लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिंग की जांच करने वाली एजेंसी यूपीएटीएस ने अपनी जो जांच रिपोर्ट देश विरोधी गतिविधियों और कानून विरोधी गतिविधियों की धाराएं हटा दी हैं। केवल स्लीपर सेल और मनी हैंडलर की बात कहते हुए चार्जशीट दाखिल की है। अब सीजेएम अदालत गुरुवार की सुनवाई में तय करेगी कि मुल्जिमों के खिलाफ कौन सी धाराओं में मुकदमा चलाया जाएगा।
पड़ोसी देश की मुख्य बैंक नेपाल राष्ट्र बैंक में सेंध लगाने वाले ऑनलाइन फ्राड और विदेशी मुद्रा को बदलने व धोखाधड़ी के हाई प्रोफाइल मामले में भले ही एटीएस ने तय समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी हो लेकिन मामले की चार्जशीट को लेकर अब भी कई अनसुलझे सवाल अभियोजन के लिए दिक्कत भरे हैं। एटीएस के डीएसपी शैलेंद्र सिंह राठौर ने विवेचना की और समय सीमा के अंतिम दिनों में दो नाईजीरियाई के साथ ही दस आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। आरोपी मुमताज, समीर, सलमानी, एराज अली, फहीम, उम्मेद सदाकत और अर्जुन खराड़े के खिलाफ 420 और 120 बी आईपीसी के तहत मामला बताया है। पीटर हरमन पर 419, 420 व 120 बी आईपीसी धाराएं केवल जालसाजी और साजिश का आरोपी बताती है। नाइजीरियाई बंदी एमेका माइकल को मुख्य आरोपी बताते हुए धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120 बी आईपीसी का मुल्जिम बनाया है। पूरे मामले में 109, 121 ए आईपीसी की धाराएं हटा दी हैं। एटीएस ने आरोपी संजय अग्रवाल को इस मामले में क्लीन चिट दी है।
क्या कहता है साइबर क्राइम
जिस तरह से नेपाल राष्ट्र बैंक की वेबसाइट को हैक कर उसकी रकम विदेशी खातों में भिजवाने का आरोप है, उससे इंटरनेट आधारित अपराध किया जाना साफ है। मगर एटीएस ने इसे साइबर अपराध नही माना है। हालांकि कानून के जानकारों का कहना है कि ऑनलाइन फ्राड किया जाना या इंटरनेट सेवाओं के माध्यम से किए जाने वाले अपराध को दंडित करने के लिए साइबर अपराध माना जाता है और आईटी एक्ट में ऐसे अपराधों को दंडित किए जाने की व्यवस्था भी दी गई है।
दोषी होंगे दंडित: एसपी यादव
टेरर फंडिंग के मामले में जो भी धाराएं लगाई गई हैं। वह मजिस्ट्रीयल ट्रायल है। लिहाजा अब यह साफ है कि सीजेएम कोर्ट में मामले की सुनवाई की जाएगी। इस सबंध में अभियोजन अधिकारी एसपी यादव ने बताया आपराधिक नेटवर्क कर धोखाधड़ी करने और बडे़ पैमाने पर धनराशि हेरफेर के मामले में चार्जशीट आ चुकी है। अब सटीक पैरवी करते हुए दोषियों को दंडित कराया जाएगा।