बदायूं का मूल निवासी आरोपी कई साल से देहरादून में रहकर करता है ड्राइविंग
बरेली। बैंक ऑफ बड़ौदा की स्टेशन रोड ब्रांच का एटीएम देहरादून निवासी स्मैक तस्कर ने तोड़ा था। वह बरेली कोर्ट में तारीख पर आया था। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से पहचान के बाद उसकी लोकेशन ट्रेस कर लखनऊ से पकड़वा लिया। हालांकि गिरफ्तारी चौकी चौराहे के पास से दिखाई गई है। एसएसपी ने प्रेसवार्ता में घटना का खुलासा किया। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया।
बुधवार रात करीब नौ बजे जंक्शन से थोड़ा पहले बॉब शाखा का एटीएम तोड़कर कैश निकालने की कोशिश की गई थी। घटना की जानकारी करीब डेढ़ घंटे बाद हो सकी। एसएसपी समेत कई अफसर मौके पर पहुंचे। एसपी क्राइम के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच और कोतवाली की टीम तत्काल ही पड़ताल में लग गई। बैंक स्टाफ को बुलाकर फुटेज देखी गई और फिर उस शख्स को जंक्शन रोड के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में तलाशा गया तो वह टिकट विंडो पर टिकट लेते दिखा। जिस समय उसने टिकट लिया। उस वक्त लखनऊ की दिशा में जाने वाली ट्रेन के टिकट बिक्री हो रहे थे। इसके बाद युवक लखनऊ जाने वाली प्रयागराज हरिद्वार एक्सप्रेस में चढ़ते दिखा। इस पर पुलिस ने जीआरपी लखनऊ की मदद से उसे रात में ही पकड़ लिया। आरोपी अर्जुन सिंह मूल रूप से बदायूं के बरई खेड़ा गांव का निवासी है। वह कई साल से देहरादून के डोभाल वाला घंटाघर के पास रहकर ड्राइविंग करता है। सुबह उसे बरेली लाया गया। गुरुवार को कोतवाली में एसएसपी शैलेश पांडेय ने प्रेसवार्ता के दौरान आरोपी से पूछताछ की तो उसने घटना करना कबूल कर लिया। बैंक प्रबंधक गीता घुसाल भी खुलासे के वक्त मौजूद रहीं।
फतेहगंज पश्चिमी में पकड़ा गया था स्मैक की तस्करी में
स्मैक के धंधे के लिए बदनाम फतेहगंज पश्चिमी कस्बे में देहरादून और रुड़की के तस्कर अक्सर पकड़े जाते रहे हैं। अर्जुन सिंह भी 2016 में फतेहगंज पश्चिमी में स्मैक की तस्करी करते पकड़ा गया था। कुछ समय बाद वह जमानत पर छूट गया। उसी केस की तारीख करने वह बरेली आया था और यहां रुपये निकालने के बहाने उसने एटीएम का कैश बॉक्स खोलने की कोशिश की।
आरोपी बोला- कैश न निकला तो गुस्से में की तोड़फोड़
आरोपी अर्जुन ने सफाई दी कि कोर्ट नंबर सात में तारीख के बाद उसे शाम को परिचित के पास लखनऊ जाना था। उसने अपनी मां को कॉल करके खाते में एक हजार रुपये डलवाए थे। इन्हें निकालने के लिए वह एक के बाद एक तीन एटीएम में गया पर कैश नहीं निकला। यहां भी दो बार ट्रांजेक्शन के बाद कैश नहीं निकला तो उसने गुस्से में एटीएम में तोड़फोड़ की। एसएसपी ने उससे पूछा कि गुस्सा ही था तो 20 मिनट तक तोड़फोड़ और बार-बार बाहर जाकर माहौल भांपने का क्या मतलब था तो अर्जुन खामोश हो गया।
एटीएम की मियाद खत्म हुए हो चुका है एक साल
घटना के बाद जांच में बैंक के स्तर पर सुरक्षा बंदोबस्त ध्वस्त मिले थे। अर्जुन ने हाथ से ही जिस एटीएम का पुर्जा-पुर्जा अलग कर डाला वह आठ साल से लगा था जबकि बैंक के नियमानुसार इसे सात साल में हटा लेना चाहिए था। एटीएम कक्ष का शटर और शीशे का गेट भी नहीं लग रहा था। बैंक और एटीएम में कोई गार्ड नहीं था। बैंक प्रबंधक ने बताया कि सर्विलांस से सीसीटीवी के जरिये एटीएम पर हेड क्वार्टर से नजर रखी जाती है पर रात तक वहां से भी कोई मेसेज नहीं आया था। सुबह जरूर फुटेज निकालने के लिए कंपनी कर्मचारी बैंक आया पर तब तक केस खुल चुका था।
सभी बैंकों को कप्तान ने भेजा रिमाइंडर
एसएसपी ने सभी बैंकों को अपने स्तर पर सुरक्षा बंदोबस्त दुरुस्त रखने संबंधी पत्र भेजा है। उन्होंने बैंक में गार्ड रखने, अंदर से बाहर तक साफ विजन और हर एंगल के फोटो देने वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने, सेंसिटिव अलार्म लगाने और कैश वैन में भी कैमरे लगाने आदि का मूल्यांकन करने की अपेक्षा की है। कहा है कि अपने क्षेत्र की पुलिस से भी बैंक अफसर सीधा संवाद रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल जानकारी दें। सभी थानों की पुलिस को भी बैंकों और एटीएम पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
एटीएम उखाड़ लाते थे बदायूं के बदमाश
बदायूं में ककराला के बदमाश एटीएम उखाड़ लाने के लिए चर्चित रहे हैं। खासतौर से पंजाब नेशनल बैंक के एटीएम उखाड़ने में इनका कई बार नाम आया था। देश के अलग-अलग हिस्सों से पीएनबी के एटीएम उखाड़ने की घटनाओं के बाद इनकी धरपकड़ हुई। बाद में पता लगा कि एटीएम बनाने वाली कंपनी का एक पूर्व कर्मचारी भी इनका सहयोगी था।