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अब पार्टियों की आड़ में चल रहे हुक्का बार, चार सौ रुपये घंटा है रेट

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पुलिस भले ही दावा करती रही हो, लेकिन कभी बंद ही नहीं हुआ धंधा
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पुलिस कार्रवाई के बाद सेटिंग करके सेफ तरीके से करते हैं कारोबार
बरेली। युवाओं की नसों में जहर खोलने वाले हुक्का बार का धंधा शहर में पूरी तरह कभी बंद ही नहीं हुआ। हालांकि पुलिस हुक्का बार बंद होने का कई बार दावा कर चुकी है। इतना जरूर होता है कि पुलिस की हर कार्रवाई के बाद संचालक सेटिंग करके सेफ तरीके से धंधा करने लगते हैं। आजकल पार्टी बुकिंग के नाम पर धंधा चल रहा है। इसमें एक तय कमरे में संबंधित लोगों के अलावा दूसरों को जाने की इजाजत नहीं होती।
शहर में करीब छह महीने से इस अवैध कारोबार को लेकर छापा और रिपोर्ट जैसी कार्रवाई चल रही है। तीन महीने पहले जब एक संगठन ने प्रेमनगर थाने में बैठे डीआईजी राजेश कुमार पांडेय से मिलकर शिकायत की तो पुलिस ने धरपकड़ शुरू की। इसके बाद कुछ हुक्काबारों पर रिपोर्ट हुई तो कुछ को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। तब धंधा कुछ मंदा हो गया था पर सेटिंग होते ही हुक्का बार फिर संचालित होने लगे। ये बार भी इन्हीं में से एक थे। यहां अब बर्थडे या अन्य पार्टी के नाम पर बुकिंग करके एक कमरा ही संबंधित लोगों को दे दिया जाता है। इस कमरे में दूसरे ग्राहकों के प्रवेश पर रोक रहती है। हालांकि इसी तरह की दूसरी पार्टी वालों को साथ कर दिया जाता है। मांग और फ्लेवर के मुताबिक जरूरत के हिसाब से टेबल पर हुक्का लगा दिए जाते हैं। हर्बल हुक्का का सामान्य रेट चार सौ रुपये प्रति घंटा है। इसके बाद तंबाकू और अन्य फ्लेवर के हिसाब से रेट बढ़ता जाता है।
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करोड़पति मालिक कर्मचारियों की मजबूरी का उठाते हैं फायदा
हुक्का बारों के मालिक करोड़पति हैं तो कर्मचारी गरीब घरों के लड़के हैं, जो रोजगार के लिए अनैतिक धंधे को मजबूरी में कर रहे हैं। मंगलवार को पकड़े गए आरोपी शिवम ने बताया कि पिता ठेला लगाते हैं। वह अभी तक नेकपुर में रहता था, अब गणेशनगर में शिफ्ट हुआ है। बिजनौर का लोकेश यहां किराये पर रहता है। उसके पिता खेती करते हैं। कार्रवाई के बाद भी ब्रूवेरी बार में रेस्टोरेंट चालू था। यहां दो लड़के काम कर रहे थे। इन्होंने बताया कि मालिक जो बताए वह करना उनकी मजबूरी है। उन्हें लगता है कि यह काम गलत है पर नई उम्र के बच्चों को हुक्का परोसना मजबूरी है। ब्रूवेरी का मालिक अक्षय करोड़पति है तो बेकप के मालिक अभिलाष के पिता एक बीमा कंपनी में अच्छे पद से वीआरएस ले चुके हैं।

पहले फरार हुआ मालिक इस बार दबोचा
ब्रूवेरी बार में तीन महीने पहले भी छापा डाला गया था। तब मालिक अक्षय के साथ ही कई लोग गच्चा देकर फरार हो गए थे। इस बार पुलिस ने उसे दबोच लिया। अक्षय ने बताया कि शॉपंग कॉम्पलेक्स के मालिक को वह साठ हजार रुपया महीना देता है। जब उससे पूछा गया कि हुक्का बार से इतनी कमाई हो जाती है तो उसका कहना था कि रेस्टोरेंट भी तो चलता है। बताया कि कुछ महीनों पहले एसएसडी प्लाजा में आग लगने से सबसे ज्यादा नुकसान उसी का हुआ था। बेकप बार के मालिक अभिलाष ने सफाई दी कि दो महीने पहले तक नवनीत नाम का व्यक्ति यह बार चला रहा था। उसने बीस हजार रुपये महीने किराये पर यह लिया है।
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आरोपियों ने दी सफाई, सिर्फ ई-सिगरेट बैन
प्रेमनगर थाने में बंद बार मालिकों ने अजीबोगरीब सफाई दी। कहा, देश में सिर्फ ई-सिगरेट बैन हुई है, हुक्का पर प्रतिबंध नहीं लगा है। जब उनसे पूछा गया कि हुक्का बार का लाइसेंस आपको किसने दिया तो बहाना किया कि उन पर फूडिंग से लेकर कई तरह के लाइसेंस हैं जिन्हें पुलिस ने देखा ही नहीं। अक्षय का कहना था कि मुंबई हाईकोर्ट ने हुक्का बार को वैध करने के मामले में कोई गाइडलाइन दी है। इसी को आधार बनाकर उन्होंने अपने वकील से यूपी हाईकोर्ट में याचिका दायर कराई है।
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