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अब थानों के मालखानों में सड़ते हैं विसरा

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विसरा - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। लोगों की मौत के बाद उनके शवों का विसरा अब जिला मुख्यालय पर बेवजह नहीं रोका जाता पर बिना पैरवी वाले मामलों में थानों के मालखानों में दुर्गति हो जाती है। विवेचक अपनी सहूलियत के हिसाब से ही इन्हें लैब को भेजते हैं।
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पहले शवों का विसरा जिला मुख्यालय पर बनाए गए कक्ष में रख दिया जाता था। बाद में विवेचना के दौरान जरूरत पड़ने पर विवेचक इन्हें यहां से लैब भिजवाते थे। वर्ष 2015 में जब पुराना पोस्टमार्टम हाउस टूटकर नया बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो तत्कालीन एसएसपी को विसरा संबंधी दिक्कत बताई गई। उन्होंने आदेश जारी करके पोस्टमार्टम के दिन ही विसरा संबंधित विवेचक या थाने की पुलिस को सौंपने का आदेश कर दिया। इसके बाद से लगातार विसरा मौके पर ही पुलिस को दे दिए जाते हैं। बताते हैं कि इनमें से कई विसरा थानों के मालखानों में रखवा दिए जाते हैं। अज्ञात या बिना पैरवी वाले लोगों के शवों का विसरा लंबे वक्त तक रखकर खराब भी हो जाता है। इसका सीधा असर केस की विवेचना पर पड़ता है।

क्या है विसरा
 किसी शख्स की मौत के बाद रासायनिक परीक्षण के लिए मृतक के लीवर, किडनी, आंत समेत अन्य अंग निकाल लिए जाते हैं। जहर या ऐसी ही किसी अन्य वजह इसके परीक्षण से पता कर ली जाती हैं। इसे केमिकल में संरक्षित करके रख लिया जाता है और लैब भेजा जाता है।
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