिपिक विजय मिश्रा के परिजनों ने लगाया। मंगलवार की रात वे पुलिस लाइन पहुंचे। उनकी पुलिस अधिकारियों से नोकझोंक हुई। जमकर हंगामा हुआ।
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विजय मिश्रा की मौत पर उनकी पत्नी व बच्चे बेहद गुस्से में थे। उन्होंने चीख-चीख कर कहा कि जिसने पूरी उम्र पुलिस विभाग की सेवा की उसे रिटायरमेंट से छह माह पहले नकारा घोषित कर विभाग से निकाल दिया गया। उनके साथ ज्यादती हुई, जिस पर विभागीय अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। इधर पुलिस अधिकारी विजय मिश्रा की लापरवाहियों को उनकी बर्खास्तगी का कारण बता रहे थे। इसी बात को लेकर परिजन पुलिसकर्मियों को खरी खोटी सुनाने लगे। परिजनों का यह भी आरोप था कि सोमवार को विजय मिश्रा एसपी से उनके कार्यालय में आकर मिले थे। यहां उनसे दुर्व्यवहार किया गया। इससे आहत होकर उन्होंने आत्महत्या की।
विजय की पत्नी, उनकी दो बेटियां, एक बेटा व तीन-चार अन्य लोग यहां पहुंचे। आते ही वह पुलिस लाइन में लिपिक के आवास पर पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि शव जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है। पुलिसकर्मी उन्हें जिला अस्पताल ले जाना चाह रहे थे लेकिन वह सरकारी आवास से नहीं हटे। यही जमकर हंगामा करने लगे। सूचना पर सीओ सदर सतीश शुक्ला पहुंच गए और परिजनों को समझाने का प्रयास करने लगे। इस दौरान परिजनों की सीओ से काफी नोकझोंक भी हो गई। इसके बाद एसपी दिनेश कुमार पी और एएसपी डॉ. पवित्र मोहन त्रिपाठी के साथ मौके पर पहुंच गए। परिजनों की एसपी से भी काफी बहस हुई। इस मामले में देर रात तक एसपी व लिपिक के परिजनों के बीच बंद कमरे में बातचीत चलती रही।
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बेटा बोला- पिता की मौत के लिए एकाउंटेंट जिम्मेदार
देर रात एसपी से बातचीत के बाद कक्ष से बाहर निकले लिपिक के बेटे गौरव मिश्रा ने बताया कि पिता ने मंगलवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे उसे फोन किया था। बताया कि एसपी से मिले थे। बुधवार को आईजी से मिलकर अपना पक्ष रखेंगे। इसके अलावा गौरव ने बताया कि एकाउंटेंट ही उनके पिता की मौत के लिए जिम्मेदार है। एकाउंटेंट की रिपोर्ट पर ही एक पक्षीय कार्रवाई हुई। बेटे ने बताया कि उनका परिवार हरदोई से लखनऊ शिफ्ट हो गया है। वह लोग लखनऊ से आ रहे हैं, इसलिए देर हो गई। इधर एसपी दिनेश कुमार पी ने परिजनों से कहा कि अगर उन्हें लगता है कि लिपिक के खिलाफ कार्रवाई गलत हुई है तो वह अपील करें। अपने स्तर पर वह परिजनों की हरसंभव मदद करेंगे। इसके बाद परिजन माने और पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए। देर रात शव का पोस्टमार्टम हो रहा था। संवाद
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सुसाइड नोट का सच भी नहीं आ सका सामने
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लिपिक के पास से मिले सुसाइड नोट में लिखा है कि अफसरों को गुमराह करके एक एकाउंटेंट ने उसका उत्पीड़न कराया। इसी से आहत होकर वह सुसाइड कर रहा है। मतलब उसकी बर्खास्तगी के लिए पुलिस लाइन का उक्त एकाउंटेंट जिम्मेदार है। एसपी दिनेश कुुमार पी का कहना है कि सुसाइड नोट की जांच कराई जा रही है। हालांकि एकाउंटेंट का नाम उजागर नहीं किया गया। पुलिस अधिकारियों ने सुसाइड नोट को भी गोपनीय बनाए रखा है। उसे मीडिया को नहीं दिया गया है।
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