बीसलपुर (पीलीभीत)। शुक्रवार को नायब तहसीलदार शशांक सिंह के चैंबर में सुबह करीब 11 बजे उनके और वकीलों के बीच मारपीट हो गई। वकील बृहस्पतिवार को नायब तहसीलदार और अधिवक्ता में पत्रावलियों के समय पर न निपटाए जाने को लेकर हुए विवाद में मुकदमा दर्ज कराए जाने से नाराज थे। अधिवक्ताओं की ओर से नायब तहसीलदार और पांच कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। वहीं, नायब तहसीलदार ने पहले से दर्ज मुकदमे में मारपीट की धारा बढ़ाने का पत्र दिया है।
नायब तहसीलदार का आरोप है कि अधिवक्ता मनोज कुशवाहा 20-25 शुक्रवार सुबह साथियों के साथ उनके चैंबर में आ गए और जातिसूचक शब्द कहते हुए मारपीट की। वहीं मनोज कुशवाहा का आरोप है कि वह नायब तहसीलदार कोर्ट के बाहर से गुजर रहे थे। तभी नायब तहसीलदार ने उन्हें बुलाया और गालीगलौज, मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी। साथ ही उनकी जेब से पांच हजार रुपये और सोने की चेन छीन ली। काफी हंगामा हुआ तो एसडीएम मौके पर पहुंचे और बीचबचाव कर मामला शांत करा दिया। हालांकि शाम को अधिवक्ता पक्ष की ओर से भी मुकदमा दर्ज कराया गया तो नायब तहसीलदार ने भी एक दिन पहले दर्ज मुकदमे में ताजा आरोपों के आधार पर धाराएं बढ़वाने का पत्र दे दिया।
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24 घंटे पहले ही पड़
गई थी विवाद की नींव
पीलीभीत। बीसलपुर में नायब तहसीलदार और अधिवक्ताओं में हुए विवाद की नींव 24 घंटे पहले ही पड़ गई थी। बृहस्पतिवार को पत्रावलियों के निस्तारण पर शुरू हुई कहासुनी शुक्रवार को मारपीट में बदल हो गई।
दरअसल, यह विवाद शुरू हुआ बृहस्पतिवार को। अधिवक्ता मनोज कुशवाहा नायब तहसीलदार शशांक सिंह के कार्यालय में दाखिल खारिज की पत्रवालियां देखने गए थे। यहां राजस्व निरीक्षक आरके पांडेय से उनकी कहासुनी हुई। नायब तहसीलदार ने हस्तक्षेप किया तो विवाद और तूल पकड़ गया। एसडीएम आरके राजवंशी ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया था, लेकिन बृहस्पतिवार शाम को ही नायब तहसीलदार ने अधिवक्ता मनोज कुशवाहा और दो-तीन अज्ञात अधिवक्ताओं पर गाली गलौज, जान से मारने की धमकी देने, सरकारी काम में बाधा डालने और अनुसूचित जाति अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी। इसी बात पर अधिवक्ताओं भड़क उठे। आखिरकार शुक्रवार को दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हो गई। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर आरोप मढ़े हैं।
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एसडीएम की अपील बेअसर
एसडीएम आरके राजवंशी ने मामले को सुलझाने के लिए अधिवक्ताओं के साथ बैठक की। आश्वासन दिया कि नायब तहसीलदार द्वारा दी गई तहरीर वापस करा दी जाएगी। फिर मामला शांत हो गया, लेकिन शुक्रवार शाम को अधिवक्ता मनोज कुशवाहा की तहरीर पर नायब तहसीलदार शशांक सिंह, कर्मचारी आरके लक्ष्मी प्रसाद और चार अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। वहीं, नायब तहसीलदार ने दर्ज कराए मुकदमे में मारपीट की धारा बढ़ाने की बात कही है।
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मनोज कुुशवाहा 20-25 साथियों के साथ मेरे चैंबर में आए और मेरे साथ मारपीट की। टेबल पर रखीं पत्रावलियां भी फाड़ दीं। इन लोगों ने बृहस्पतिवार को भी मेरे साथ अभद्रता की थी। जान से मारने की धमकी और जाति सूचक शब्द कहे थे। मामले की तहरीर पुलिस को दी है।
- शशांक सिंह, नायब तहसीलदार बीसलपुर
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सारी गलती नायब तहसीलदार की है। अधिवक्ता बेकसूर हैं। वह सिर्फ बातचीत करने गए थे। नायब तहसीलदार ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। अधिवक्ताओं पर ही एफआईआर दर्ज करा दी। मनोज कुशवाहा शुक्रवार को नायब तहसीलदार के कोर्ट के बाहर से जा रहे थे। उनको अंदर बुलाया और मारपीट की गई।
- विष्णु वाजपेयी, अध्यक्ष तहसील बार एसोसिएशन
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मैं बृहस्पतिवार को लंबित पत्रावलियों की जानकारी करने नायब तहसीलदार कोर्ट गया था। वहां मेरे साथ गलत व्यवहार किया गया। शुक्रवार को नायब तहसीलदार ने अपने कोर्ट में बुलाया और मारपीट की। जान से मारने की धमकी दी, मेेरा गला दबाने का प्रयास किया।
- मनोज कुशवाहा, अधिवक्ता