बरेली। आवारा गोवंश को पशु आश्रयस्थलों में रखने की मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की योजना पशुपालन विभाग के लिए सिरदर्द बन गई है। अफसरों ने प्रतिदिन प्रति गाय तीस रुपये के बजट से चारा, पानी, देखभाल और ठंड से बचाने में असमर्थता जता दी है। हालांकि शासन के सख्त रुख को देखते हुए अफसर फिलहाल लोगों से सहयोग मांगकर गायों को पशु आश्रयस्थलों में रखे हैं।
योगी सरकार की ओर से गायों के संरक्षण का फरमान जारी होने के बाद बरेली के पशु आश्रय गृहों में रखे गए करीब साढ़े तीन हजार गोवंशीय पशुओं के चारे, पानी, इलाज समेत अन्य सुविधा मुहैया कराने की जिम्मेदारी पशुपालन विभाग पर है। यह पशु आश्रय गृह सीबीगंज, नवाबगंज और चौबारी के पास हैं। इनमें रखे पशुओं का प्रतिमाह कैंप लगाकर इलाज करने समेत प्रति गाय नौ सौ रुपये का बजट शासन ने प्रस्तावित किया गया है। अफसरों का कहना है कि तीस रुपये प्रतिदिन के बजट में गोवंश को सारी सुविधाएं दिलाना मुश्किल है, लेकिन शासन की सख्ती को देखते हुए अफसर गायों के चारे-पानी और दवाओं के लिए लोगों से सहयोग मांग रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) डॉ. ललित कुमार वर्मा ने बताया कि फिलहाल तो लोगों की मदद से जैसे-तैसे गोवंश के चारा-पानी की व्यवस्था हो रही है लेकिन लंबे समय तक इसे जारी रखना कठिन है।
सहयोग से कब तक होगी सेवा
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के मुताबिक एक गाय को रोजाना 10 किलो भूसा, 10 किलो हरा चारा और करीब दो किलो चोकर की जरूरत होती है। गाय गर्मी के दिनों में रोज करीब 60 से 70 लीटर और जाड़े में 40 से 50 लीटर पानी पीती है। शासन का आदेश है कि एक गाय को महीने में डेढ़ क्विंटल गुड़ भी दिया जाए, लेकिन यह सब सिर्फ 30 रुपये के दैनिक बजट में देना संभव नहीं है। इसके लिए लोगों से भी आखिर कब तक मदद ली जा सकती है।